Gobardhan Scheme 2026: गोबरधन योजना को मंजूरी: गोबर और पराली से होगी कमाई, किसानों की आय बढ़ाने की बड़ी तैयारी
Gobardhan Scheme 2026: Gobardhan Scheme Approved – Earnings from Cow Dung and Stubble; Major Push to Boost Farmers' Income.

Gobardhan Scheme 2026: नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और जैविक कचरे का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब गोबर, पराली और अन्य कृषि अवशेष केवल बेकार कचरा नहीं रहेंगे, बल्कि किसानों की अतिरिक्त आय, ग्रामीण रोजगार और स्वच्छ ऊर्जा का मजबूत आधार बनेंगे। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सर्कुलर बायोएनर्जी योजना (गोबरधन) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कचरे से कंचन’ के विजन को जमीन पर उतारने की तैयारी की गई है। गांवों में उपलब्ध जैविक कचरे से कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) और उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद तैयार की जाएगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल से मिली मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में करीब 23,731 करोड़ रुपये की लागत वाली राष्ट्रीय एकीकृत गोबरधन योजना को स्वीकृति दी गई। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी। सरकार का लक्ष्य देश में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन वर्तमान स्तर से लगभग दस गुना बढ़ाना है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा।
पराली और गोबर बनेंगे कमाई का साधन
आज भी देश के कई हिस्सों में फसल कटाई के बाद बची पराली को खेतों में जला दिया जाता है या फिर उसे बहुत कम कीमत पर बेचना पड़ता है। इसी तरह गोबर का भी पूरा उपयोग नहीं हो पाता। यदि गांवों के आसपास सीबीजी प्लांट स्थापित होते हैं तो किसान इन कृषि अवशेषों और गोबर को बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। इससे खेती से मिलने वाली आमदनी के साथ एक नया आर्थिक स्रोत भी तैयार होगा।
गांवों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
सीबीजी प्लांट केवल गैस उत्पादन तक सीमित नहीं होंगे। इनके संचालन के लिए गोबर और कृषि अवशेषों का संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण, प्लांट संचालन और जैविक खाद के विपणन तक पूरी व्यवस्था विकसित होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। डेयरी संचालक, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), सहकारी समितियां और स्थानीय उद्यमी इस योजना से सीधे जुड़ सकेंगे।
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योजना के प्रमुख प्रावधान
सरकार ने इस योजना को सफल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। शहर गैस वितरण (CGD) नेटवर्क में वर्ष 2026-27 में 3 प्रतिशत, 2027-28 में 4 प्रतिशत और 2028-29 से 5 प्रतिशत सीबीजी ब्लेंडिंग अनिवार्य होगी। उत्पादकों को कम से कम 10 वर्षों तक 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू की स्थिर कीमत मिलेगी। प्रति टन प्रतिदिन क्षमता के अनुसार दो करोड़ रुपये तक की पूंजी सहायता भी दी जाएगी। इसके अलावा पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार, एमएसएमई परियोजनाओं के लिए क्रेडिट गारंटी तथा जिला स्तर पर सीबीजी इकोसिस्टम चैलेंज फंड जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जाएंगी।
ग्रामीण उद्यमियों के लिए नया अवसर
यह योजना केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने की इच्छा रखने वाले उद्यमियों के लिए भी बड़ा अवसर लेकर आई है। सरकार पूंजी सहायता, आसान ऋण और गैस खरीद की सुनिश्चित व्यवस्था उपलब्ध करा रही है। इससे नए सीबीजी प्लांट लगाने का जोखिम पहले की तुलना में कम हो सकता है। हालांकि किसी क्षेत्र में परियोजना की सफलता वहां उपलब्ध गोबर, कृषि अवशेष और गैस वितरण व्यवस्था पर भी निर्भर करेगी।
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जैविक खाद का मिलेगा लाभ
सीबीजी उत्पादन के बाद बचने वाले अवशेष का उपयोग उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में किया जाएगा। इससे किसानों को बेहतर जैविक उर्वरक मिलेगा और रासायनिक खाद पर निर्भरता धीरे-धीरे कम करने में मदद मिल सकती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
जमीन पर क्रियान्वयन होगी सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि योजना की सफलता केवल घोषणा पर नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। देश में पहले भी कई बायोगैस परियोजनाएं कच्चे माल की कमी, अधिक लागत और विपणन संबंधी समस्याओं के कारण अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकीं। यदि राज्यों में समय पर सीबीजी प्लांट स्थापित किए जाते हैं, किसानों को उचित मूल्य मिलता है और निजी निवेश बढ़ता है, तो यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।
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