Lease Renewal Policy: लीज नवीनीकरण पर बड़ी राहत! सरकार बदलेगी नियम, अटकी फाइलों को मिलेगा स्थायी समाधान
Lease Renewal Policy: दशकों पुरानी लीज जमीनों के बदले स्वरूप से नवीनीकरण अटका, सरकार नई नीति से देगी राहत और बढ़ाएगी निकायों की आय

Lease Renewal Policy: राज्य में लीज पर दी गई जमीनों को लेकर लंबे समय से चली आ रही उलझनों के समाधान की दिशा में सरकार ने बड़ा संकेत दिया है। व्यापार और आवास के लिए दशकों पहले दी गई जमीनों का मूल स्वरूप बदल जाने से नवीनीकरण अटक रहा है। अब सरकार नियमों में बदलाव कर ऐसा समाधान निकालने की तैयारी में है, जिससे लोगों को राहत मिले और स्थानीय निकायों की आय भी बढ़ सके।
लीज जमीनों का बदले स्वरूप से दिक्कतें
बीते वर्षों में राज्य सरकार ने कई स्थानों पर व्यावसायिक और आवासीय उपयोग के लिए जमीन लीज पर दी थी। समय के साथ परिवारों का विस्तार हुआ, संपत्तियों का बंटवारा हुआ और एक ही भूखंड पर अलग-अलग निर्माण हो गए। कई जगह मूल नक्शा और स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। ऐसे में जब लीज की अवधि पूरी होने पर नवीनीकरण के लिए आवेदन किया जाता है तो दस्तावेज और वास्तविक स्थिति में अंतर के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती। यह स्थिति किसी एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि कई नगर निकायों में समान समस्या सामने आ रही है।
विधानसभा में उठाया गया यह मामला
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शुक्रवार को विधानसभा में इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण घोषणा की। कांग्रेस के डॉ. हिरालाल अलावा और भाजपा के अभिलाष पांडेय के सवालों के जवाब में मंत्री ने माना कि लीज से जुड़े मामलों में व्यावहारिक कठिनाइयां हैं। डॉ. अलावा ने मनावर नगर पालिका परिषद की जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जांच में तत्कालीन अध्यक्ष, सीएमओ और अन्य कर्मचारी दोषी पाए गए, फिर भी चार साल में कब्जाधारियों पर कार्रवाई नहीं हुई।
मनावर, झाबुआ और कुक्षी में समान स्थिति
मंत्री ने बताया कि ऐसी दिक्कतें मनावर ही नहीं, झाबुआ और कुक्षी जैसे क्षेत्रों में भी हैं। पहले इन स्थानों पर व्यापारिक गतिविधियां सीमित थीं, इसलिए बाहर से व्यापारियों को आकर्षित करने के लिए 30 वर्ष की अवधि के लिए एक रुपये की प्रतीकात्मक दर पर जमीन लीज पर दी गई थी। बाद में नवीनीकरण की प्रक्रिया नहीं हो सकी। अब वहां तीसरी पीढ़ी रह रही है और कई स्थानों पर पक्की दुकानें व मकान बन चुके हैं। कई मामलों में प्रारंभिक लीज शर्तों के दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं हैं। 40 से 50 वर्षों से रह रहे लोगों को हटाना व्यवहारिक नहीं माना जा रहा।
नई नीति लाने की तैयारी में सरकार
सरकार का कहना है कि अब ऐसी नीति बनाई जाएगी जिससे नागरिकों को असुविधा न हो और निकायों की आय भी बढ़े। प्रस्ताव है कि वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर शुल्क लेकर लीज नवीनीकरण का रास्ता निकाला जाए। इससे लंबित आवेदनों का समाधान संभव हो सकेगा।
एक शहर और अलग-अलग नियमों पर सवाल
भोपाल दक्षिण-पश्चिम से विधायक भगवानदास सबनानी ने नगर निगम की लीज प्रणाली में असमानता का मुद्दा उठाया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि न्यू मार्केट क्षेत्र में नजूल की दुकानों का 30 वर्ष के लिए नवीनीकरण हो रहा है, जबकि नगर निगम की दुकानों का नवीनीकरण केवल तीन वर्ष के लिए किया जा रहा है। एक ही बाजार में अलग-अलग नियम होने पर उन्होंने आपत्ति जताई।
वहीं, अभिलाष पांडेय ने कहा कि बड़े भूखंडों पर बने अपार्टमेंट्स में फ्री लीज होल्ड कराने के दौरान पूरे भूखंड का शुल्क लिया जा रहा है, जिससे आवेदकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। उनके अनुसार पांच हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं।
इंदौर में भी लंबित पड़े हैं कई प्रकरण
इंदौर से विधायक राकेश शुक्ला ने बताया कि वहां हजारों संपत्तियां ऐसी हैं जिनमें मकान बने हैं और शासन पहले ही लीज फ्री होल्ड के निर्देश दे चुका है, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही। मंत्री ने स्पष्ट किया कि लीज नवीनीकरण का अधिकार निकायों को सौंपा गया है, फिर भी लोगों को न निर्माण की अनुमति मिल पा रही है और न नवीनीकरण हो रहा है।
वर्षों से अटके मामलों का होगा स्थायी समाधान
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास विभाग को निर्देश दिए जाएंगे कि सभी आयुक्तों की बैठक बुलाकर समस्याओं का समाधान निकाला जाए। तीन माह के भीतर समीक्षा बैठक कर आवश्यक होने पर नियमों में संशोधन भी किया जाएगा, ताकि वर्षों से अटके मामलों का स्थायी समाधान हो सके।
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