MP Breaking News: अब सीधे जनता चुनेगी नगर पालिका अध्यक्ष; नए वाहनों की खरीदी पर टैक्स में 50% मिलेगी छूट
MP Breaking News: मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में वाहन स्क्रैपिंग नीति को बढ़ावा देने मोटरयान कर में छूट प्रदान करने और नगर पालिका चुनाव प्रणाली में बदलाव जैसे बड़े निर्णय लिए गए। इन फैसलों का सीधा असर प्रदेश के वाहन मालिकों, आम नागरिकों और स्थानीय निकायों की राजनीति पर पड़ेगा।
पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर कर में छूट
बैठक में सबसे अहम फैसला पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा से जुड़ा रहा। सरकार ने तय किया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने पुराने वाहन को स्क्रैप कर नया वाहन खरीदता है तो उसे मोटरयान कर में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। बीएस-1 और उससे पहले के मानक वाले वाहनों के साथ-साथ बीएस-2 श्रेणी के कई प्रकार के भारी और मध्यम वाहनों पर भी यह छूट लागू होगी।
प्रमाण पत्र के आधार पर मिलेगी रियायत
इस निर्णय के तहत जो व्यक्ति अपने पुराने वाहन को अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्र पर जमा करेगा, उसे एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर नया वाहन खरीदने पर कर में पचास प्रतिशत की छूट दी जाएगी। यह छूट गैर-परिवहन और परिवहन दोनों तरह के वाहनों पर लागू होगी।

छूट से आएगा इतना अतिरिक्त वित्तीय भार
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक 1563 नए वाहनों पर इस योजना के तहत लगभग सत्रह करोड़ पाँच लाख रुपये की छूट दी जा चुकी है। फिलहाल प्रदेश में करीब निन्यानवे हजार बीएस-1 और बीएस-2 श्रेणी के वाहन सड़कों पर चल रहे हैं। यदि इन सभी वाहन मालिकों को कर में छूट दी जाती है तो सरकार पर लगभग सौ करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।
केंद्र से मिल रही विशेष सहायता
केंद्र सरकार भी वाहन स्क्रैपिंग को प्रोत्साहन देने के लिए राज्यों को मदद कर रही है। इसी क्रम में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश को दो सौ करोड़ रुपये की विशेष सहायता दी जाएगी। इस सहायता का उपयोग राज्य में स्क्रैपिंग नीति को बेहतर ढंग से लागू करने और पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए किया जाएगा।
वायु प्रदूषण नियंत्रण में मिलेगी मदद
भारत में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए अप्रैल 2000 से भारत स्टेज मानक लागू किए गए थे। बीएस-1 से शुरुआत हुई और इसके बाद धीरे-धीरे मानक कड़े होते गए। आज जबकि बीएस-6 मानक लागू हैं, फिर भी प्रदेश में बड़ी संख्या में बीएस-1 और बीएस-2 श्रेणी के वाहन चल रहे हैं। ये वाहन प्रदूषण बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। सरकार का मानना है कि इस छूट योजना से पुराने वाहन मालिक नए वाहन खरीदने के लिए प्रेरित होंगे और प्रदूषण कम होगा।

सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट की अहमियत
जिस व्यक्ति का वाहन स्क्रैप किया जाएगा उसे एक सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट जारी किया जाएगा। नया वाहन खरीदने और कर में छूट पाने के लिए यह प्रमाण पत्र जरूरी होगा। इस सर्टिफिकेट की वैधता जारी होने की तारीख से तीन साल तक रहेगी। यह प्रमाण पत्र इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्तांतरणीय होगा और इसे निर्धारित प्लेटफार्म पर आगे भी स्थानांतरित किया जा सकता है।
एक बार जब इस प्रमाण पत्र का उपयोग हो जाएगा तो संबंधित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय या डीलर द्वारा इसे रद्द कर दिया जाएगा और डेटाबेस में अपडेट कर दिया जाएगा। इस तरह किसी भी प्रमाण पत्र का दो बार इस्तेमाल नहीं हो पाएगा।
टैक्स में छूट पाने के लिए यह शर्तें हैं जरुरी
छूट का लाभ तभी मिलेगा जब नया वाहन मध्यप्रदेश में ही पंजीकृत किसी अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्र से जारी सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट के आधार पर खरीदा गया हो। यदि प्रमाण पत्र किसी अन्य राज्य से जारी हुआ है तो छूट नहीं दी जाएगी। साथ ही यह भी जरूरी है कि स्क्रैप किए गए वाहन की श्रेणी और खरीदे गए वाहन की श्रेणी समान हो।
यदि वाहन का कर जीवनकाल के लिए जमा कर दिया गया है तो उस पर पचास प्रतिशत की एकमुश्त छूट दी जाएगी। वहीं यदि कर मासिक, तिमाही या वार्षिक आधार पर वसूला जाता है तो वाहन मालिक को आठ साल तक कर में पचास प्रतिशत छूट मिलती रहेगी।
इस निर्णय से पुरानी अधिसूचना पर रोक
मध्यप्रदेश परिवहन विभाग ने आठ सितंबर 2022 को मोटरयान कर में छूट से जुड़ी एक अधिसूचना जारी की थी। मंत्रि-परिषद ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था के लागू होने के बाद पुरानी अधिसूचना के अंतर्गत दी जाने वाली छूट अब लागू नहीं होगी।
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नगरपालिका चुनाव को लेकर बड़ा निर्णय
बैठक का दूसरा बड़ा निर्णय स्थानीय निकायों से संबंधित रहा। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश 2025 को स्वीकृति प्रदान की है। इसके तहत प्रदेश की नगर पालिका और नगर परिषदों के अध्यक्ष का चुनाव अब प्रत्यक्ष प्रणाली से कराया जाएगा। यानी आम मतदाता सीधे वोट देकर अध्यक्ष का चुनाव करेंगे।
एमपी में प्रत्यक्ष प्रणाली का इतिहास
प्रदेश में नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से वर्ष 1999 से लेकर 2014 तक होता रहा। लेकिन वर्ष 2019 में कोविड महामारी के कारण चुनाव नहीं हो पाए। इसके बाद वर्ष 2022 में जब नगरीय निकायों के चुनाव हुए तो अध्यक्ष का चयन अप्रत्यक्ष प्रणाली से किया गया, जिसमें पार्षद मिलकर अध्यक्ष चुनते हैं।
अब सरकार ने निर्णय लिया है कि वर्ष 2027 में होने वाले अगले नगरीय निकाय चुनाव से अध्यक्ष पद का चुनाव फिर से प्रत्यक्ष प्रणाली से होगा। इसके लिए मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धाराओं में संशोधन कर नया अध्यादेश लाने का फैसला लिया गया है।
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प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के यह फायदे
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली में जनता का भरोसा बढ़ता है क्योंकि अध्यक्ष सीधे जनता के वोट से चुना जाता है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है। वहीं अप्रत्यक्ष प्रणाली में कई बार पार्षदों की राजनीतिक जोड़-तोड़ और दलगत समीकरण निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जिससे मतदाताओं का भरोसा कमजोर होता है।
अध्यक्ष का हो सकेगा जनाधार मजबूत
नगरपालिका अध्यक्ष पद का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होने का राजनीतिक महत्व भी है। इससे अध्यक्ष का जनाधार मजबूत होता है और उसकी जवाबदेही जनता के प्रति होती है। प्रदेश सरकार ने यह कदम ऐसे समय पर उठाया है जब स्थानीय निकायों में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है।
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