wheat export policy shift: गेहूं के निर्यात पर भारत सरकार ने हटाई रोक, जानिए किसको होगा फायदा
Shift in wheat export policy: Government of India lifts ban on wheat exports; find out who stands to benefit.

wheat export policy shift: देश के कृषि व्यापार क्षेत्र के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर कदम बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने एक प्रमुख फैसला लिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की पहुंच को फिर से आसान बनाने की दिशा में यह कदम उठाया गया है। इससे लंबे समय से बंद पड़े विदेशी व्यापार के रास्ते एक बार फिर खुल गए हैं, जिसका सीधा असर देश के व्यापार और कृषि अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा।
सरकार की नई व्यापारिक नीति
विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी डीजीएफटी की ओर से जारी आधिकारिक सूचना में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि भारत ने गेहूं की बिक्री पर विदेशों में भेजी जाने वाली सभी सीमाएं समाप्त कर दी हैं। नए निर्देशों के अनुसार निर्धारित एचएस कोड वाली कैटेगरी में गेहूं के साथ-साथ ड्यूरम गेहूं को भी सीमा पार भेजने की अनुमति तत्काल प्रभाव से दे दी गई है। सरकार के इस निर्णय के बाद अब गेहूं से तैयार होने वाले विविध उत्पाद जैसे आटा, मैदा, रवा या सूजी, होलमील आटा और तैयार आटा भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जा सकेगा। यह नीतिगत बदलाव उस दौर के बाद आया है जब देश में गेहूं के विदेश भेजने पर कड़े नियम लागू थे।
पाबंदी लगाने की पीछे की वजह
वैश्विक स्तर पर खाद्य सामग्री के बाजार में आए भारी फेरबदल को देखते हुए भारत ने पूर्व में यह सख्त निर्णय लिया था। रूस और यूक्रेन के बीच शुरू हुए तनाव के चलते काला सागर वाले क्षेत्रों से माल की आवाजाही और सप्लाई तंत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ था। वह क्षेत्र पूरी दुनिया में गेहूं आपूर्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है। उस दौरान वैश्विक बाजारों में कीमतें तेजी से बढ़ीं और विदेश से आई भारी मांग के कारण भारत के स्थानीय बाजारों में भी गेहूं के दाम उछलने लगे थे। देश के नागरिकों के लिए पर्याप्त अनाज सुरक्षित रखने और घरेलू स्तर पर खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से मई 2022 में सरकार ने यह रोक लगाई थी। बाद में उसी वर्ष अगस्त महीने में गेहूं से बनने वाले अन्य सामानों और आटे पर भी निर्यात प्रतिबंध लागू कर दिए गए थे।
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निर्यातकों और मिल मालिकों को राहत
व्यापार नियमों में ढील मिलने से अब भारतीय व्यापारियों और निर्यातकों के लिए विदेशी खरीदारों तक पहुंचना बहुत आसान हो जाएगा। डीजीएफटी ने यह स्पष्ट किया है कि ये तमाम बदलाव देश की फॉरेन ट्रेड पॉलिसी और तय मानकों के अंतर्गत ही अमल में लाए गए हैं। इस निर्णय का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि आटा और अन्य खाद्य सामग्री बनाने वाली भारतीय मिलों को अब विदेशी मांग का सीधा लाभ उठाने का मौका मिलेगा। पहले इन कारोबारियों को अपनी सामग्री बेचने के लिए कई तरह की अनुमतियों के दौर से गुजरना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें विशेष स्वीकृतियों की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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वैश्विक बाजार में भारत की नई स्थिति
इस कदम से भारतीय निर्यातकों को अपने उत्पादन, व्यापारिक समझौतों और जहाजों के जरिए माल भेजने की पूरी योजना बनाने में स्थिरता मिलेगी। अब तक व्यापारी सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित रहने को मजबूर थे, लेकिन अब वे दुनिया भर की मांग के हिसाब से अपना कामकाज तय कर सकेंगे। इससे देश के कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की पकड़ और मजबूत होगी।
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