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Madhya Pradesh Pension Rule Change: पेंशन नियमों में ऐतिहासिक बदलाव, अब बड़ी बेटी को मिलेगा फैमिली पेंशन का हक, जानें कब से होंगे लागू

Madhya Pradesh Pension Rule Change: मध्यप्रदेश सरकार पेंशन व्यवस्था में अब तक का सबसे अहम संशोधन करने जा रही है। प्रस्तावित बदलावों से परिवार पेंशन से जुड़े नियम अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक होंगे। खास बात यह है कि इन नए नियमों में बेटियों, दिव्यांग संतानों और आश्रितों के अधिकारों को पहले से ज्यादा प्राथमिकता दी गई है।

मध्यप्रदेश सरकार ने पेंशन नियमों में बड़े संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। यह प्रस्ताव कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा। नए नियमों के अनुसार परिवार पेंशन को लेकर कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य सामाजिक संतुलन और आश्रितों को बेहतर सुरक्षा देना है। प्रस्ताव है कि ये नियम 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे।

बेटियों को मिलेगी प्राथमिकता

प्रस्तावित नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि परिवार में पुत्र मौजूद है, लेकिन उससे उम्र में बड़ी बेटी है, तो परिवार पेंशन की पहली पात्र वही बेटी होगी। यह बदलाव पुराने प्रावधानों से अलग है, जहां पुत्र को प्राथमिकता दी जाती थी।

अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा पुत्री

नए नियमों के तहत अविवाहित पुत्री, विधवा पुत्री और तलाकशुदा पुत्री को आजीवन परिवार पेंशन मिलती रहेगी। हालांकि 25 वर्ष से अधिक आयु की अविवाहित या विधवा बेटी को हर साल यह लिखित रूप से देना होगा कि उसकी वैवाहिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

दिव्यांग आश्रितों के लिए राहत

जो पुत्र, पुत्री या भाई आजीविका कमाने में पूरी तरह असमर्थ हैं और दिव्यांग हैं, उन्हें जीवनभर पेंशन की पात्रता होगी। यदि दिव्यांगता स्थायी है तो एक बार सत्यापन पर्याप्त होगा, जबकि अस्थायी दिव्यांगता की स्थिति में हर पांच वर्ष में प्रमाण पत्र देना होगा।

पेंशन ट्रांसफर से जुड़े नियम

यदि बड़ी बेटी को पेंशन मिल रही है और बाद में उसका विवाह हो जाता है, तो पेंशन छोटे भाई या बहन को ट्रांसफर हो सकेगी। सामान्य स्थिति में बच्चों को पेंशन 25 वर्ष की आयु तक ही मिलती है, इसके बाद यह बंद हो जाती है।

दोनों माता-पिता सरकारी कर्मचारी हों तो

यदि पति और पत्नी दोनों सरकारी कर्मचारी थे, तो उनकी मृत्यु के बाद दोनों की फैमिली पेंशन एक साथ मिल सकेगी। किसी एक पेंशन को छोड़ने की बाध्यता नहीं होगी।

माता-पिता और गोद ली गई संतान का अधिकार

यदि पेंशनर के पति या पत्नी नहीं हैं, तो आश्रित माता-पिता पेंशन के पात्र होंगे, बशर्ते वे स्वयं पेंशनर न हों। वहीं गोद ली गई संतान को भी परिवार पेंशन मिलेगी, इसके लिए गोद लेने से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

आय शुरू होने पर बंद होगी पेंशन

नियमों में यह भी साफ किया गया है कि यदि परिवार पेंशन पाने वाला सदस्य बाद में नौकरी करने लगे या उसकी नियमित आय शुरू हो जाए, तो उस स्थिति में परिवार पेंशन बंद कर दी जाएगी। सरकार के इन प्रस्तावित बदलावों को सामाजिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इससे परिवार के वास्तविक आश्रितों को अधिक न्यायपूर्ण तरीके से पेंशन का लाभ मिल सकेगा।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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