Betul Dowry Harassment Case: दहेज की प्रताड़ना ने ली एक और जान: सुसाइड नोट और व्हाट्सएप चैट बने सबूत, पति समेत चार आरोपी गिरफ्तार
Betul Dowry Harassment Case: Dowry harassment claims another life; suicide note and WhatsApp chats serve as evidence; four accused, including the husband, arrested.

Betul Dowry Harassment Case: बैतूल जिले के चोपना थाना क्षेत्र में दहेज प्रताड़ना से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। महिला की आत्महत्या के बाद पुलिस ने सुसाइड नोट और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर तेज कार्रवाई करते हुए पति, सास, ससुर और नंदोई को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि जांच में दहेज की मांग, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना तथा धमकियों से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं।
जिले में महिला संबंधी अपराधों के खिलाफ पुलिस लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में थाना चोपना पुलिस ने दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले (Betul Dowry Harassment Case) में चार नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र जैन के निर्देशन में की गई। पूरे मामले की निगरानी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कमलेश खरपूसे तथा एसडीओपी सारणी सुश्री प्रियंका करचाम द्वारा की गई।
घटना के बाद शुरू हुई वैज्ञानिक जांच
पुलिस के अनुसार 15 जुलाई 2026 की सुबह थाना चोपना क्षेत्र के ग्राम झोली-01 स्थित पंचायत भवन परिसर में एक आंवले के पेड़ पर अर्चना पति त्रिनाथ सरकार (40 वर्ष) का शव फंदे से लटका हुआ मिला था। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम (Betul Dowry Harassment Case) कर पूरे मामले की वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष जांच शुरू की गई।

दहेज की मांग को लेकर किया जा रहा था प्रताड़ित
जांच में सामने आया कि मृतका की पुत्री दीक्षा का विवाह 5 दिसंबर 2025 को वासुदेव बछाड़ के साथ हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद से ही पति वासुदेव बछाड़, ससुर सचिन बछाड़, सास कविता बछाड़ तथा नंदोई विपुल बैरागी द्वारा दहेज में कार और तीन लाख रुपये नकद की मांग की जा रही थी। आरोप है कि मांग पूरी नहीं होने पर विवाहिता को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
गर्भवती होने के बाद भी नहीं रुकी प्रताड़ना
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि दीक्षा उस समय चार माह की गर्भवती थी, लेकिन इसके बावजूद उसके साथ मारपीट की गई। इतना ही नहीं, उसे और उसके मायके पक्ष के लोगों को जान से मारने की धमकियां भी दी जाती थीं। इन परिस्थितियों ने पूरे परिवार को मानसिक रूप से परेशान कर रखा था।
सुसाइड नोट ने खोले कई राज
घटना स्थल से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला, जिसे जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया। इस नोट में मृतका ने कथित रूप से दहेज की मांग, प्रताड़ना और लगातार मिल रही धमकियों का उल्लेख किया है। पुलिस ने इस दस्तावेज को जांच का अहम आधार बनाया।
व्हाट्सएप चैट भी बनी अहम डिजिटल साक्ष्य
जांच के दौरान पुलिस के हाथ डिजिटल साक्ष्य भी लगे हैं। इनमें आरोपी पति वासुदेव द्वारा व्हाट्सएप पर दीक्षा को भेजे गए संदेश शामिल हैं। पुलिस के अनुसार इन संदेशों में पत्नी पर अपनी मां के मुंह पर थूकने और थप्पड़ मारने का वीडियो भेजने जैसी अपमानजनक और अमानवीय शर्तें रखी गई थीं। इन चैट्स को भी मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
मर्ग जांच पूरी होने के बाद थाना चोपना में अपराध क्रमांक 0097/2026 दर्ज किया गया। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना), धारा 85 (क्रूरता), धारा 3(5) तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया।
चारों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र जैन के निर्देशन में थाना प्रभारी उपनिरीक्षक रवि शाक्य और उनकी टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 22 जुलाई 2026 को सभी चार नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में ग्राम पहाड़पुर निवासी 28 वर्षीय वासुदेव बछाड़, 58 वर्षीय सचिन बछाड़, 45 वर्षीय कविता बछाड़ तथा ग्राम झोली-01 निवासी 34 वर्षीय विपुल बैरागी शामिल हैं।
दहेज प्रथा के खिलाफ पुलिस की अपील
पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र जैन ने कहा कि दहेज लेना और देना दोनों ही कानूनन अपराध होने के साथ-साथ समाज के लिए अभिशाप हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी भी परिवार में बहू या बेटी को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा हो या ऐसी कोई गंभीर स्थिति बन रही हो, तो बिना डर के इसकी जानकारी तत्काल नजदीकी थाना या पुलिस प्रशासन को दें। समय पर मिली सूचना किसी की जान बचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है।
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इन पुलिसकर्मियों ने निभाई अहम भूमिका
मामले की जांच, साक्ष्य जुटाने और आरोपियों की गिरफ्तारी में थाना प्रभारी एवं अनुसंधानकर्ता उपनिरीक्षक रवि शाक्य, सहायक उपनिरीक्षक निकलेश ठाकुर, प्रधान आरक्षक सुखराम, आरक्षक नितेश, प्रवेश, विवेक, सुरेन्द्र, कमलेश, राहुल, मंदीप तथा थाना रानीपुर की महिला आरक्षक प्रमीला का विशेष योगदान रहा। पुलिस विभाग ने उनकी त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की सराहना की।
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