Coal Discovery in Katni: एमपी यह जिला उगलेगा काला सोना, नदी के किनारे नजर आई मोटी परतें, GSI ने जाँच को भेजे सैंपल
Coal Discovery in Katni: मध्य प्रदेश के कटनी जिले की जमीन एक बार फिर अपनी खनिज संपदा को लेकर चर्चा में है। पहले सोने की मौजूदगी के संकेतों ने सुर्खियां बटोरीं और अब कोयले के बड़े भंडार की संभावना ने न सिर्फ जिले बल्कि पूरे राज्य का ध्यान खींच लिया है। बड़वारा जनपद क्षेत्र में नदी किनारे कोयले की परतें सामने आने के बाद ग्रामीणों से लेकर प्रशासन तक में हलचल तेज हो गई है। यदि लैब जांच में रिपोर्ट अनुकूल आती है, तो कटनी खनिज मानचित्र पर एक नई पहचान बना सकता है।
नदी किनारे सामने आई कोयले की परतें
कटनी जिला अब तक मुख्य रूप से मार्बल खनन के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन बीते कुछ समय में यहां खनिज संभावनाओं का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। बड़वारा जनपद की लोहरवारा ग्राम पंचायत के अंतर्गत सलैया केवट क्षेत्र में उमड़ार नदी के किनारे रेत खनन के दौरान कोयले की मोटी परतें दिखाई दीं। नदी के कटाव के कारण जमीन की सतह पर काले रंग की परत स्पष्ट नजर आई, जिससे स्थानीय लोगों को किसी बड़े भंडार की आशंका हुई।

प्रशासन और खनिज विभाग हुआ सतर्क
जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और खनिज विभाग सक्रिय हो गया। जबलपुर और कटनी से आई संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर क्षेत्र का निरीक्षण किया। शुरुआती जांच में कोयले की गुणवत्ता बेहतर बताई जा रही है। टीम ने अलग-अलग स्थानों से नमूने एकत्र किए, ताकि भंडार की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। इस प्रक्रिया के बाद सैंपल को प्रयोगशाला भेजा गया है, जहां इसकी गुणवत्ता और उपयोगिता की पुष्टि की जाएगी।
लैब रिपोर्ट पर टिकी आगे की कार्रवाई
खनिज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल सभी की निगाहें लैब रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। रिपोर्ट सकारात्मक आने की स्थिति में अगले चरण में ड्रिलिंग कराई जाएगी, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कोयले का भंडार कितनी गहराई और कितने क्षेत्र में फैला हुआ है। इसके बाद यह भी जांचा जाएगा कि यहां आर्थिक रूप से खनन संभव है या नहीं। यदि सभी पहलुओं पर स्थिति अनुकूल पाई जाती है, तो क्षेत्र में नई कोयला खदान की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।
ग्रामीणों में खुशी, रोजगार की जगी उम्मीद
कोयले की मौजूदगी की खबर से आसपास के गांवों में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि यदि खदान विकसित होती है, तो इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सलैया केवट के ग्रामीणों का कहना है कि अब तक उनकी आजीविका मुख्य रूप से खेती और मजदूरी पर निर्भर थी। खनन कार्य शुरू होने से युवाओं को गांव के पास ही काम मिल सकेगा, जिससे पलायन भी रुकेगा। साथ ही क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी।
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खनन के साथ पर्यावरण का भी रखें ध्यान
ग्रामीणों और प्रशासन दोनों की ओर से यह बात सामने आ रही है कि खनन के साथ पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखा जाना जरूरी है। लोगों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन इसके साथ नदी, जंगल और आसपास के पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे, इस पर भी खास नजर रखी जानी चाहिए।
अधिकारियों ने दी स्थिति की जानकारी
खनिज अधिकारी डॉ. रत्नेश दीक्षित ने बताया कि शनिवार को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने करीब दो घंटे तक क्षेत्र का सर्वे किया। इस दौरान कोयले के साथ-साथ बड़ेरा क्षेत्र से आयरन ओर के नमूने भी लिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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कटनी बन सकता है खनिज हॉटस्पॉट
यदि सर्वे और जांच में कोयले का बड़ा और उपयोगी भंडार साबित होता है, तो कटनी जिले को इससे बड़ा लाभ मिल सकता है। राज्य को राजस्व बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पहले सोने और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के संकेतों के बाद अब कोयले की संभावना ने कटनी को एक संभावित खनिज केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।
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