Sugar Price Drop: त्योहारों से पहले सस्ती होगी शक्कर, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, इस फैसले से गिरेंगे चीनी के दाम
Sugar Price Drop: Sugar to become cheaper ahead of the festive season; government takes a major step—this decision will bring down sugar prices.

Sugar Price Drop: आने वाले त्योहारों से ठीक पहले शक्कर की बढ़ती कीमतों ने आम जनता की रसोई का खर्च काफी बढ़ा दिया था। हालांकि, अब आम उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर निकलकर आ रही है। केंद्र सरकार ने त्योहारों के दौरान मिठास के दाम पर अंकुश लगाने और स्थानीय बाजारों में आपूर्ति मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, शक्कर रिफाइनरियां अब निर्यात के उद्देश्य से रखी गई करीब साढ़े तीन लाख टन शक्कर को सीधे देश के बाजारों में उपलब्ध कराने की तैयारी में हैं। अनुमान है कि यह विशाल खेप एक सप्ताह के भीतर स्थानीय मंडियों में पहुंच जाएगी, जो पूरे देश की लगभग पांच दिनों की खपत के बराबर है। इस कदम से कीमतों में बड़ी नरमी देखने को मिल सकती है।
उच्चतम स्तर से नीचे आए दाम
हाल ही में देश की मिलों में थोक शक्कर के भाव 67 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर को छू गए थे। हालांकि, बीते दिनों सरकार द्वारा 10 लाख टन बिना सीमा शुल्क शक्कर आयात करने की अनुमति देने के बाद बाजार में थोड़ी राहत देखने को मिली। सहकारिता शक्कर कारखाना संघ के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सरकारी फैसले के तुरंत बाद दाम तेजी से गिरकर 54 से 55 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गए हैं।
आपूर्ति बढ़ने से मिलेगी फौरन राहत
बाजार विशेषज्ञों का आकलन है कि प्रशासनिक फैसलों के कारण आने वाले दिनों में कीमतें और गिर सकती हैं। हालांकि विदेश से शक्कर आने में थोड़ा समय अवश्य लगेगा, लेकिन निर्यात वाली शक्कर को तुरंत घरेलू मंडियों में भेजने से अचानक पैदा हुई कमी की समस्या तत्काल हल हो जाएगी।
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क्या वास्तव में पैदा हो गई थी कमी?
कीमतों में अचानक उछाल का मुख्य कारण सट्टेबाजी और बड़े पैमाने पर की गई जमाखोरी को माना जा रहा है। उद्योग संगठन के शीर्ष अधिकारियों ने साफ किया है कि देश में उत्पादन का कोई बड़ा संकट नहीं है। उन्होंने बताया कि जुलाई महीने में जो शक्कर 48 रुपये प्रति किलो मिल रही थी, उसकी कीमत अगस्त में बढ़कर 55-56 रुपये हो गई, यानी इसमें लगभग 16 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल में बीमारी और महाराष्ट्र में पेराई चक्र के कारण उत्पादन में मामूली कमी जरूर आई, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भाव बढ़े। लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान बड़े व्यापारियों द्वारा अग्रिम रूप से की गई जमाखोरी ने पहुंचाया, जिससे बाजार में बनावटी किल्लत पैदा हो गई थी।
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सुरक्षित स्टॉक मौजूद, चिंता की बात नहीं
वर्तमान सत्र के लिए देश में कुल शुद्ध शक्कर उत्पादन लगभग 279 लाख टन रहने की उम्मीद है। ईंधन में इस्तेमाल होने वाली शक्कर की मात्रा घटाने के बाद भी देश के पास करीब 35 लाख टन का अधिशेष स्टॉक सुरक्षित रहेगा, जो देश की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है। सरकार की इस सख्ती से जमाखोरों पर लगाम लगेगी और आगामी त्योहारों के सीजन में आम लोगों को सस्ती शक्कर मिल सकेगी।
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