खेती किसानी

Dairy Sector Climate Change: कमजोर मानसून और हीट स्ट्रेस से डेयरी सेक्टर पर संकट, जानिए कैसे बढ़ेगा दूध उत्पादन

Climate Change and the Dairy Sector: Crisis looms over the dairy sector due to a weak monsoon and heat stress; find out how milk production can be boosted.

Dairy Sector Climate Change: कमजोर मानसून और हीट स्ट्रेस से डेयरी सेक्टर पर संकट, जानिए कैसे बढ़ेगा दूध उत्पादन
Dairy Sector Climate Change: कमजोर मानसून और हीट स्ट्रेस से डेयरी सेक्टर पर संकट, जानिए कैसे बढ़ेगा दूध उत्पादन

कैप्टन (डॉ.) ए.वाई. राजेंद्र (Dairy Sector Climate Change)। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, लेकिन जलवायु परिवर्तन अब इस उपलब्धि के सामने नई चुनौती बनकर खड़ा हो गया है। कमजोर मानसून, लगातार बढ़ती गर्मी और मवेशियों पर हीट स्ट्रेस का असर दूध उत्पादन से लेकर किसानों की आय तक पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते बेहतर पोषण, आधुनिक डेयरी प्रबंधन और वैज्ञानिक तकनीकों को नहीं अपनाया गया, तो आने वाले वर्षों में डेयरी क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

जलवायु परिवर्तन से बढ़ी डेयरी क्षेत्र की चिंता

देश का डेयरी क्षेत्र इन दिनों जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को लेकर गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। अल नीनो (El Niño) की स्थिति के कारण इस बार मानसून कमजोर रहने की आशंका जताई जा रही है। इसके साथ ही लंबे समय तक लू चलने और पशुओं पर बढ़ते हीट स्ट्रेस का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे हालात दूध उत्पादन और पशुपालन पर सीधा असर डाल सकते हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार इस वर्ष मानसून की बारिश लंबी अवधि के औसत (एलपीए) की लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं करीब 60 प्रतिशत संभावना इस बात की है कि मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। यदि बारिश समय पर नहीं होती या कम होती है तो गर्मी से राहत नहीं मिलती, जिससे डेयरी उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है।

दुनिया में सबसे बड़ा दूध उत्पादक, फिर भी उत्पादकता कम

भारत दूध उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर है, लेकिन प्रति पशु दूध उत्पादन के मामले में अभी भी वैश्विक औसत से पीछे है। देश में एक गाय से प्रतिदिन औसतन 4.87 किलोग्राम दूध प्राप्त होता है, जबकि वैश्विक औसत 7.18 किलोग्राम प्रतिदिन है।

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी का बढ़ता प्रभाव इस अंतर को और बढ़ा सकता है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार सूखे की स्थिति में दूध उत्पादन 25 प्रतिशत से अधिक घट सकता है। वहीं अल नीनो से प्रभावित डेयरी प्रणालियों के वैश्विक आंकड़े बताते हैं कि उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।

छोटे किसानों पर सबसे अधिक असर

भारत में डेयरी व्यवसाय का बड़ा हिस्सा छोटे और सीमांत किसानों पर आधारित है। जलवायु संबंधी झटकों का असर सबसे पहले इन्हीं किसानों पर पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में किसान नए निवेश से बचने लगते हैं और पशुओं की संख्या बढ़ाने की योजना टाल देते हैं। उनका पूरा ध्यान केवल दूध देने वाले मौजूदा पशुओं को बनाए रखने पर केंद्रित हो जाता है। इससे भविष्य में डेयरी क्षेत्र की विकास गति भी प्रभावित होती है।

गर्मी का असर केवल दूध तक सीमित नहीं

बढ़ता तापमान डेयरी पशुओं को कई तरह से प्रभावित करता है। गर्मी के कारण दूध उत्पादन कम हो जाता है, पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है और प्रजनन क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। इसके अलावा चारे और पानी की कमी से स्थिति और गंभीर हो जाती है।

जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे हालात अब पहले की तुलना में अधिक बार देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में डेयरी क्षेत्र को जलवायु के अनुकूल बनाना अब केवल विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है।

तापमान बढ़ने के साथ घट जाता है चारा सेवन

विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी बढ़ने पर सबसे पहले पशुओं की खाने की क्षमता प्रभावित होती है। दूध देने वाली गायें 25 से 26 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ही सामान्य से कम चारा खाना शुरू कर देती हैं। जैसे-जैसे तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचता है, चारे का सेवन तेजी से घटने लगता है। यदि तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए तो पशु लगभग 40 प्रतिशत कम चारा खाते हैं।

