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MP Cabinet Decision: मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: भोपाल-विदिशा फोरलेन को मंजूरी, स्वास्थ्य और किसानों के लिए भी बड़ी सौगात

MP Cabinet Decision: Major decisions by the Madhya Pradesh Cabinet—approval for the Bhopal-Vidisha four-lane highway, plus significant boons for the health sector and farmers.

MP Cabinet Decision: मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: भोपाल-विदिशा फोरलेन को मंजूरी, स्वास्थ्य और किसानों के लिए भी बड़ी सौगात
MP Cabinet Decision: मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: भोपाल-विदिशा फोरलेन को मंजूरी, स्वास्थ्य और किसानों के लिए भी बड़ी सौगात

MP Cabinet Decision: भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के विकास से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में सड़क, स्वास्थ्य, कृषि, वन, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा सहित अलग-अलग क्षेत्रों के लिए बड़ी राशि मंजूर की गई। सरकार ने भोपाल को मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भोपाल-विदिशा मार्ग को चार लेन करने की परियोजना को मंजूरी दी है। इसके लिए 1,757.55 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

सरकार का मानना है कि इस सड़क के चौड़ीकरण से भोपाल और आसपास के जिलों के बीच आवागमन बेहतर होगा। साथ ही औद्योगिक गतिविधियों और निवेश के लिए भी अनुकूल माहौल तैयार होगा। सांची स्तूप और कर्क रेखा जैसे महत्वपूर्ण स्थान इसी मार्ग से जुड़े हैं। इसके अलावा भोपाल बायपास को भविष्य में छह लेन करने की तैयारी को देखते हुए टोल वसूली की अवधि भी बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

भोपाल-विदिशा सड़क को मिलेगा नया स्वरूप

मंत्रि-परिषद ने भोपाल-विदिशा मार्ग के 44.830 किलोमीटर हिस्से को पेव्ड शोल्डर के साथ चार लेन करने के लिए 1,757 करोड़ 55 लाख रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी है। यह परियोजना हाईब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत लागू की जाएगी।

परियोजना की निर्माण लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा राज्य राजमार्ग निधि से दिया जाएगा। इसमें जीएसटी की राशि भी शामिल होगी। बची हुई 60 प्रतिशत राशि का भुगतान निर्माण पूरा होने के बाद 15 साल की अवधि में छह-छह महीने के अंतराल पर एन्युटी के रूप में किया जाएगा।

भूमि अधिग्रहण सहित निर्माण से पहले किए जाने वाले कार्यों और निगरानी खर्च के लिए 364 करोड़ 41 लाख रुपये राज्य बजट से दिए जाएंगे।

भोपाल-विदिशा राज्य मार्ग-28 अयोध्या बायपास के भानपुर टी-जंक्शन से शुरू होकर एनएच-146 के सांची-सलामतपुर जंक्शन तक जाता है। यह मार्ग भानपुर, चोपड़ाकला, सूखी सेवनिया, डोब, बालमपुर, दीवानगंज और सलामतपुर को जोड़ता है। इसके माध्यम से भोपाल और विदिशा जिलों के बीच सीधा सड़क संपर्क बना हुआ है।

इस मार्ग की खासियत यह भी है कि रायसेन जिले में स्थित सांची स्तूप इसी क्षेत्र से जुड़ा है। सांची का बौद्ध स्तूप विश्व धरोहर स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। इसके अलावा मार्ग के करीब 24.550 किलोमीटर बिंदु से कर्क रेखा भी गुजरती है, इसलिए पर्यटन और भौगोलिक दृष्टि से भी यह सड़क महत्वपूर्ण मानी जाती है।

भोपाल बायपास पर 2031 तक टोल वसूली की अनुमति

राज्य सरकार ने भोपाल बायपास को चार लेन से छह लेन में विकसित करने की योजना को ध्यान में रखते हुए टोल वसूली जारी रखने का फैसला किया है। 51.963 किलोमीटर लंबे भोपाल बायपास पर 19 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2031 तक उपयोगकर्ता शुल्क लिया जा सकेगा।

