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Kukru Eco Tourism: मानसून में स्वर्ग बना बैतूल का कुकरू, कॉफी बागानों और हरियाली से जीत रहा पर्यटकों का दिल

Kukru Eco-Tourism: Betul's Kukru turns into a paradise during the monsoon, winning tourists' hearts with its coffee plantations and lush greenery.

Kukru Eco Tourism: मानसून में स्वर्ग बना बैतूल का कुकरू, कॉफी बागानों और हरियाली से जीत रहा पर्यटकों का दिल
Kukru Eco Tourism: मानसून में स्वर्ग बना बैतूल का कुकरू, कॉफी बागानों और हरियाली से जीत रहा पर्यटकों का दिल

Kukru Eco Tourism: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील में स्थित कुकरू अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, बादलों से घिरी पहाड़ियों और ऐतिहासिक कॉफी बागानों के कारण तेजी से पर्यटन मानचित्र पर उभर रहा है। राज्य सरकार ने इसे बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला पर्यटन सर्किट और ईको टूरिज्म परियोजनाएं न केवल पर्यटकों को आकर्षित करेंगी, बल्कि स्थानीय जनजातीय समुदायों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी लेकर आएंगी।

कुकरू बन रहा प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद

बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील में स्थित कुकरू (Kukru Eco Tourism) प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण और हरियाली से भरपूर एक रमणीय पर्यटन स्थल है। समुद्र तल से लगभग 3,668 फीट की ऊंचाई पर बसे इस पर्वतीय क्षेत्र की खूबसूरती मानसून के दौरान और अधिक निखर जाती है। इस मौसम में यहां बादलों की चादर, घना कोहरा, हरे-भरे जंगल और पहाड़ पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

अदना नदी का शांत प्रवाह, मिश्रित वन और तेलिया सागौन के विशाल वृक्ष इस क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान हैं। वर्षभर यहां का मौसम सुहावना रहता है, जिससे यह स्थान प्रकृति प्रेमियों के साथ-साथ ट्रैकिंग और बाइकिंग के शौकीनों के लिए भी पसंदीदा बनता जा रहा है। यहां मौजूद सनराइज प्वाइंट और सनसेट प्वाइंट पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं।

Kukru Eco Tourism: मानसून में स्वर्ग बना बैतूल का कुकरू, कॉफी बागानों और हरियाली से जीत रहा पर्यटकों का दिल
Kukru Eco Tourism: मानसून में स्वर्ग बना बैतूल का कुकरू, कॉफी बागानों और हरियाली से जीत रहा पर्यटकों का दिल

कॉफी की खेती ने दिलाई अलग पहचान

कुकरू-खामला क्षेत्र (Kukru Eco Tourism) अपनी ऐतिहासिक कॉफी खेती के लिए भी जाना जाता है। यहां वर्ष 1944 में पहली बार कॉफी की खेती शुरू की गई थी, जिसके बाद इस क्षेत्र को विशेष पहचान मिली। देश के चुनिंदा इलाकों में ही उच्च गुणवत्ता वाली कॉफी का उत्पादन होता है और कुकरू भी उनमें शामिल है।

यहां लगभग 110 एकड़ क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली अरेबिका कॉफी का उद्यान विकसित किया गया है, जिसमें करीब 10 एकड़ भूमि पर नियमित रूप से कॉफी की खेती की जाती है। इन बागानों के संरक्षण और विकास का कार्य मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड तथा वन विभाग द्वारा किया जा रहा है।

वन उत्पाद और स्थानीय संस्कृति भी हैं खास

कुकरू केवल प्राकृतिक सुंदरता और कॉफी के लिए ही नहीं, बल्कि यहां मिलने वाले वन उत्पादों के कारण भी प्रसिद्ध है। कोदो-कुटकी, आंवला, शहद, हर्रा, बहेड़ा, सफेद मूसली और भिलवा यहां की प्रमुख वन उपज हैं।

इसके अलावा स्थानीय मोटे अनाज से तैयार पारंपरिक व्यंजन और वन उपज व लकड़ी से बनाए जाने वाले हस्तशिल्प यहां की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान को मजबूत बनाते हैं। यहां आने वाले पर्यटक स्थानीय जनजातीय जीवनशैली और संस्कृति को भी करीब से देख सकते हैं।

Kukru Eco Tourism: मानसून में स्वर्ग बना बैतूल का कुकरू, कॉफी बागानों और हरियाली से जीत रहा पर्यटकों का दिल
Kukru Eco Tourism: मानसून में स्वर्ग बना बैतूल का कुकरू, कॉफी बागानों और हरियाली से जीत रहा पर्यटकों का दिल

पर्यटन विकास के लिए सरकार की बड़ी योजना

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में कुकरू के दौरे के दौरान इसे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विकसित करने की घोषणा की है। इसके तहत लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से कुकरू, चिखलदरा, मुक्तागिरी और मेलघाट को जोड़ते हुए एकीकृत पर्यटन सर्किट तैयार किया जाएगा।

इस परियोजना में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ सनराइज और सनसेट प्वाइंट का उन्नयन, आधुनिक सुविधाओं वाले ईको रिसॉर्ट का निर्माण, पर्यटन अधोसंरचना का विस्तार तथा ट्रैकिंग, नेचर ट्रेल्स और अन्य साहसिक गतिविधियों का विकास शामिल किया गया है।

स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार का अवसर

सरकार ने पर्यटन विकास के साथ स्थानीय जनजातीय समुदायों को भी जोड़ने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री ने होमस्टे योजना शुरू करने की घोषणा की है, जिससे स्थानीय परिवार अपने घरों में पर्यटकों के ठहरने की सुविधा उपलब्ध करा सकेंगे।

इन होमस्टे का संचालन मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम की कार्यप्रणाली के अनुरूप किया जाएगा। पर्यटक मध्यप्रदेश टूरिज्म के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग भी कर सकेंगे। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार होंगे, वहीं पर्यटकों को जनजातीय संस्कृति और स्थानीय जीवनशैली को नजदीक से जानने का अवसर मिलेगा।

कुकरू पहुंचना है आसान

भोपाल से कुकरू की दूरी लगभग 270 किलोमीटर जबकि बैतूल से करीब 90 किलोमीटर है। रेल मार्ग से भोपाल और बैतूल के बीच भोपाल–नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस सहित कई नियमित ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हैं। बैतूल पहुंचने के बाद टैक्सी और अन्य स्थानीय वाहनों से आसानी से कुकरू जाया जा सकता है।

सड़क मार्ग से भोपाल से बैतूल और फिर शाहपुर होते हुए कुकरू पहुंचा जा सकता है। अंतिम पर्वतीय मार्ग प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर होने के कारण यात्रा को भी यादगार बना देता है।

ईको टूरिज्म का उभरता केंद्र

कुकरू प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक कॉफी बागानों, जनजातीय संस्कृति और ईको टूरिज्म का अनूठा संगम है। यहां ईको टूरिज्म सेंटर के तहत पर्यटकों के ठहरने के लिए रेस्ट हाउस की सुविधा उपलब्ध है। मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड (MPEDB) द्वारा प्रशिक्षित स्टाफ पर्यटकों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराता है। खासकर मानसून के दौरान कुकरू का मनमोहक वातावरण इसे मध्यप्रदेश के प्रमुख प्रकृति पर्यटन स्थलों में विशेष पहचान दिला रहा है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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