Petition Filed : जलकुंभी से पटी माचना नदी, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान, पत्रकार ने खटखटाया अदालत का दरवाजा, नोटिस जारी
◼️ उत्तम मालवीय, बैतूल
बैतूल शहर की जीवनदायिनी कहलाने वाली माचना नदी में जलकुंभी पूरी तरह से फैल चुकी है। इससे पूरी नदी प्रदूषित हो गई है, लेकिन इसे हटाने के लिए प्रशासन द्वारा अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। कुछ ही महीनों के भीतर इस जलीय पौधे ने पूरी नदी को अपनी चपेट में ले लिया। इससे पानी प्रदूषित हो रहा है और जलीय जंतुओं को नुकसान हो रहा है। माचना नदी की दुर्दशा को देखते हुए शहर के जागरूक नागरिक एवं वरिष्ठ पत्रकार मो. इरशाद ने प्रशासन के आला अधिकारियों को दोषी करार देते हुए इनके खिलाफ स्थाई लोक अदालत में प्रकरण दायर किया है।
आवेदक मो. इरशाद के अधिवक्ता गिरीश गर्ग ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने तत्काल ही धारा 22-सी विधिक सहायता अधिनियम के तहत मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद बैतूल, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग-2 सदर बैतूल, कलेक्टर बैतूल, निर्देशक खरपतवार विज्ञान अनुसंधान जबलपुर को नोटिस भेजा है। नोटिस में उल्लेख किया है कि आवेदक जागरूक व्यक्ति होकर पत्रकार हैं तथा विभिन्न जन संगठनों से जुड़ा है।
बैतूल नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत हजारों व्यक्ति निवासरत हैं तथा बैतूल नगर पालिका अनेक वार्डों में विभाजित है। बैतूल नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत माचना नदी स्थित है। इस नदी के पानी का उपयोग अनावेदक-1 मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा नगर पालिका क्षेत्र में जल प्रदाय हेतु किया जाता है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा जल प्रदाय हेतु माचना नदी में जगह-जगह पर छोटे बांध बनाए जाकर माचना नदी के निरंतर बहाव को रोका जाकर पानी एकत्रित किया जा रहा है।

इसके कारण करबला घाट से लेकर गंज मोक्ष धाम तक के हिस्से में माचना नदी में जलकुंभी फैल गई है। जिसने माचना नदी को पूरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया है। जलकुंभी के फैल जाने से माचना नदी के पानी का बहाव रुका हुआ है। जिससे नदी का अस्तित्व भी खतरे में है। जलकुंभी द्वारा पानी में मौजूद ऑक्सीजन का उपयोग कर लेने से पानी में मौजूद सूक्ष्म जीव और मछलियां मर जाती है अथवा उनकी वृद्धि रुक जाती है। जिससे पानी में मौजूद जैव विवधिता का भी हृास होता है।
जलकुंभी द्वारा अनेक जलीय प्रजातियों को नुकसान पहुंचाया जाकर उन्हें नष्ट कर दिया जाता है। जलकुंभी का विस्तार अत्याधिक तीव्र गति से होता रहा है। जलकुंभी द्वारा सम्पूर्ण माचना नदी को ढंक दिया गया है। नदी में जलकुंभी के फैल जाने से नदी के वाष्पोत्सर्जन की गति लगभग 3 से 8 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। जिससे पानी का जल स्तर भी तेजी से कम होने लगता है तथा जलकुंभी से ग्रसित पानी के क्षेत्र में मच्छरों की अत्याधिक उत्पत्ति होती है।
समय रहते जिम्मेदारों ने नहीं किया नियंत्रण
न्यायालय ने कहा कि माचना नदी के रखरखाव का दायित्व अनावेदकों का है तथा माचना नदी का स्वामित्व भी अनावेदकों का है। जलकुंभी के अत्याधिक फैल जाने से स्पष्ट है कि अनावेदकों द्वारा जलकुंभी पर नियंत्रण ना किया जाकर अपने वैधानिक दायित्वों कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया जा रहा है। जलकुंभी के उक्तानुसार फैलाव से आसपास के क्षेत्रों में मच्छरों का अत्याधिक प्रकोप होकर मच्छरजनित बीमारियां फैलना संभावित भी है। माचना नदी के आसपास घनी आबादी वाले क्षेत्र स्थित है।
जल प्रदाय भी बाधित होना संभावित
अनावेदकों द्वारा जलकुंभी के नियंत्रण/जैवकीय नियंत्रण का कोई समुचित प्रयास भी नहीं किया गया है। जिससे जल प्रदाय भी बाधित होना संभावित है। साथ ही स्थानीय निवासियों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति बाधित होना भी संभावित है। जिसमें जनकल्याण का हित निहित होकर लोकोपयोगी सेवाओं अंतर्गत आता है। प्रकरण में न्यायालय श्रवणाधिकार एवं क्षेत्राधिकार प्राप्त है। न्यायालय से विनय पूर्वक करबला घाट से गंज मोक्ष धाम तक माचना नदी में मौजूद जलकुंभी को समाप्त किये जाने आदेशित किये जाने का आग्रह किया गया है।



