Betul News : गांव तक वाहन पहुंचने नहीं थी सड़क, दामाद के शव को बैलगाड़ी में डालकर पीएम कराने लाया ससुर
Betul News: There was no road to reach the village, the father-in-law brought the son-in-law's dead body in a bullock cart to PM
• अंकित सूर्यवंशी, आमला
वैसे तो चहुंतरफा विकास के खूब दावें होते हैं, लेकिन दावों की हकीकत भी समय-समय पर खुलती रहती है। आलम यह है कि जिला और कई ब्लॉक मुख्यालयों के आसपास स्थित कई गांवों तक ही आज तक पक्की सड़क नहीं बन पाई है। ऐसे में इन गांवों तक एंबुलेंस या अन्य वाहन भी नहीं पहुंच पाते हैं।
ऐसे ही एक मामले में ग्राम तक पक्का पहुंच मार्ग नहीं होने से दुर्घटना में मृत एक व्यक्ति के शव को बैलगाड़ी से आमला सिविल अस्पताल तक पीएम करवाने लाया गया। मृत दामाद को स्वयं उसके ससुर ग्राम से शहर के अस्पताल अपनी बैलगाड़ी में डालकर लाए और पीएम के बाद शव को बैलगाड़ी से ही गांव अंत्येष्टि करने लेकर गए। वहीं अन्य ग्रामीण पैदल बैलगाड़ी के पीछे चलते वापस लौटे
गौरतलब है कि आमला-बोरदेही मार्ग पर आमला नगर से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत तोरणवाड़ा के अंतर्गत आने वाले ग्राम टप्पाढाना निवासी संतोष पिता कामजी उइके उम्र 28 वर्ष की मौत डैम में डूबने से हो गई थी। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। जिसके बाद बैतूल से बुलाई गई टीम द्वारा डैम से शव निकाला गया।
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मृतक मजदूरी का कार्य करता था जिसके दो बच्चे भी हैं। पुत्र की उम्र 6 वर्ष है वहीं पुत्री की डेढ़ वर्ष आयु है।दामाद के शव को मृतक के ससुर द्वारा बैलगाड़ी में डालकर सिविल अस्पताल आमला लाया गया। बैलगाड़ी के पीछे मृतक के पिता कामजी, भाई प्रमोद सहित ढाने के अन्य लोग पैदल चलकर आए। दोपहर 2 बजे शव को पीएम हेतु लाया गया जिसके बाद 4 बजे पीएम होने के बाद शव को वापस अंत्येष्टि के लिए ले जाया गया। परिजन सहित ग्रामीण भी वापस बैलगाड़ी के पीछे लौटे।

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टप्पाढाना तक नहीं है पक्का मार्ग
ग्राम टप्पाढाना तक पक्का मार्ग नहीं है तोरणवाड़ा से ग्राम की दूरी लगभग 2 किलोमीटर है। ग्राम के मनोज वटके, बस्तीराम, गणेश चौहान, राजेश धुर्वे ने बताया कि ग्राम 25 घरों की आदिवासियों की बस्ती है। ग्राम का मार्ग कच्चा है। जिसमें बारिश के मौसम में मार्ग दलदल में तब्दील हो जाता है। इससे ग्रामीण पैदल बमुश्किल निकल पाते हैं। स्कूल पढ़ने वाले छोटे बच्चे भी कीचड़ भरे मार्ग से आवाजाही करते हैं।
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इस संबंध में सचिव सनतराव देशमुख ने बताया कि वे आज आवश्यक कार्य होने से बाहर थे। मृतक के शव को अस्पताल ले जाने सरपंच को ट्रैक्टर की व्यवस्था करने को कहा था। वहीं सिविल अस्पताल के बीसीएम सुभाषचंद्र गुजरकर ने बताया कि अस्पताल में शव वाहन नहीं है। केवल 108 की सुविधा है, जिससे घायल व्यक्तियों को लाया जाता है।
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