MP ROAMS Portal: आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए रोम्स पोर्टल लागू, कर्मचारी संगठनों ने पूछा- हमारा लॉगिन कहां है?
MP ROAMS Portal: ROAMS portal implemented for outsourced employees; employee unions ask—where is our login?

MP ROAMS Portal: मध्य प्रदेश राज्य प्रशासन ने सरकारी महकमों में बाहरी एजेंसियों के माध्यम से सेवाएं देने वाले कर्मचारियों की पूरी कार्यप्रणाली को कंप्यूटरीकृत करने का बड़ा निर्णय लिया है। इसके तहत अब ठेके पर काम करने वाले कर्मियों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी को रोम्स नामक डिजिटल मंच पर दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नए ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से आउटसोर्सिंग कंपनियों के पंजीकरण, उनकी प्रमाणिकता की पड़ताल, कर्मियों के पहचान सत्यापन, ड्यूटी पर आने की तारीख, हर महीने की उपस्थिति और एजेंसी द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले बिलों का पूरा हिसाब-किताब एक ही जगह सुरक्षित रखा जाएगा।
समय सीमा और भुगतान संबंधी नए निर्देश
वित्त महकमे की तरफ से इस सिलसिले में सितंबर के दूसरे सप्ताह में एक विस्तृत आदेश जारी किया गया है। इसके जरिए राज्य के सभी शासकीय विभागों, निदेशालयों और क्षेत्रीय कार्यालयों को यह हिदायत दी गई है कि वे इस डिजिटल मंच पर अटकी हुई तमाम औपचारिकताओं को समय रहते पूरा कर लें। आगामी अक्टुबर के अंतिम दिन तक सभी पुराने समझौतों, वर्क ऑर्डर और पेंडिंग पड़े कामों को इस पोर्टल पर अपडेट करना जरूरी बना दिया गया है। इसके अतिरिक्त, अक्टुबर महीने से ठेका कर्मचारियों के पारिश्रमिक के भुगतान के लिए इसी पोर्टल से तैयार होने वाले इनवॉइस को आवश्यक कर दिया गया है। यदि किसी एजेंसी का बिल इस सिस्टम से जनरेट नहीं होगा, तो खजाने से राशि स्वीकृत नहीं की जाएगी।
नए और पुराने समझौतों के लिए तय नियम
प्रदेश सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानी एक अप्रैल के पश्चात स्वीकृत किए गए सभी नए ठेकों तथा कार्यादेशों को इस ऑनलाइन व्यवस्था से जोड़ना लाजिमी कर दिया है। इसके साथ ही जो अनुबंध पहले से संचालित हो रहे हैं, उनका ब्योरा भी इस मंच पर चढ़ाया जाएगा। शासन का मुख्य उद्देश्य यही है कि आउटसोर्सिंग से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को एक आधुनिक और पारदर्शी स्वरूप प्रदान किया जा सके, ताकि व्यवस्था में व्यापक सुधार हो।
कर्मचारी यूनियनों की मुख्य आपत्ति और मांग
सरकार के इस कदम की सराहना करने के साथ-साथ कर्मचारी संगठनों ने इस व्यवस्था में एक गंभीर खामी की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि जब कर्मियों की हर व्यक्तिगत जानकारी इस पोर्टल पर मौजूद रहेगी, तो स्वयं कर्मचारियों को अपने खाते में झांकने का अधिकार क्यों नहीं दिया जा रहा है? अस्थाई एवं आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चे के प्रमुख पदाधिकारियों का तर्क है कि प्रत्येक कर्मचारी को उसका अपना यूजर आईडी और पासवर्ड प्रदान किया जाना चाहिए। इससे वे स्वयं अपने मोबाइल फोन या कंप्यूटर के माध्यम से यह देख सकेंगे कि महीने में उनकी कितनी हाजिरी लगाई गई है, उनका कुल कितना वेतन बना है और उसमें से कितनी कटौती की गई है।
प्रोविडेंट फंड और वेतन कटौती पर पारदर्शिता की आवश्यकता
कर्मचारी प्रतिनिधियों का मानना है कि लंबे समय से आउटसोर्सकर्मी अपने पारिश्रमिक और भविष्य निधि की राशि में होने वाली गड़बड़ियों की शिकायतें करते आए हैं। यदि इस नई प्रणाली में कर्मचारियों के लिए अलग से लॉगिन की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो उन्हें यह कभी पता ही नहीं चल पाएगा कि उनके वेतन से पीएफ के मद में काटी गई रकम वास्तव में उनके खाते में जमा हुई है या नहीं। इस तरह डिजिटल व्यवस्था का असली लाभ उन तक नहीं पहुंच पाएगा, जिनका इससे सीधा सरोकार है।
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अस्थाई कर्मियों को जोड़ने और पहचान पत्र देने की अपील
मोर्चे ने केवल आउटसोर्स ही नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों में बरसों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी और अस्थाई कर्मचारियों के आंकड़ों को भी इस पोर्टल पर शामिल करने का आग्रह किया है। संगठन की मांग है कि सरकारी दफ्तरों में सेवाएं दे रहे सभी अस्थाई कर्मियों को बाकायदा आधिकारिक नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाए और उनके लिए एक विशेष कर्मचारी पहचान संख्या जारी की जाए। इस पहचान संख्या को सीधे पोर्टल से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि कर्मचारी अपने सेवाकाल से जुड़े हर रिकॉर्ड को जब चाहें स्वयं जांच सकें।
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क्या है रोम्स और व्यवस्था को पूर्ण बनाने का तरीका
रोम्स वास्तव में रिसोर्स आउटसोर्सिंग एजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम का संक्षिप्त रूप है। यह एक ऐसा एकीकृत डिजिटल मंच है जिसे शासकीय विभागों में आउटसोर्सिंग के जरिए ली जाने वाली सेवाओं के प्रबंधन के लिए विकसित किया गया है। इसमें कंपनियों के सत्यापन से लेकर कर्मचारियों के ई-केवाईसी सत्यापन, मासिक उपस्थिति दर्ज करने और भुगतान बिल तैयार करने जैसी तमाम सुविधाएं शामिल हैं। हालांकि, कर्मचारी यूनियनों का स्पष्ट कहना है कि केवल अफसरों और ठेकेदारों के स्तर पर डेटा ऑनलाइन कर देने से पारदर्शिता का लक्ष्य हासिल नहीं होगा। जब तक इसमें कर्मचारी लॉगिन, विशिष्ट पहचान संख्या और अस्थाई कर्मचारियों का समावेश नहीं किया जाएगा, तब तक यह डिजिटल पहल अधूरी ही मानी जाएगी।
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