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Onion Price Hike: जमाखोरी और निर्यात ने बढ़ाई प्याज की कीमतें, अक्टूबर से पहले राहत के आसार नहीं

Onion Price Hike: Hoarding and exports drive up onion prices; no relief expected before October.

Onion Price Hike: जमाखोरी और निर्यात ने बढ़ाई प्याज की कीमतें, अक्टूबर से पहले राहत के आसार नहीं
Onion Price Hike: जमाखोरी और निर्यात ने बढ़ाई प्याज की कीमतें, अक्टूबर से पहले राहत के आसार नहीं

Onion Price Hike: आमतौर पर तो सब्जी काटते समय ही आंखों में पानी आता है, परंतु इन दिनों बाजार में प्याज की ऊंची कीमतें ग्राहकों को खून के आंसू रुला रही हैं। भारत में प्याज की पैदावार पर्याप्त होने के बावजूद विदेशों में हो रहे निर्यात और बड़े व्यापारियों द्वारा माल दबाए जाने की वजह से बीते तीस दिनों में प्याज के भाव में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। थोक से लेकर फुटकर बाजार तक में इसके दाम दोगुनी रफ्तार से बढ़ चुके हैं। हाल ही में इसके भाव साठ रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को छू चुके हैं।

कारोबारी जगत की मानें तो आने वाले त्योहार यानी दीपावली तक इससे कोई राहत मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। अगर बड़े जमाखोरों ने मंडी में आवक और रोक दी, तो कीमतें नया रिकॉर्ड बना सकती हैं। इस बढ़ती महंगाई के कारण गरीब तबके की थाली से यह जरूरी चीज गायब होती दिख रही है। रही-सही कसर लहसुन ने पूरी कर दी है, जिसके भाव दो सौ रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। इन दोनों चीजों के आसमान छूते दामों के कारण आम लोग बिना लहसुन-प्याज वाला भोजन अपनाने को विवश हो रहे हैं।

अगस्त के मध्य से शुरू हुआ तेजी का दौर

गर्मी की फसल के समय फुटकर बाजार में यह महज पंद्रह से बीस रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध था। मॉनसून के आगमन के साथ ही इसमें लगभग दस रुपये की बढ़ोतरी हुई और भाव पच्चीस से तीस रुपये के आसपास पहुंच गए। अगस्त महीने के मध्य तक बाजार में स्थिति सामान्य बनी रही और भाव इसी दायरे में रहे। हालांकि, पंद्रह अगस्त के बाद परिदृश्य तेजी से बदला और कीमतें ऊपर चढ़ने लगीं। अगस्त के अंतिम दिनों तक भाव चालीस रुपये तक पहुंचे, जबकि सितंबर की शुरुआत होते-होते यह पचास से साठ रुपये प्रति किलो तक बिकने लगा। फिलहाल जिला मुख्यालय की मुख्य सब्जी मंडी में गुणवत्ता के अनुसार थोक भाव चालिस से पचास रुपये बने हुए हैं, जिसके चलते आम ग्राहकों को फुटकर में पचास से साठ रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।

निर्यात और सीमित आवक ने बिगाड़े हालात

हमारे देश के भीतर इस वर्ष प्याज का उत्पादन जरूरत से काफी अधिक दर्ज हुआ है। इसी वजह से भारत से दुबई, बांग्लादेश और खाड़ी के तमाम मुल्कों में बड़े पैमाने पर खेप भेजी जा रही है। बैतूल सब्जी मंडी के थोक कारोबारी पप्पू मालवीय के मुताबिक प्याज का विदेश भेजना लगातार जारी है। दूसरी ओर, भंडारण करने वाले बड़े व्यापारियों ने बाजार में सप्लाई घटाकर जानबूझकर कमी का माहौल पैदा कर दिया है ताकि वे मनमाना मुनाफा कमा सकें। आपूर्ति कम होने से रोजाना भाव में तेजी आ रही है। इसके अलावा देश के सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में भारी बारिश की वजह से खरीफ की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। इसी बहाने स्टॉकिस्ट मंडी में माल की कम आपूर्ति कर रहे हैं, जिससे कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है।

दीपावली तक राहत मिलने की गुंजाइश कम

सब्जी मंडी के थोक व्यापारी संगठन के अध्यक्ष राजकुमार राठौर ने जानकारी दी कि पूरे साल में मंडी में तीन बार नई फसल आती है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी करीब सत्तर प्रतिशत मार्च और अप्रैल के दौरान आती है। इसके बाद अक्टूबर-नवंबर में लगभग बीस फीसदी और जनवरी के समय करीब दस फीसदी आवक होती है। वर्तमान दौर में बाजार पूरी तरह से बड़े स्टॉकिस्टों के कब्जे में है, जिन्होंने आपसी सांठगांठ से आवक कम करके कृत्रिम संकट खड़ा कर दिया है। राठौर का कहना है कि अक्टूबर के महीने में नासिक, औरंगाबाद और अकोला सहित महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों से खरीफ सीजन की नई लाल प्याज आनी शुरू होगी। उसके बाद ही दरों में गिरावट की कोई उम्मीद की जा सकती है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए दीपावली पर्व तक दामों में नरमी आने की संभावना बेहद कम है।

सरकारी हस्तक्षेप न होने पर और बिगड़ेंगे हालात

प्याज की कीमतों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने मध्यम और गरीब वर्ग का बजट पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है। अगर शासन-प्रशासन द्वारा जमाखोरों के खिलाफ त्वरित और सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले कुछ ही दिनों में प्याज की खुदरा दरें अस्सी रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर सकती हैं।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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