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Betul Election News : कांग्रेस की सरकार बनाओ और अपना सम्मान वापस पाओ, जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में बोले निलय विनोद डागा

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Betul Election News : कांग्रेस की सरकार बनाओ और अपना सम्मान वापस पाओ, जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में बोले निलय विनोद डागा
Betul Election News : कांग्रेस की सरकार बनाओ और अपना सम्मान वापस पाओ, जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में बोले निलय विनोद डागा

Betul Election News : बैतूल। बैतूल विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी निलय विनोद डागा ने सोमवार सुबह विधानसभा क्षेत्र के मांडवी, मूसाखेड़ी, बोरपानी ग्रामों में सघन जनसम्पर्क किया और नुक्कड़ सभाओं को सम्बोधित किया। ये सभी गाँव जनजातीय बाहुल्य ग्राम हैं, जहां निलय ने भाजपा राज में आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारों के मुद्दों पर बात की और आदिवासियों को भरोसा दिलाया कि अगर मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो भाजपा राज में आदिवासियों का खोया हुआ सम्मान कांग्रेस वापस लाएगी। मेरा वादा है कि आदिवासी समाज हर हाल में सम्मान का जीवन जियगा ये मेरा वचन भी है।

Betul Election News : कांग्रेस की सरकार बनाओ और अपना सम्मान वापस पाओ, जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में बोले निलय विनोद डागा
Betul Election News : कांग्रेस की सरकार बनाओ और अपना सम्मान वापस पाओ, जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में बोले निलय विनोद डागा

कांग्रेस चुंनाव कार्यालय से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि निलय डागा ने मध्यप्रदेश सहित मणिपुर में आदिवासियों पर जारी अत्याचार की घटनाओं का भी उल्लेख किया। निलय ने आदिवासी जनों को बताया कि मध्यप्रदेश में भाजपा के नेता अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों पर पेशाब करते हैं। आदिवासी दलित महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं लेकिन, भाजपा की चुप्पी ये साबित करती है कि उन्हें आदिवासियों की कितनी चिंता है। मणिपुर राज्य में भी भाजपा की सरकार है और वहां आदिवासी महिला को भीड़ ने निर्वस्त्र करके घुमाया।

Betul Election News : कांग्रेस की सरकार बनाओ और अपना सम्मान वापस पाओ, जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में बोले निलय विनोद डागा
Betul Election News : कांग्रेस की सरकार बनाओ और अपना सम्मान वापस पाओ, जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में बोले निलय विनोद डागा

आदिवासी बहन-बेटियों के साथ बलात्कार की दर्जनों घटनाए हुईं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिपुर के मुख्यमंत्री को नहीं हटाया क्योंकि सरकार भाजपा की है। मध्यप्रदेश में आदिवासियों, अनुसूचित जाति पर अत्याचार की घटनाए रोज होती हैं लेकिन दूसरी तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आदिवासियों दलितों को बातों में उलझाकर उनके साथ अन्याय होता देख रहे हैं। निलय डागा ने आदिवासी और अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाताओं से वादा किया कि अगर मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो आदिवासियों और दलितों को उनका सम्मान वापस मिलेगा इसके लिए उन्होंने कांग्रेस को जिताने की अपील भी की । निलय डागा ने यहां नारा दिया कि अगर आदिवासियों का सम्मान वापस पाना है तो कांग्रेस को जिताना है ।

भाजपा ने छीन लिया बुढ़ापे का सुकून, कम पेंशन में दवाई का खर्च भी नहीं निकल पा रहा: नारायण धोटे

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बैतूल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग विभाग के जिला अध्यक्ष नारायण धोटे ने भाजपा सरकार को कर्मचारी विरोधी सरकार करार दिया है। श्री धोटे के अनुसार भाजपा सरकार के सबसे बड़े विश्वासघात के शिकार वे सरकारी कर्मचारी हुए हैं जिन्होंने सालों अपने अथक प्रयासों से प्रशासनिक कामकाज और व्यवस्था को संभाल रखा था। लेकिन भाजपा ने इन कर्मचारियों को उनकी मेहनत का ऐसा सिला दिया कि यह सरकारी कर्मचारी मर मर कर जीने पर मजबूर हैं। ओल्ड स्कीम पेंशन बन्द कर भाजपा ने सरकारी सेवा से रिटायर होने वाले कर्मचारियों के बुढापे का सहारा छीन लिया है।

हालात यह हैं कि इन कर्मचारियों को जितनी पेंशन दी जा रही है। वह पेंशन ऊंट के मुह में जीरा जैसी साबित हो रही है। लेकिन इन पेंशनरों की आज कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। साफ है कि पिछले 18 सालों में भाजपा ने प्रदेश के हर वर्ग का खून चूस चूस कर अपनी खेती तैयार कर ली ओर उन पेंशनरों को भी नहीं छोड़ा जिन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर शासन चलाने में भाजपा नेताओं की मदद की।