इसके साथ ही पानी की पर्याप्त उपलब्धता भी बेहद जरूरी होती है। एक लीटर दूध उत्पादन के लिए लगभग 4 से 5 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। जब पशुओं को पर्याप्त चारा और पानी नहीं मिलता, तो दूध उत्पादन के साथ-साथ उनका स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है।

संतुलित पोषण से कम हो सकता है नुकसान

विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से तैयार संतुलित कंपाउंड फीड इस समस्या का प्रभावी समाधान हो सकता है। इसमें आवश्यक पोषक तत्व अधिक मात्रा में होते हैं, जिससे कम चारा खाने की स्थिति में भी पशुओं को पर्याप्त पोषण मिल जाता है।

ऐसा संतुलित आहार पाचन के दौरान शरीर में कम ऊष्मा पैदा करता है और चारे का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करता है। इसके अलावा खराब गुणवत्ता वाले चारे की कमी की भरपाई करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और प्रजनन क्षमता सुधारने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे पशु गर्मी और अन्य जलवायु संबंधी तनाव का बेहतर सामना कर पाते हैं।

बेहतर प्रबंधन भी उतना ही जरूरी

केवल अच्छा पोषण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आधुनिक डेयरी प्रबंधन भी आवश्यक है। पशुओं के लिए छायादार स्थान, अच्छी हवा आने-जाने वाले शेड और हर समय स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना गर्मी के प्रभाव को कम करने में मदद करता है।

इसके अलावा साफ-सफाई बनाए रखना, समय पर टीकाकरण कराना, नियमित पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना और स्वच्छ तरीके से दुग्ध दोहन करना भी जरूरी है। इससे दूध उत्पादन प्रभावित करने वाली कई बीमारियों की रोकथाम की जा सकती है। दूध को सुरक्षित रखने के लिए ठंडा रखने की व्यवस्था और स्वच्छ भंडारण सुविधाओं में निवेश करने से गुणवत्ता बेहतर रहती है और बर्बादी भी कम होती है।

तकनीक और प्रशिक्षण निभाएंगे अहम भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए किसानों तक सही जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है। डिजिटल सलाहकारी प्लेटफॉर्म, प्रदर्शन फार्म और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए आधुनिक डेयरी प्रबंधन की जानकारी अधिक से अधिक पशुपालकों तक पहुंचाई जा सकती है।

नई तकनीकों की मदद से किसान पशुओं के स्वास्थ्य और उनकी उत्पादकता पर बेहतर निगरानी रख सकते हैं। वहीं नस्ल सुधार कार्यक्रमों में लगातार निवेश करने से ऐसी नस्लों का विकास संभव होगा जो अधिक गर्मी सहन करने के साथ बेहतर दूध उत्पादन भी कर सकें।

सरकार और उद्योग की साझा जिम्मेदारी

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए सरकार, डेयरी उद्योग और किसानों को मिलकर काम करना होगा। डेयरी उद्योग जागरूकता अभियान, प्रदर्शन कार्यक्रम और वैज्ञानिक फीडिंग समाधान उपलब्ध कराकर किसानों की मदद कर सकता है।

वहीं सरकार की राष्ट्रीय गोकुल मिशन और पशु औषधि जैसी योजनाएं पहले से ही नस्ल सुधार और पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही हैं। यदि इन प्रयासों के साथ लगातार नीतिगत सहयोग, आसान ऋण सुविधा और जलवायु-अनुकूल तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलता रहा, तो डेयरी क्षेत्र और अधिक मजबूत बन सकेगा।

भविष्य की चुनौतियों के लिए अभी से तैयारी जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम के दौर में डेयरी क्षेत्र की मजबूती केवल दूध उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध करोड़ों किसानों की आय, देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है।

यदि अभी से जलवायु परिवर्तन के अनुरूप बेहतर पोषण, आधुनिक प्रबंधन, नई तकनीकों और मजबूत सरकारी सहयोग पर ध्यान दिया जाए, तो भारत का डेयरी क्षेत्र भविष्य की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करते हुए अपनी उत्पादकता और स्थिरता दोनों बनाए रख सकेगा।

(लेखक एनिमल न्यूट्रिशन बिजनेस, गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड के सीईओ हैं)

सोशल मीडिया पर बैतूल अपडेट की खबरें पाने के लिए फॉलो करें-

देशदुनिया की ताजा खबरें (Hindi News Madhyapradesh) अब हिंदी में पढ़ें| Trending खबरों के लिए जुड़े रहे betulupdate.com से| आज की ताजा खबरों (Latest Hindi News) के लिए सर्च करें betulupdate.com

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button