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Compassionate Job: गोद लिए बेटे को अनुकंपा नौकरी मिलेगी या नहीं? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Compassionate Job: Will an adopted son receive a compassionate job? The Madhya Pradesh High Court has issued a significant ruling.

Compassionate Job: गोद लिए बेटे को अनुकंपा नौकरी मिलेगी या नहीं? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
Compassionate Job: गोद लिए बेटे को अनुकंपा नौकरी मिलेगी या नहीं? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Compassionate Job: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि गोद लिए गए बच्चे के अधिकार केवल कागजी औपचारिकताओं पर निर्भर नहीं होते। अदालत ने तकनीकी आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से इनकार करने के आदेश को रद्द करते हुए प्रशासन को कानून के अनुरूप निर्णय लेने की नसीहत दी है।

क्या है पूरा मामला

यह मामला मोहित गौड़ की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने अदालत को बताया कि उनके पिता मलेरिया विभाग में सुपीरियर फील्ड वर्कर के पद पर कार्यरत थे और कोविड-19 महामारी के दौरान उनका निधन हो गया था। मोहित गौड़ को उनके पिता ने वर्ष 2010 में गोद लिया था और वह पूरी तरह से उन्हीं पर आश्रित थे।

पिता के निधन के बाद मोहित ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन अधिकारियों ने इसे खारिज कर दिया। इस फैसले को चुनौती देते हुए उन्होंने 10 दिसंबर 2021 के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

राज्य सरकार ने दी यह दलील

राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि गोद लेने का कोई पंजीकृत दस्तावेज पिता के जीवनकाल में उपलब्ध नहीं था। इसी आधार पर यह कहा गया कि गोद लेने की वैधता संदिग्ध है और इसलिए अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता।

हाईकोर्ट ने सुनाया यह निर्णय

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने सरकार के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू एडॉप्शन और मेंटेनेंस एक्ट, 1956 के तहत गोद लेने के लिए रजिस्टर्ड एडॉप्शन डीड अनिवार्य नहीं है। कानून में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि गोद लेने के दस्तावेज का पंजीकरण जरूरी हो।

अदालत ने यह भी पाया कि गोद लेने की प्रक्रिया संबंधित व्यक्ति के जीवनकाल में ही पूरी हो चुकी थी और वर्ष 2020 में इसे नोटरीकृत दस्तावेज के रूप में दर्ज किया गया था। बाद में 2021 में उसका पंजीकरण केवल औपचारिक प्रक्रिया थी, जिससे गोद लेने की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता।

नीति में नहीं पंजीकरण की बाध्यता

अदालत ने राज्य की अनुकंपा नियुक्ति नीति का भी हवाला दिया। इसमें गोद लिए गए बच्चे को आश्रित माना गया है, बशर्ते गोद लेने की प्रक्रिया कर्मचारी के जीवनकाल में पूरी हो। कोर्ट ने कहा कि इस नीति में कहीं भी रजिस्टर्ड डीड की अनिवार्यता नहीं बताई गई है, इसलिए अधिकारी अतिरिक्त दस्तावेज की मांग नहीं कर सकते।

अंतिम आदेश किया गया पारित

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून की धारा 12 के तहत गोद लिए गए बच्चे को वही अधिकार मिलते हैं, जो सगे बच्चे को मिलते हैं। इसमें नौकरी से जुड़े लाभ भी शामिल हैं। अदालत ने पूर्व में जारी आदेश को रद्द करते हुए संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर 60 दिनों के भीतर दोबारा विचार किया जाए।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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