बड़ी खबरेंदेश/विदेशधर्म/अध्यात्म अपडेटबैतूल अपडेटब्रेकिंग न्यूजमध्यप्रदेश अपडेट

स्तंभेश्वर महादेव मंदिर : भक्तों को दर्शन देकर गायब हो जाता है यह मंदिर, दर्शन मात्र से मिलती है सभी कष्टों से मुक्ति

 

Credit : Opindia

Stambeshwar Mahadev Mandir : भारत में अनेक धार्मिक स्थल ऐसे हैं जिनके बारे में कई चमत्कारिक कहानियां प्रचलित हैं। कभी-कभी इन चमत्कारों में प्रकृति भी अपना पूरा योगदान देती है। ऐसा ही कुछ गुजरात के वडोदरा में स्थित भगवान शिव के मंदिर के साथ भी है। जो देखते ही देखते गायब हो जाता है। फिर अचानक ही दोबारा दिखने लगता है। मंदिर की इसी खूबी के कारण यह दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। भोले के भक्त इस घटना को अपनी आंखों से देखने के लिए दौड़े चले आते हैं।

स्तंभेश्वर महादेव मंदिर समुद्र में स्थित है। माना जाता है कि महिसागर संगम तीर्थ पर भगवान शंकर के पुत्र कार्तिकेय द्वारा स्थापित इस शिवलिंग-श्री स्तंभेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से ही भक्त सभी कष्टों से मुक्त हो जाते हैं। हालांकि इस मंदिर का ओझल हो जाना कोई चमत्कार नहीं बल्कि एक प्राकृतिक घटना का परिणाम है।

दरअसल, दिन में कम से कम दो बार समुद्र का जल स्तर इतना बढ़ जाता है कि मंदिर पूरी तरह समुद्र में डूब जाता है। इसके बाद कुछ ही पलों में समुद्र का जल स्तर घट जाता है। तब मंदिर फिर से नजर आने लगता है। यह घटना हर रोज सुबह और शाम के समय घटती है। श्रद्धालु इस घटना को समुद्र द्वारा शिव का अभिषेक करना कहते हैं। भक्त दूर से इस नजारे को देखते हैं।

इन पुराणों में भी है वर्णन

स्कंद पुराण व शिव पुराण की रुद्र संहिता में स्तंभेश्वर तीर्थ का एक बड़ा विवरण मिलता है। इस मंदिर के निर्माण से जुड़ी कथा के अनुसार, राक्षस ताड़कासुर ने कठोर तपस्या के बल पर शिवजी से यह आशीर्वाद प्राप्त किया कि उसकी मृत्यु तभी संभव है, जब शिव पुत्र उसकी हत्या करे और वह भी मात्र छह दिन की आयु का। भगवान शिव ने उसे वरदान दे दिया।

ताड़कासुर का किया संहार

आशीर्वाद मिलते ही ताड़कासुर ने पूरे ब्रह्मांड में उत्पात मचाना शुरू कर दिया। उसके उत्पात से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए अंतत: छह मुखों वाले कार्तिकेय ने मात्र छह दिन की आयु में ताड़कासुर का संहार कर दिया। लेकिन, जैसे ही उन्हें ज्ञात हुआ कि ताड़कासुर शिवजी का भक्त था, वे व्यथित हो गए।

कार्तिकेय ने कराया था निर्माण

इसके बाद, भगवान विष्णु ने कार्तिकेय को सुझाव दिया कि जहां उन्होंने राक्षस का वध किया है, उस स्थान पर शिव मंदिर का निर्माण करा दें तो उनके मन को शांति मिलेगी। भगवान विष्णु के कहे अनुसार कार्तिकेय ने इस मंदिर का निर्माण कराया। सभी देवताओं ने मिलकर विश्वनंदक स्तंभ की स्थापना की जो स्तंभेश्वर महादेव के नाम से जाना गया।

कब हुई मंदिर की खोज

इस मंदिर की खोज आज से 150 वर्ष पूर्व ही हुई है। महाशिवरात्रि यहां का सबसे बड़ा त्योहार है। इसके अलावा श्रावण महीने में भी यहां भक्तों की भीड़ लगी रहती है। यह तीर्थ गुजरात के भरूच जिले के जंबूसर तहसील में कावी-कंबोई समुद्र तट पर स्थित है।

कैसे पहुंचे स्तंभेश्वर महादेव

महिसागर संगम तीर्थ स्तंभेश्वर महादेव-कावी कंबोई पहुंचने के लिए वडोदरा से 70 किलोमीटर सड़क मार्ग से जंबुसर होकर पहुंच सकते हैं। मंदिर का नजदीकी हवाई अड्डा वडोदरा में है जो मंदिर से 80 किमी दूर है। इसके अलावा, सूरत हवाई अड्डा यहां से लगभग 180 किमी दूर है। मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन भरूच जंक्शन है। जिसकी मंदिर से दूरी लगभग 96 किमी है। गुजरात राज्य परिवहन के अलावा निजी परिवहन सेवाओं की उपलब्धता भी यहां मौजूद है।

News Source :  https://www.jansatta.com/religion/a-temple-that-disappears/2303650/

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button