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Onion Price Relief: कांदा एक्सप्रेस से रसोई को राहत, जानिए आपके शहर में कब और कैसे मिलेगा सस्ता प्याज

Relief on Onion Prices: 'Kanda Express' brings relief to kitchens; find out when and how you can get cheaper onions in your city.

Onion Price Relief: कांदा एक्सप्रेस से रसोई को राहत, जानिए आपके शहर में कब और कैसे मिलेगा सस्ता प्याज
Onion Price Relief: कांदा एक्सप्रेस से रसोई को राहत, जानिए आपके शहर में कब और कैसे मिलेगा सस्ता प्याज

Onion Price Relief: देशभर में आम उपभोक्ताओं को महंगाई की मार से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक विशेष रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। रसोई के सबसे जरूरी सामान यानी प्याज के दामों को काबू में रखने के लिए सरकारी गोदामों में जमा स्टॉक को धड़ाधड़ बाजारों में उतारा जा रहा है। ट्रेन की पटरियों से लेकर सड़कों तक, हर माध्यम का इस्तेमाल करके देश के विभिन्न राज्यों में प्याज भेजा जा रहा है। सरकार की इस पहल से जहां एक तरफ मंडियों में कीमतें गिरने लगी हैं, वहीं दूसरी तरफ आम लोगों को काफी कम दाम में प्याज मिलने लगा है।

बफर स्टॉक का दायरा बढ़ा

बाजार में प्याज की कोई कमी न होने पाए और इसकी बढ़ती दरों पर अंकुश लगाया जा सके, इसके लिए सरकार ने अपने सुरक्षित भंडार से प्याज की बिक्री का क्षेत्र व्यापक बना दिया है। अब इस योजना का लाभ 19 अलग-अलग शहरों तक पहुंचा दिया गया है। इस पूरे माल को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए ट्रेन और सड़कों दोनों का सहारा लिया जा रहा है। रेलमार्ग के जरिए तेजी से सप्लाई पहुंचाने के मकसद से विशेष रूप से कांदा एक्सप्रेस चलाई जा रही है।

एजेंसियों के जरिए वितरण

इस पूरी मुहिम की शुरुआत 24 अगस्त 2026 से हुई थी। सरकार अपने मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत जमा किए गए प्याज को दो प्रमुख सहकारिता संस्थाओं के माध्यम से बेच रही है। इनमें नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी नेफेड और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी एनसीसीएफ शामिल हैं। इन संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य यही है कि सीधे आम ग्राहकों तक सस्ती दरों पर प्याज की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

कांदा एक्सप्रेस की रफ्तार

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, नासिक से कांदा एक्सप्रेस की दो अलग-अलग ट्रेनें अब तक रवाना की जा चुकी हैं। पहली मालगाड़ी के माध्यम से 450 मीट्रिक टन प्याज भेजा गया था जो 27 अगस्त की देर रात राजधानी दिल्ली पहुंचा। इस खेप में से 140 मीट्रिक टन माल उत्तर प्रदेश के वाराणसी और लखनऊ के अलावा पंजाब के अमृतसर और चंडीगढ़ की तरफ भेजा गया। वहीं बचा हुआ प्याज दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में बांट दिया गया।

तमिलनाडु में राशन की दुकानों से सप्लाई

इसी श्रृंखला में दूसरी ट्रेन के जरिए 840 मीट्रिक टन प्याज रवाना किया गया था, जो 31 अगस्त को चेन्नई पहुंचा। तमिलनाडु सरकार इस प्याज का उपयोग अपनी सरकारी राशन दुकानों के माध्यम से करने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार की योजना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत प्रत्येक राशन कार्ड पर लोगों को एक-एक किलो प्याज दिया जाए।

सड़क मार्ग से भी हो रही माल की ढुलाई

रेलवे के साथ-साथ सड़क मार्ग का भी भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। जहां प्याज की खपत सबसे अधिक है, उन बड़े शहरों में लगभग 1000 मीट्रिक टन प्याज ट्रकों के जरिए भेजा जा रहा है। सड़कों से कितना माल जाएगा, यह फैसला बाजार के मौजूदा हालातों और वहां चल रहे दामों को देखकर तय हो रहा है। सरकार का मानना है कि रेल और सड़क परिवहन के इस मिले-जुले तरीके से उन सभी क्षेत्रों में तुरंत प्याज पहुंचाया जा सकता है, जहां मौसम या किसी अन्य वजह से कीमतें बढ़ने का खतरा रहता है।

19 शहरों में 35 रुपये का भाव

सुरक्षित भंडार से प्याज बेचने का दायरा बढ़ाकर 19 प्रमुख शहरों तक कर दिया गया है। इसके लिए 30 से भी ज्यादा गाड़ियों को सीधे सड़कों पर उतारा गया है। जिन शहरों को इसमें शामिल किया गया है उनमें दिल्ली, जयपुर, जम्मू, देहरादून, शिमला, अमृतसर, चंडीगढ़, कोलकाता, गुवाहाटी, लखनऊ, वाराणसी, पटना, बिहार का भोजपुर और बिहार शरीफ, भुवनेश्वर, चेन्नई, मदुरै, त्रिशूर तथा कोच्चि शामिल हैं। इन सभी जगहों पर प्याज की बिक्री 35 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से की जा रही है। ग्राहक एनसीसीएफ, नेफेड और केंद्रीय भंडार की दुकानों के अलावा घूमती हुई गाड़ियों से भी प्याज खरीद सकते हैं।

बाजार में बिक्री के आंकड़े और असर

अब तक सरकारी तंत्र के माध्यम से कुल मिलाकर 669 मीट्रिक टन प्याज की बिक्री पूरी हो चुकी है। इसमें से 223 मीट्रिक टन माल ई-नाम पोर्टल और अन्य डिजिटल माध्यमों से थोक बाजारों में उस समय चल रहे मंडी रेट पर बेचा गया। वहीं 446 मीट्रिक टन प्याज सीधे आम उपभोक्ताओं को बेचा गया है। बफर स्टॉक से लगातार सप्लाई मिलने के कारण बाजारों में प्याज आसानी से उपलब्ध हो रहा है। वाराणसी, अमृतसर और दिल्ली जैसे क्षेत्रों में इसका बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा है और दाम नीचे आए हैं। बिक्री शुरू होने के अगले ही दिन से रेट कम होने लगे थे।

किसानों को मिला सीधा आर्थिक लाभ

इस पूरी व्यवस्था का एक बड़ा फायदा देश के अन्नदाताओं को भी हुआ है। सरकारी डेटा के अनुसार, इस बफर स्टॉक की व्यवस्था के दौरान करीब 3400 किसानों को सीधे 210 करोड़ रुपये की राशि दी गई है। यह पूरा पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजा गया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है और किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य समय पर प्राप्त हुआ है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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