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खबर का असर: चंद घंटों में बना नि:शक्तता प्रमाण पत्र, मिलेगी पेंशन

  • उत्तम मालवीय, बैतूल © 9425003881
    बैतूल के बोथिया गांव की दिव्यांग बालिका दीपिका का मामला ‘बैतूल अपडेट’ द्वारा उठाते ही प्रशासन ने पूरी गंभीरता से उसकी सुध ली। स्थिति यह थी कि पहले जो नि:शक्तता प्रमाण पत्र कई चक्कर काटने के बाद इतने सालों में भी नहीं बना था, वह चंद घंटों में बन गया। यही नहीं, कल तक उसका पेंशन प्रकरण भी स्वीकृत हो जाएगा। उसे व्हील चेयर समेत सभी शासकीय योजनाओं का लाभ भी मिलेगा।

    “बैतूल अपडेट” द्वारा सोमवार को प्रकाशित खबर…

    इस लिंक पर पढ़ें प्रकाशित समाचार… कलेक्टर साहब… इस मासूम को दिव्यांग नहीं मानते आपके कर्मचारी-अधिकारी…

    झल्लार के पास बोथिया गांव के संतोष कासदे की 14 वर्षीय बेटी दीपिका बचपन से दिव्यांग है। उसकी स्थिति इतनी खराब है कि वह अन्य कोई काम करना तो दूर दैनिक क्रियाएं तक कर पाने में सक्षम नहीं है। इसके बावजूद आज तक उसे शासन की किसी योजना का लाभ नहीं मिला। उसके पिता ने ग्राम पंचायत के दर्जनों चक्कर काटे और कई शिविरों में उसे लेकर गए, लेकिन आज तक न तो उसका नि:शक्तता प्रमाण पत्र बन पाया और न ही पेंशन का लाभ मिल सका। उसकी दिव्यांगता के चलते ही उसे अकेले नहीं छोड़ा जा सकता। लिहाजा, माता-पिता जहां भी मजदूरी करने जाते हैं, वहां उसे साथ ले जाना होता है।

    कलेक्टर बैंस ने दिए अफसरों को यह निर्देश

    सोमवार को ‘बैतूल अपडेट’ न्यूज वेबसाइट ने ‘कलेक्टर साहब… इस मासूम को दिव्यांग नहीं मानते कर्मचारी-अधिकारी…’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। यह मामला संज्ञान में आते ही कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस ने इसे पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता से लिया। उन्होंने पंचायत एवं सामाजिक न्याय विभाग के उप संचालक संजीव श्रीवास्तव को तत्काल समुचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने यहां तक हिदायत दी कि बालिका यदि यहां तक आने में सक्षम नहीं है तो मेडिकल बोर्ड खुद उसके घर पहुंचे और परीक्षण कर प्रमाण पत्र जारी करें। इसके साथ ही जल्द से जल्द बालिका को सभी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएं।

    वाहन की व्यवस्था कर लाया गया जिला अस्पताल
    इस पर उप संचालक श्री श्रीवास्तव भी कल से ही इस मामले को लेकर सक्रिय थे। वे बोथिया सरपंच दिनेश, सचिव और रोजगार सहायक के माध्यम से दीपिका के परिजनों से सतत संपर्क में थे। उन्होंने मंगलवार को बालिका को बैतूल जिला अस्पताल बुलवााया। सचिव द्वारा निजी वाहन की व्यवस्था कर बालिका और परिजनों को बैतूल लाया गया। यहां मेडिकल बोर्ड से परीक्षण करवाया गया। इस दौरान उप संचालक श्री श्रीवास्तव भी अस्पताल पहुंचे और परिजनों से जानकारी प्राप्त की। मेडिकल बोर्ड द्वारा परीक्षण किए जाने के पश्चात दीपिका के परिजनों को नि:शक्तता प्रमाण पत्र उपलब्ध करा दिया गया।

    फरवरी माह से बैंक खाते में पहुंचने लगेगी पेंशन
    इस संबंध में उप संचालक श्री श्रीवास्तव ने ‘बैतूल अपडेट’ से चर्चा में बताया कि बालिका का नि:शक्तता प्रमाण पत्र आज बनवा लिया गया है। कल शाम तक हर हाल में पेंशन प्रकरण भी स्वीकृत हो जाएगा। फरवरी माह से उसके खाते में 1200 रुपये मासिक पेंशन पहुंचना शुरू हो जाएगी। आगामी 20 जनवरी को उसे व्हील चेयर भी प्रदान की जाएगी। इसके अलावा भी सभी योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाएगा।

    जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने भी लिया संज्ञान
    इस मामले का जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बैतूल के अध्यक्ष अफसर जावेद खान और सचिव श्रीमती दीपिका मालवीय ने भी संज्ञान लिया है। प्राधिकरण की सचिव श्रीमती मालवीय ने सामाजिक न्याय एवं नि:शक्त कल्याण विभाग के उप संचालक संजीव श्रीवास्तव से मामले की जानकारी लेकर जल्द से जल्द योजनाओं का लाभ दिलवाने के निर्देश दिए। आज जब दीपिका को जिला अस्पताल में मेडिकल बोर्ड के समक्ष लाया गया तो प्राधिकरण के पैरालीगल वालेंटियर अमित सक्सेना पूरे समय मौजूद रहे। दीपिका का नि:शक्त प्रमाण पत्र तैयार करने में उन्होंने पूरी सहायता की। वालेंटियर श्री सक्सेना ने बताया कि प्रमाण पत्र बनने में जब थोड़ा विलंब हो रहा था तो स्वयं सचिव श्रीमती मालवीय ने फोन कर निर्देश दिए। बालिका को योजनाओं का लाभ दिलाने प्राधिकरण द्वारा भी पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।

  • उत्तम मालवीय

    मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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