Pitru Paksha Tarpan: मप्र की इस पवित्र नगरी में निःशुल्क होता है तर्पण, पितृपक्ष में 35 सालों से जारी परम्परा
Pitru Paksha Tarpan: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में स्थित ताप्ती उद्गम स्थल धार्मिक दृष्टि से बेहद पवित्र माना जाता है। हर वर्ष पितृपक्ष के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करने पहुंचते हैं। विशेष बात यह है कि इस पावन अवसर पर यहां आने वाले श्रद्धालुओं से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता। तर्पण के लिए आवश्यक सामग्री भी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। यह परंपरा पिछले तीन दशक से अधिक समय से लगातार निभाई जा रही है और आज यह पूरे क्षेत्र में एक उदाहरण बन चुकी है।
Pitru Paksha Tarpan का महत्व
हिंदू धर्म में पितृपक्ष का समय पूर्वजों को याद करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना करने का अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में पितरों की आत्माएं अपने वंशजों से आशीर्वाद की अपेक्षा करती हैं। तर्पण के जरिए जल और अन्न अर्पित कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि जिन पूर्वजों को विधिपूर्वक तर्पण किया जाता है, वे संतुष्ट होकर परिवार की उन्नति और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

दो पालियों में होता है Pitru Paksha Tarpan
पितृपक्ष के दौरान ताप्ती उद्गम स्थल पर रोज सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगती है। रविवार और छुट्टी के दिनों में यह संख्या और भी बढ़ जाती है। ऐसे अवसरों पर व्यवस्थाओं को बनाए रखने के लिए तर्पण दो पालियों में संपन्न कराया जाता है। पहली पाली सुबह आठ बजे शुरू होती है और उसके बाद दूसरी पाली में भी श्रद्धालु अपने पूर्वजों का तर्पण करते हैं। व्यवस्थापक इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि कोई भी व्यक्ति इस धार्मिक कर्म से वंचित न रह जाए।
Pitru Paksha Tarpan के लिए महाराष्ट्र से भी आते श्रद्धालु
ताप्ती उद्गम स्थल केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के लोगों के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। पितृपक्ष के दौरान नागपुर, अमरावती और अकोला जैसे शहरों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ताप्ती सरोवर के किनारे वातावरण पूरी तरह धार्मिक रंग में रंग जाता है। मंत्रोच्चार और शंखध्वनि से चारों ओर आस्था की गूंज सुनाई देती है।

Pitru Paksha Tarpan में त्रिवेदी परिवार की सेवा भावना
इस निशुल्क तर्पण परंपरा के पीछे मुलताई का त्रिवेदी परिवार सेवा की भावना से जुड़े हुए हैं। लक्ष्मीनारायण मंदिर के पुजारी पंडित गणेश त्रिवेदी बताते हैं कि इस परंपरा की शुरुआत उनके पिता स्वर्गीय दुर्गाशंकर त्रिवेदी ने की थी। उनका विचार था कि किसी भी व्यक्ति को आर्थिक कारणों से धार्मिक कार्य करने से वंचित नहीं होना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने निःशुल्क तर्पण की व्यवस्था शुरू की। पिता के निधन के बाद अब गणेश त्रिवेदी स्वयं इस सेवा को निभा रहे हैं और बीते 35 वर्षों से यह क्रम बिना रुके चलता आ रहा है।
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गायत्री शक्ति पीठ पर भी नि:शुल्क Pitru Paksha Tarpan
ताप्ती सरोवर के समीप स्थित गायत्री शक्ति पीठ में भी पितृपक्ष के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए तर्पण की निःशुल्क व्यवस्था की जाती है। यहां भी हर दिन बड़ी संख्या में लोग अपने पितरों के नाम पर जल और अन्न अर्पित करते हैं। दोनों ही स्थलों पर पितृपक्ष के दौरान सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं का आना-जाना बना रहता है।
Pitru Paksha Tarpan के लिए पहले से उपलब्ध कराई जाती सामग्री
पितरों को तर्पित करने आए लोगों का कहना है कि इस तरह की निःशुल्क व्यवस्था से धार्मिक कार्य करना आसान हो जाता है। यहां उन्हें किसी प्रकार की चिंता नहीं रहती क्योंकि तर्पण के लिए आवश्यक सामग्री पहले से उपलब्ध कराई जाती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि मुलताई का वातावरण उन्हें आत्मिक शांति प्रदान करता है। सुबह से ही सरोवर के तट पर वेद मंत्रों की ध्वनि गूंजती रहती है, जिससे आस्था और भक्ति का माहौल और भी गहरा हो जाता है।
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Pitru Paksha Tarpan से आस्था का केंद्र बन चुका है मुलताई
पितृपक्ष के दौरान मुलताई का ताप्ती उद्गम स्थल धार्मिक पर्यटन का केंद्र बन जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समय नगर में रौनक बढ़ जाती है। दुकानों और बाजारों में भीड़ रहती है, लेकिन सबसे ज्यादा आकर्षण ताप्ती सरोवर और उसके किनारे आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों का होता है। लोग मानते हैं कि यहां आकर किए गए तर्पण से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
गरीब भी कर पाते विधिपूर्वक Pitru Paksha Tarpan
निःशुल्क तर्पण की यह परंपरा न केवल धार्मिक महत्व रखती है बल्कि यह सामाजिक सेवा का भी उदाहरण है। यहां किसी भी व्यक्ति से पैसे नहीं लिए जाते और सभी को समान रूप से पूजा सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। इस व्यवस्था के कारण गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी अपने पूर्वजों का विधिपूर्वक श्राद्ध कर पाते हैं।
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