BHAVYA Industrial Scheme India: फैक्ट्री लगाना हुआ आसान, सरकार देगी तैयार जमीन और सुविधाएं, 33660 करोड़ की भव्य योजना को मंजूरी
BHAVYA Industrial Scheme India: Setting up a factory has become easier, the government will provide ready land and facilities, a grand plan worth Rs 33660 crore has been approved.

BHAVYA Industrial Scheme India: अब उद्योग शुरू करने के लिए लंबी कागजी प्रक्रिया, जमीन की तलाश और मंजूरी के इंतजार जैसी परेशानियां कम होने वाली हैं। केंद्र सरकार ने एक ऐसी योजना को मंजूरी दी है, जिसमें कारोबारी सीधे अपनी मशीनें लगाकर उत्पादन शुरू कर सकेंगे। यह पहल देश में निवेश बढ़ाने और उद्योगों को तेज गति देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
क्या है भव्य योजना का उद्देश्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत औद्योगिक विकास योजना, जिसे भव्य नाम दिया गया है, को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य देश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और निवेशकों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराना है। इसके तहत देशभर में 100 नए औद्योगिक पार्क तैयार किए जाएंगे। इन पार्कों का आकार 100 एकड़ से लेकर 1000 एकड़ तक होगा। सरकार इस पूरी योजना पर 33,660 करोड़ रुपये खर्च करेगी। यह पहल खासतौर पर उन निवेशकों और स्टार्टअप्स के लिए राहत लेकर आएगी, जिन्हें अब तक बुनियादी ढांचे की कमी और देरी का सामना करना पड़ता था।
एनआईसीडीपी के विजन को विस्तार
यह योजना नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत तैयार की गई है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य देश में औद्योगिक स्मार्ट शहरों का विकास करना है। भव्य योजना के जरिए अब इन स्मार्ट औद्योगिक शहरों का दायरा और बढ़ाया जाएगा। इसका मकसद भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को वैश्विक स्तर पर मजबूत करना और विदेशी निवेश को आकर्षित करना है।
प्लग एंड प्ले मॉडल से मिलेगा फायदा
इस योजना का सबसे अहम हिस्सा प्लग एंड प्ले मॉडल है। इसका मतलब है कि उद्योग लगाने के लिए जरूरी सभी व्यवस्थाएं पहले से तैयार रहेंगी। निवेशकों को जमीन खरीदने या विभिन्न विभागों से मंजूरी लेने में समय नहीं गंवाना पड़ेगा। उन्हें तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा, जहां वे सीधे मशीनें लगाकर उत्पादन शुरू कर सकते हैं। इससे कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान होगी और समय की बचत भी होगी।
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इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं का पूरा पैकेज
इन औद्योगिक पार्कों में बुनियादी ढांचे से लेकर सामाजिक सुविधाओं तक का पूरा इंतजाम रहेगा। यहां सड़कें, पानी की व्यवस्था, जल निकासी और आईटी नेटवर्क जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अलावा तैयार फैक्ट्री शेड, टेस्टिंग लैब और वेयरहाउस जैसी वैल्यू ऐडेड सुविधाएं भी मिलेंगी। श्रमिकों के लिए आवास और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं भी विकसित की जाएंगी। सरकार प्रति एकड़ एक करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता देगी। साथ ही कुल लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा सड़क और रेल कनेक्टिविटी जैसे बाहरी ढांचे को मजबूत करने पर खर्च किया जाएगा।
चैलेंज मोड में होगा चयन
इन औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए राज्यों और निजी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा कराई जाएगी। इसे चैलेंज मोड कहा गया है। इसमें वही प्रस्ताव चुने जाएंगे जो पूरी तरह तैयार होंगे और जिनमें निवेश के लिए अनुकूल माहौल होगा। इससे बेहतर और तेज प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता मिलेगी।
गतिशक्ति योजना और हरित विकास पर जोर
इन पार्कों को पीएम गतिशक्ति योजना के सिद्धांतों के अनुसार विकसित किया जाएगा। इसमें मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी पर जोर रहेगा ताकि माल ढुलाई आसान हो सके। साथ ही पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन एनर्जी और टिकाऊ संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। भूमिगत यूटिलिटी लाइनों की व्यवस्था से बार-बार खुदाई की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे संचालन में सुविधा होगी।
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एनआईसीडीसी की होगी अहम भूमिका
इस पूरी योजना को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को सौंपी गई है। यह संस्था पहले से ही कई बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। इसके अनुभव का फायदा नए औद्योगिक पार्कों के विकास में मिलेगा और परियोजनाओं में देरी की संभावना कम होगी।
रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का अनुमान है कि इस योजना से मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे न केवल बड़ी कंपनियों को फायदा होगा, बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों के साथ स्टार्टअप्स को भी नई संभावनाएं मिलेंगी। यह पहल देश को आत्मनिर्भर बनाने और आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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