बहादुर बेटी: हादसे में हुई जख्मी, फिर भी अस्पताल की जगह गई परीक्षा केंद्र, दर्द सहते हुए हल किया पर्चा
◾ उत्तम मालवीय, बैतूल © 9425003881
आजकल के बच्चे अपनी पढ़ाई, परीक्षा, करियर और भविष्य को लेकर कितने संजीदा और जुनूनी है, इसका नजारा आज बैतूल में देखने को मिला। परीक्षा देने जा रही एक छात्रा स्कूटी स्लिप होने से बुरी तरह जख्मी हो गई। बावजूद इसके वह अस्पताल जाने के बजाय परीक्षा केंद्र गई। यहाँ उसने घुटने से बहते खून के साथ पूरे 3 घण्टे तक असहनीय दर्द सहने के बावजूद अपना प्रश्न पत्र हल किया और इसके बाद इलाज करवाने अस्पताल गई।
जिद, जुनून और बहादुरी की मिसाल बनी यह छात्रा सेंदुरजना गांव की वर्षा यादव है। आज सुबह वह परीक्षा देने आ रही थी। इसी बीच कारगिल चौक पर स्कूटी स्लिप होने से वह जख्मी हो गई। उसके एक घुटने से लगातार खून बहने लगा। यह देखकर ऑटो चालक महादेव पांसे मदद के लिए उसके पास पहुंचे।

श्री पांसे बताते हैं कि छात्रा के पांव में काफी अधिक चोट थी। उससे अपने पांव पर खड़े होना और चलना भी नहीं हो रहा था। यह देख मैंने उसे हॉस्पिटल ले जाने के लिए बोला तो उसने साफ इंकार कर दिया। छात्रा का कहना था कि भैया चाहे कुछ भी हो जाए सबसे पहले तो मैं पेपर दूंगी, इलाज तो उसके बाद भी करवा लूंगी।
इस पर वे बिना देर किए उसे सीधे परीक्षा केंद्र ले गए। वहां भी 2 शिक्षिकाओं की मदद से उसे उसकी डेस्क तक पहुंचाया जा सका। उसका केंद्र शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक स्कूल बैतूल गंज में था। यहाँ उसने पूरे समय असहनीय दर्द सहा और राहत की सांस तभी ली जब पूरा प्रश्न पत्र हल कर लिया। छात्रा की बहादुरी की केंद्र पर मौजूद सभी अधिकारी-कर्मचारी भी प्रशंसा करते हुए उसका हौसला बढ़ाते रहे।
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