Gadmal Crop : बैतूल में होती है गजब की फसल, इससे रोटी भी बनती और दाल के रूप में भी होती है उपयोग

Gadmal Crop : शायद आप यकीन न करें कि कोई ऐसी भी फसल होती है जिससे रोटी भी बनाई जा सकती है और दाल के रूप में भी उसका उपयोग होता हो, लेकिन यह हकीकत है। यह अनूठी फसल केवल मध्यप्रदेश (madhyapradesh) के बैतूल (betul) जिले में होती है। हालांकि अभी तक इस फसल को राष्ट्रीय या प्रदेश स्तर पर पहचान नहीं मिल सकी है। अब संभावना है कि जल्द ही इसे यह पहचान मिल जाएगी।
दरअसल, कृषि विज्ञान केन्द्र बैतूल (Krishi Vigyan Kendra Betul) द्वारा दलहनी फसल गडमल को पहचान दिलाने एवं इसके संरक्षण हेतु राष्ट्रीय पादप आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सहयोग से 22 दिसंबर को विकासखंड भीमपुर के ग्राम दामजीपुरा में गडमल दिवस मनाया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय पादप आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो नई दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. कुलदीप त्रिपाठी, कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. व्हीके वर्मा, वैज्ञानिक डॉ. आरडी बारपेटे एवं डॉ. मेघा दुबे ने भाग लिया। (Gadmal Crop)

25 गांवों के किसान करते खेती(Gadmal Crop)
कार्यक्रम में डॉ. आरडी बारपेटे ने बताया कि गडमल जिले के विकासखंड भीमपुर के आदिवासी गांवों-दामजीपुरा, बटकी, डुलारिया, गोबरबेल जैसे लगभग 25 गांवों के आदिवासी कृषकों द्वारा उगाई जाने वाली एक नई दलहनी फसल है, जिसकी देश या विश्व स्तर पर कहीं कोई वैज्ञानिक पहचान नहीं है। यह फसल लेट खरीफ यानि सितंबर माह में बोई जाती है। लगभग 90 दिन में पककर तैयार होती है। प्राकृतिक कारणों से खरीफ की प्रमुख फसलें असफल होने पर इसका उत्पादन लिया जा सकता है। (Gadmal Crop)
पीढ़ियों से हो रहा है उत्पादन
डॉ. बारपेटे ने बताया कि यह दलहनी फसल आदिवासियों के द्वारा दाल के रूप में एवं इसका आटा बनाकर रोटी के रूप में उपयोग की जाती है। पीढ़ियों से यह फसल आदिवासियों के द्वारा उगाई जा रही है एवं खाने के अलावा आदिवासियों द्वारा उनके धार्मिक अनुष्ठान में भी इसका प्रयोग किया जाता है। विषाणु रोग मोजेक के प्रकोप से इसका क्षेत्रफल एवं उत्पादन कम हुआ है।
वैज्ञानिकों ने एकत्र किए नमूने
कार्यक्रम में राष्ट्रीय पादप आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो नई दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. कुलदीप त्रिपाठी द्वारा गडमल के बीज, पौधे, फूल आदि के नमूने एकत्र किए गए। वैज्ञानिक अध्ययन के पश्चात् इस फसल को देश और विश्व के स्तर पर पहचान एवं संरक्षण मिलने की संभावना है। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा इस फसल को जिले के नाम पर जीआई टेग दिलवाने हेतु प्रयास किये जा रहे हैं।(Gadmal Crop)