जरूरत पड़ने पर इस अवधि को पांच साल और बढ़ाने का अधिकार लोक निर्माण विभाग को दिया गया है। टोल वसूली पहले से तय नियमों के अनुसार ही की जाएगी। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम या उसके द्वारा चुनी गई एजेंसी शुल्क संग्रह का काम करेगी।

भोपाल बायपास शहर को इंदौर, रायसेन, विदिशा और नर्मदापुरम जिलों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। इसके चलते शहर के अंदर भारी यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलती है। बायपास का संचालन और रखरखाव मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा किया जाता है।

टोल से मिलने वाली राशि राज्य राजमार्ग निधि में जमा होगी। इस राशि का उपयोग प्रदेश में सड़कों के निर्माण, सुधार और रखरखाव से जुड़े कामों में किया जाएगा।

वन समितियों के लिए 918 करोड़ रुपये मंजूर

मंत्रि-परिषद ने संयुक्त वन प्रबंधन समितियों से जुड़ी लाभांश योजना को आगे जारी रखने का फैसला किया है। वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक योजना के संचालन के लिए 918 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

इस योजना के माध्यम से जंगलों के संरक्षण और विकास में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश में संयुक्त वन प्रबंधन समितियां वन विभाग के साथ मिलकर जंगलों की सुरक्षा और संवर्धन का काम करती हैं।

नियमों के अनुसार लकड़ी की अंतिम कटाई से होने वाली बिक्री आय का 20 प्रतिशत हिस्सा संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को दिया जाता है। वहीं बांस से होने वाली शुद्ध आय का पूरा लाभ कटाई में काम करने वाले श्रमिकों को दिया जाता है।

अब इस व्यवस्था में समिति से जुड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी लाभांश का हिस्सा देने का प्रावधान किया गया है। इससे स्थानीय रहवासियों को वन संसाधनों के संरक्षण से सीधे आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

महिला पुरस्कारों की राशि दोगुनी

बैठक में महिला सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले भी किए गए। राज्य सरकार ने रानी दुर्गावती राज्य स्तरीय पुरस्कार की राशि बढ़ाकर दो लाख रुपये करने को मंजूरी दी है। इसी तरह रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार की राशि भी एक लाख से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी गई है।

इन पुरस्कारों का उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में समाज सेवा करने वाली महिलाओं को सम्मान और प्रोत्साहन देना है। इनमें गरीब, दिव्यांग, एकल महिला, गंभीर बीमारी से जूझ रही महिलाओं के अलावा एसिड अटैक, दहेज या घरेलू हिंसा जैसी परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद समाज के लिए काम करने वाली महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं।

सरकार का मानना है कि ऐसे सम्मान से महिलाओं को सामाजिक कार्यों के लिए आगे आने की प्रेरणा मिलेगी। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा वर्तमान में छह अलग-अलग राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।

किसान वर्ष में सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के लिए जमीन

किसान वर्ष के अवसर पर मंत्रि-परिषद ने सोयाबीन किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया। सीहोर जिले की इछावर तहसील के भाऊखेड़ी गांव में नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापित करने के लिए 20 हेक्टेयर जमीन स्थायी पट्टे पर देने की मंजूरी दी गई है।

यह संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत संचालित होगा। केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन काम करने वाला यह संस्थान सोयाबीन की खेती, अनुसंधान और विकास से जुड़ी गतिविधियों पर काम करता है।

देश में लगभग 50 लाख सोयाबीन किसानों पर इस संस्थान के शोध और तकनीकी कार्यों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। प्रस्तावित जमीन का इस्तेमाल कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए किया जाएगा। इससे मध्यप्रदेश में सोयाबीन उत्पादन और खेती की तकनीक को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 44,515 करोड़ रुपये की मंजूरी

