pitru paksha 2022 : ताप्ती सरोवर के तट पर प्रारंभ हुआ तर्पण, पंडित गणेश त्रिवेदी करा रहे हैं निशुल्क तर्पण कर्म

▪️ विजय सावरकर, मुलताई
पितृपक्ष के दौरान दिवंगत परिजनों के प्रति श्रद्धा भाव रखते हुए पिंड दान तर्पण कर्म करने का हिंदू समाज में विशेष महत्व है। तर्पण कर्म पवित्र नदियों के तट पर किया जाता है। सूर्य पुत्री ताप्ती के पावन तट पर पितृपक्ष के दौरान पिंडदान तर्पण करने का पौराणिक महत्त्व है। पवित्र नगरी के ज्योतिषाचार्य और लक्ष्मीनारायण मंदिर के पुजारी पंडित गणेश त्रिवेदी पितृपक्ष के दौरान ताप्ती सरोवर के तट पर प्रथम तिथि से पितृमोक्ष अमावस्या तक निशुल्क तर्पण कर्म कराते है। शनिवार को पितृ पक्ष की पूर्णिमा तिथि से तर्पण कर्म प्रारंभ हुआ।
पंडित त्रिवेदी ने बताया बीते वर्ष से तर्पण कर्म में उपस्थित लोगों से उनके दिवंगत परिजनों के साथ देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद सैनिकों की मोक्ष प्राप्ति की कामना करते हुए ताप्ती जल से तर्पण कराने की परंपरा प्रारंभ की गई है। इस वर्ष भी इस परंपरा को जारी रखते हुए देश के दुश्मनों से हमारी रक्षा करते हुए अपनी जान गवाने वाले शहीदों के प्रति पितृपक्ष में श्रद्धा भाव ज्ञापित करने की मंशा से तर्पण कर्म किया जा रहा है। शनिवार सुबह 7.30 बजे से 8.30 बजे तक विधिपूर्वक किए गए तर्पण कर्म में दो दर्जन नागरिको ने उपस्थित होकर तर्पण किया। पंडित त्रिवेदी ने बताया पितृ मोक्ष अमावस्या तक प्रतिदिन निर्धारित समय पर तर्पण कर्म कराया जाएगा।
31 वर्ष से निशुल्क तर्पण परंपरा का हो रहा निर्वहन
ताप्ती सरोवर के तट पर पितृपक्ष के दौरान निशुल्क तर्पण कराए जाने का सेवा कार्य बीते 31 वर्षों से जारी है। इस परंपरा की शुरुआत पंडित दुर्गाशंकर त्रिवेदी ने की थी। पंडित दुर्गाशंकर त्रिवेदी के निधन के बाद उनके पुत्र पंडित गणेश त्रिवेदी ने परंपरा को जारी रखा है। पंडित त्रिवेदी ने बताया निशुल्क तर्पण के पीछे उनके पिताजी की यह मंशा थी जो निर्धन व्यक्ति भी अपने दिवंगत परिजन का तर्पण करने में समर्थ नहीं है। वह भी तर्पण कर सके इसी भावना से वह भी प्रतिवर्ष निशुल्क तर्पण कर्म करा रहे हैं।
ताप्ती तट पर तर्पण से मिलता है मोक्ष
सूर्य पुत्री पुण्य सलिला ताप्ती का पौराणिक महत्व अपार है। मान्यता है कि ताप्ती जल से दिवंगत परिजनों के लिए तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पितृपक्ष के दौरान महाराष्ट्र प्रदेश के साथ अन्य नगरों से भी बड़ी संख्या में लोग ताप्ती सरोवर पर तर्पण करने पहुंचते है।



