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प्रेरक : यहां सदियों से चल रहा स्वच्छता अभियान, पूरे गांव के लोग घर और गांव की सफाई कर कचरे को बाहर ले जाकर करते हैं निपटान

• केशर पालवी, भीमपुर

देश में पिछले कुछ सालों से स्वच्छता अभियान (Cleanliness campaign) बड़े जोर-शोर से चल रहा है। हालांकि इस सरकारी अभियान का असर शहरी क्षेत्रों में ही नजर आता है। लेकिन, आपको जानकर यह आश्चर्य होगा कि आदिवासी बहुल गांवों में आज से नहीं बल्कि पिछले कई दशकों से यह अभियान चलाया जाता है। ग्रामीण किसी के आह्वान पर नहीं बल्कि स्वप्रेरणा से पोला पर्व (pola festival) पर यह अभियान चलाते हैं। इसमें पूरे गांव के लोग अपने-अपने घरों से कचरा निकालकर गांव से बाहर उसका निपटान करते हैं। ग्रामीण भारत का यह स्वच्छता अभियान (Cleanliness a festival in villages) बड़ा अचंभित करता है।

विकासखंड भीमपुर की ग्राम पंचायत चोहटा पोपटी के ग्राम घोघरा के अलावा रातामाटी, नांदा, गदाखार, पाठ, बेला, बुकदी, निशाना, बका, पीपल्दा, इमलीढाना, कारीदा, ऊंचाखेड़ा सहित अन्य ग्रामों में पोला पर्व पर यह स्वच्छता अभियान चलाया गया। जिसमें जनजाति समुदाय की परंपरा के अनुसार अपने-अपने घरों का कचरा निकाल कर सुरक्षित गांव के बाहर एकत्रित कर कचरे का निपटारा किया गया।

यह परंपरा जनजातीय समाज में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। जनजाति समुदाय के ग्रामीणों ने बताया कि यह परंपरा उन्हें विरासत में मिली है। पीढ़ी दर पीढ़ी इसका पालन भी किया जा रहा है। पोला कर का पर्व जनजाति समुदाय के लिए समुदाय का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। सरपंच रामकिशोर धुर्वे ने बताया कि, वर्तमान समय मे शासन की महत्वकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का कार्य जारी है। लेकिन, हमारी संस्कृति में सदियों से पर्व के दौरान भी स्वच्छता को विशेष महत्व दिया जाता रहा है। जिसका उदाहरण हमारे पर्व के दौरान देखने को मिलता है।

पोला एवं कर के पर्व के दौरान समूचे ग्राम के ग्रामीण अपनी सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत और परंपरा के अनुसार घर और गांव की साफ-सफाई कर निकले हुए कूड़े एवं कचरे को गांव से दूर ले जाकर व्यवस्थित इसका निपटारा करते हैं। जो कि शासन प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान के लिए भी बेहद आवश्यक और सहयोग के रूप में देखा जा सकता है।

भगत तय करता है तारीख

बताया जाता है कि गांव में सफाई के इस अभियान के लिए बकायदा तारीख तय की जाती है। गांव का भगत कब गांव में सफाई की जाए, यह तय करता है। फिर पूरे गांव में इसकी मुनादी कराई जाती है। तय समय और तारीख पर ग्रामीण अपने घरों के अलावा, पूरे गांव में सफाई अभियान चलाकर कूड़ा एकत्रित करते हैं। इसे फिर एक साथ गांव के बाहर ले जाकर निपटारा किया जाता है। देखें वीडियो…

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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