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Amul Milk Dairy: हर दिन 200 करोड़ का ऑनलाइन पेमेंट करती है यह दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति

Amul Milk Dairy: हर दिन 200 करोड़ का ऑनलाइन पेमेंट करती है यह दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति
Amul Milk Dairy: हर दिन 200 करोड़ का ऑनलाइन पेमेंट करती है यह दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति

Amul Milk Dairy: क्या आप यकीन कर सकते हैं कि देश में कोई ऐसी दुग्ध उत्पादक समिति भी है जो पशुपालकों और दुग्ध उत्पादक किसानों को रोज 200 करोड़ रुपये का ऑनलाइन पेमेंट करती है…? आप इस पर शायद ही यकीन करें, लेकिन यह एक सच्चाई है।

यह कारनामा अपने ही देश के गुजरात प्रांत में स्थित गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (अमूल) है। इस संस्था ने आज अपनी स्थापना का स्वर्ण जयंती समारोह मनाया। इसमें बतौर मुख्य अतिथि स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र शामिल हुए। इस मौके पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने संस्था से जुड़े अनेक रोचक तथ्यों का खुलासा किया।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि गुजरात के गांवों ने मिलकर 50 वर्ष पहले जो पौधा लगाया था, वो आज विशाल वटवृक्ष बन गया है। और इस विशाल वटवृक्ष की शाखाएं आज देश-विदेश तक फैल चुकी हैं। इस अवसर पर आप सभी को बधाई।

यहां देखें वीडियो….

गुजरात की दूध समितियों से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का, हर पुरुष, हर महिला का भी मैं अभिनंदन करता हूं। और इसके साथ हमारे एक और साथी हैं, जो डेयरी सेक्टर के सबसे बड़े स्टेकहोल्डर हैं… मैं उन्हें भी प्रणाम करता हूं। ये स्टेकहोल्डर, ये साझीदार हैं- हमारा पशुधन।

मैं आज इस यात्रा को सफल् बनाने में पशुधन के योगदान को भी सम्मानित करता हूं। उनके प्रति आदर व्यक्त करता हूं। इनके बिना डेयरी सेक्टर की कल्पना भी नहीं हो सकती। इसलिए मेरा देश के पशुधन को भी प्रणाम है।

अमूल जैसा कोई ब्रांड नहीं

भारत की आजादी के बाद, देश में बहुत से ब्रैंड बने लेकिन अमूल जैसा कोई नहीं। आज अमूल भारत के पशुपालकों के सामर्थ्य की पहचान बन चुका है। अमूल यानि विश्वास। अमूल यानि विकास। अमूल यानि जनभागीदारी। अमूल यानि किसानों का सशक्तिकरण। अमूल यानि समय के साथ आधुनिकता का समावेश, अमूल यानि आत्मनिर्भर भारत की प्रेरणा, अमूल यानि बड़े सपने, बड़े संकल्प, और उससे भी बडी सिद्धियां।

पचास से ज्यादा देशों में निर्यात

आज दुनिया के 50 से ज्यादा देशों में अमूल के प्रॉडक्ट को निर्यात किया जाता है। 18 हजार से ज्यादा दुग्ध सहकारी मंडली, 36 लाख किसानों का नेटवर्क, हर दिन साढ़े तीन करोड़ लीटर से ज्यादा दूध का संग्रहण, हर रोज पशुपालकों को 200 करोड़ रुपए से अधिक का ऑनलाइन पेमेंट, ये आसान नहीं है।

संगठन की शक्ति का है प्रतीक

छोटे-छोटे पशुपालकों की ये संस्था, आज जिस बड़े पैमाने पर काम कर रही है, वही तो संगठन की शक्ति है, सहकार की शक्ति है। दूरगामी सोच के साथ लिए गए फैसले कई बार आने वाली पीढ़ियों का भाग्य कैसे बदल देते हैं, अमूल इसका भी एक उदाहरण है।

खेड़ा मिल्क यूनियन के रूप में नींव

आज के अमूल की नींव, सरदार वल्लभ भाई पटेल जी के मार्गदर्शन में खेड़ा मिल्क यूनियन के रूप में रखी गई थी। समय के साथ डेयरी सहकारिता गुजरात में और व्यापक होती गई और फिर गुजरात मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन बनी। आज भी ये सरकार और सहकार के तालमेल का बेहतरीन मॉडल है।

दुनिया के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक

ऐसे ही प्रयासों की वजह से हम, आज दुनिया के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देश हैं। भारत के डेयरी सेक्टर में 8 करोड़ लोग सीधे जुड़े हुए हैं। अगर मैं पिछले 10 साल की बात करूं तो, भारत में दूध उत्पादन में करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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