Chief Minister Poshan Mart MP: एमपी की 27,500 राशन दुकानें बनेंगी मुख्यमंत्री पोषण मार्ट, मिलेगा रोजमर्रा का पूरा सामान
Chief Minister Poshan Mart MP: मध्य प्रदेश की सार्वजनिक वितरण व्यवस्था अब केवल राशन तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले समय में उचित मूल्य की दुकानें आम परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने वाला केंद्र बनेंगी। सरकार की योजना है कि अगले तीन वर्षों में इन दुकानों को मुख्यमंत्री पोषण मार्ट के रूप में विकसित किया जाए, जहां खाद्यान्न के साथ-साथ दैनिक उपयोग की अन्य आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध हों। यह पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। वर्तमान में प्रदेश में करीब 27 हजार 500 उचित मूल्य की दुकानें संचालित हैं, जिन्हें इस नए स्वरूप में ढाला जाएगा।
विभाग की दो वर्षों की यह रही उपलब्धियां
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने राजधानी में मीडिया से चर्चा करते हुए विभाग के पिछले दो वर्षों के कार्य और आगामी तीन वर्षों की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में विभाग ने पारदर्शिता और तकनीक के उपयोग को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने, उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और किसानों के हित में योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है।
करोड़ों लोगों तक नि:शुल्क राशन की आपूर्ति
मंत्री ने बताया कि प्रदेश में 5 करोड़ 25 लाख से अधिक लोगों को नि:शुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत अब तक लगभग 22 हजार 800 करोड़ रुपये मूल्य का राशन वितरित किया जा चुका है। वितरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया गया, जिसके अंतर्गत हितग्राहियों को एसएमएस के माध्यम से यह जानकारी मिलती है कि राशन दुकान पर अनाज कब पहुंचा और वितरण कब होगा। इसके साथ ही 26 जनवरी और 2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं में पात्र हितग्राहियों की सूची का सार्वजनिक रूप से वाचन किया जा रहा है।
ई-केवाईसी में तेजी, अपात्रता पर लगी लगाम
राशन प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया को तेज किया गया है। पिछले दो वर्षों में करीब 1 करोड़ 70 लाख नए हितग्राहियों का ई-केवाईसी सत्यापन पूरा किया गया। कुल मिलाकर अब तक 4 करोड़ 97 लाख लोगों का सत्यापन हो चुका है, जो लगभग 93 प्रतिशत के बराबर है। सुविधा के लिए बायोमेट्रिक के साथ फेस ऑथेंटिकेशन की व्यवस्था भी की गई है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों, 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और दिव्यांगजनों समेत लगभग 15 लाख लोगों को इस प्रक्रिया से छूट दी गई है। वहीं 14 लाख नए पात्र परिवारों को जोड़कर उन्हें पात्रता पर्ची जारी की गई है।
वन नेशन–वन राशन कार्ड से प्रवासी परिवारों को लाभ
वन नेशन–वन राशन कार्ड योजना के जरिए प्रदेश के बाहर काम करने वाले परिवारों को भी राहत मिली है। हर महीने औसतन 39 हजार परिवार अन्य राज्यों में रहते हुए मध्यप्रदेश का राशन प्राप्त कर रहे हैं, जबकि करीब 6 हजार परिवार दूसरे राज्यों से आकर यहां राशन ले रहे हैं। इसके अलावा लगभग 16 लाख परिवार हर माह अंतर-जिला पोर्टेबिलिटी का लाभ उठा रहे हैं। दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों के 89 गांवों में “आपका राशन आपके द्वार” योजना के तहत घर-घर राशन पहुंचाया जा रहा है।
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घर-घर गैस पहुंचाने के लिए नेटवर्क का विस्तार
मुख्यमंत्री अन्नदूत योजना के अंतर्गत राशन ढुलाई करने वाले वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाया गया है, जिसकी निगरानी राज्य स्तरीय कंट्रोल कमांड सेंटर से की जा रही है। एलपीजी क्षेत्र में उज्ज्वला और गैर-उज्ज्वला योजनाओं के तहत प्रदेश की महिलाओं के लिए 6 करोड़ 17 लाख गैस रिफिल कराए गए, जिन पर 911 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। शहरी इलाकों में पाइपलाइन के जरिए घर-घर गैस पहुंचाने के लिए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार भी किया जा रहा है।
भंडारण व्यवस्था और किसानों को लाभ
अनाज भंडारण को सुरक्षित रखने के लिए वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन ने नमी मापन, फ्यूमिगेशन और निरीक्षण से जुड़े तीन मोबाइल ऐप विकसित किए हैं, जिससे भंडारण की रियल टाइम निगरानी संभव हो सकी है। किसानों के हित में समर्थन मूल्य पर गेहूं और धान की खरीदी की गई। लगभग 28 लाख किसानों से फसल खरीदकर 51 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। गेहूं पर 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देकर कुल 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया गया।
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नाप-तौल, उपभोक्ता संरक्षण और आगे की तैयारी
नाप-तौल विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में सत्यापन और निरीक्षण से 49 करोड़ 14 लाख रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया गया। अनियमितता पाए जाने पर 11 हजार 700 से ज्यादा प्रकरण दर्ज किए गए और करीब 4 करोड़ 50 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। उपभोक्ता आयोगों के कंप्यूटरीकरण से दो वर्षों में 3 लाख 7 हजार से अधिक मामलों का समाधान किया गया। मंत्री ने बताया कि भविष्य में राशन दुकानों को पोषण मार्ट में बदलने, सॉफ्टवेयर सिस्टम को एकीकृत करने, उन्नत तकनीक से वितरण और सिंहस्थ 2028 के दौरान राशन व गैस आपूर्ति की विशेष व्यवस्था की भी विस्तृत योजना तैयार की गई है।
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