मंत्रि-परिषद ने स्वास्थ्य क्षेत्र की कई योजनाओं को अगले पांच साल तक जारी रखने के लिए कुल 44,515.13 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यह राशि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक अलग-अलग स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन पर खर्च की जाएगी।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 28,083.47 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके तहत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार कल्याण, टीबी नियंत्रण, पोषण, सिकल सेल, किशोर स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोग, अंधत्व और कुष्ठ उन्मूलन जैसे कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और नॉन-एसईसीसी हितग्राहियों से जुड़ी व्यवस्था के लिए 12,123 करोड़ 81 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके माध्यम से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक सहायता दी जाती है।

स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा और सफाई व्यवस्था के लिए 1,159 करोड़ 58 लाख रुपये तथा जिला स्तरीय अमले की योजना के लिए 654 करोड़ 84 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

कृषि विश्वविद्यालय के लिए 795 करोड़ रुपये

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के संचालन को जारी रखने के लिए भी बड़ी राशि मंजूर की गई है। वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल के लिए 795 करोड़ 59 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।

यह राशि विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, मानदेय, पेंशन और दूसरे जरूरी खर्चों में उपयोग की जाएगी। विश्वविद्यालय के अंतर्गत वर्तमान में 11 कृषि महाविद्यालय और आठ अनुसंधान केंद्र संचालित हैं। इन संस्थानों में कृषि शिक्षा, शोध और किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने से जुड़े कार्य किए जाते हैं।

विश्वविद्यालय के करीब 500 पुराने पेंशनरों से जुड़े वित्तीय दायित्वों के साथ प्रशासनिक और आकस्मिक खर्च भी राज्य सरकार द्वारा ब्लॉक ग्रांट के माध्यम से पूरा किया जाता है।

खनिज विभाग की इमारतों के रखरखाव के लिए राशि

खनिज साधन विभाग की परिसंपत्तियों की मरम्मत और देखरेख के लिए भी मंत्रि-परिषद ने मंजूरी दी है। वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक योजना जारी रखने के लिए 2 करोड़ 50 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

प्रदेश में खनिज विभाग के कुल 54 खनिज भवन हैं। इनमें कई इमारतें दस वर्ष से ज्यादा पुरानी हो चुकी हैं। इसलिए इन भवनों में आवश्यक मरम्मत और रखरखाव के काम नियमित रूप से कराने के लिए यह राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

देवास पटाखा फैक्ट्री हादसे की जांच तीन महीने और चलेगी

देवास जिले के टोंकखुर्द क्षेत्र के टोकंकला में 14 मई 2026 को पटाखा फैक्ट्री में हुई आग की घटना की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग की अवधि बढ़ा दी गई है।

सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय जबलपुर के न्यायमूर्ति सुभाष काकड़े की अध्यक्षता में गठित एक सदस्यीय आयोग को जांच पूरी करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है। अब आयोग का कार्यकाल 14 अगस्त 2026 तक रहेगा। मंत्रि-परिषद ने इस संबंध में जारी अधिसूचना का भी अनुमोदन किया।

एमपीपीएससी की वार्षिक रिपोर्ट विधानसभा में रखी जाएगी

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग से जुड़े एक अन्य प्रस्ताव को भी बैठक में मंजूरी दी गई। मंत्रि-परिषद ने एमपीपीएससी के 63वें, 64वें और 68वें वार्षिक प्रतिवेदन को विधानसभा के पटल पर रखने की अनुमति दी है।

जिन मामलों में आयोग की सिफारिश या सलाह स्वीकार नहीं की गई है, उनका विवरण भी संबंधित ज्ञापन के साथ विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।

बैठक में लिए गए इन फैसलों से सड़क अधोसंरचना, स्वास्थ्य सुविधाओं, कृषि अनुसंधान, वन संरक्षण, महिला सम्मान और उच्च शिक्षा जैसे क्षेत्रों में आने वाले वर्षों के लिए सरकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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