श्री धोटे ने अपने बयान में कहा कि शिक्षा विभाग वर्ग 1 से रिटायर हुई एक शिक्षिका को वर्ष 1999 में वर्ग एक मे शिक्षिका का पद दिया गया था। ओल्ड स्कीम पेंशन बन्द होने के बाद वर्ष 2018 में उन्हें रिटायर करने के बाद मात्र 1197 रुपये मासिक पेंशन मिल रही है। आज हालात ये हैं कि, इतनी कम पेंशन में मकान का किराया दें या बीमारी का खर्च निकालें, या फिर अपना और अपने परिवार का पेट भरें यह सबसे बड़ी परेशानी झेलनी पड़ रही है। अगर ओल्ड पेंशन स्कीम भाजपा बन्द नहीं करती तो आज हालात सुकून भरे होते। ठीक है आज पारिवारिक हालात ठीक हैं।लेकिन कई कर्मचारी विपरीत हालातों से भी गुजर रहे हैं। लेकिन ऐसा नहीं होता तो आज आत्महत्या करने के अलावा कोई दूसरा चारा नही होता।

श्री धोटे ने अपने बयान में बताया कि ओल्ड स्कीम पेंशन बन्द कर भाजपा ने कर्मचारियों को जिंदगी भर का दर्द दिया है यह भूलाया नहीं जा सकता। भाजपा सरकार ने कर्मचारियों के बीच ही भेदभाव उतपन्न कर दिया। श्री धोटे ने कहा कि, एक शिक्षिका ऐसी भी है, जिस दिन उनका रिटायरमेन्ट हुआ उसी दिन उनके साथ दो अन्य कर्मचारियों को भी सेवा मुक्ति दी गयी। ये दोनों कर्मचारियों की भर्ती 1994 के पूर्व की थी। रिटायरमेंट के बाद यह दो कर्मचारी प्रतिमाह 34 हजार रुपये पेंशन पा रहे हैं और और वहीं दूसरी एक शिक्षिका को मात्र 3400 रुपये पेंशन दी जा रही है।

आज ऐसे सेवा निवर्त्त कर्मचारी किस कदर अभाव में जीवन जी रहे हैं इसका अंदाजा भाजपा सरकार सिर्फ इसलिए नहीं लगा पा रही है कि उन्हें 5 साल जन सेवा का नाटक करने के बाद लाखों रुपये पेंशन सहित अन्य सुविधाएं मिलने वाली है। मेरा सवाल है भाजपा के मुख्यमंत्री से की जब सरकार में अल्प समय के लिए बैठने वालों को इतनी पेंशन दी जा सकती है तो सेवा निवर्त्त पेंशनरों को मरने के लिए क्यों छोड़ा जा रहा है। कानून और प्रावधान सभी के लिए एक होने चाहिए।

सिर्फ कांग्रेस ने ही समझा कर्मचारियों का दर्द

श्री धोटे ने अपने बयान में कहा कि कर्मचारियों द्वारा ओल्ड पेंशन लागू किये जाने की हर सम्भव कोशिश की गई लेकिन भाजपा ने इन कर्मचारियों के इस महत्वपूर्ण आग्रह को हमेशा नजरअंदाज किया। केवल कांग्रेस ने ही इस दर्द की समझा इसका उदाहरण भी है।देश में अन्य राज्यो में काबिज कांग्रेस की सरकार ने ओल्ड पेंशन लागू की है।

राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, पंजाब में ओल्ड पेंशन कांग्रेस ने लागू की है और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने तो कांग्रेस की सरकार बनते ही 2004 से बंद पेंशन को 2023 में लागू किया है। अब हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2004 से 2023 तक जो कर्मचारी रिटायर्ड हो गए थे जिन्हें 1700 रुपए पेंशन मिल रही थी अब उन्हें 35000 हजार रुपए पेंशन मिलने लगी है। हमारे सेवा निवृत्त कर्मचारी निराश ना हों कांग्रेस ने यह वचन दिया है कि सरकार बनने के बाद ओल्ड पेंशन स्कीम पुन: लागू की जाएगी और यह वचन हम निभाकर रहेंगे। इसके लिए हमें कांग्रेस के हाथ मजबूत कर बैतूल विधान सभी से कांग्रेस प्रत्याशी निलय विनोद डागा को अपना आशीर्वाद देकर विजय बनाना है।

विकास के दावे और वादे करने वाले हेमंत खण्डेलवाल बताएं कि 5 साल में क्यों नहीं बना खेड़ला किला पहुंच मार्ग

 

विकास के दावे और वादे करने वाले हेमंत खण्डेलवाल बताएं कि 5 साल में क्यों नहीं बना खेड़ला किला पहुंच मार्ग

विकास के दावे और वादे करने वाले हेमंत खण्डेलवाल बताएं कि 5 साल में क्यों नहीं बना खेड़ला किला पहुंच मार्ग

बैतूल। कांग्रेस चुंनाव कार्यालय से जारी विज्ञप्ति के अनुसार विकास के दावे और वादे करने वाले पूर्व विधायक हेमंत खण्डेलवाल से कांग्रेस कार्यकर्ता मोहन टिकमे ने सवाल किया है कि वे बताएं कि अपनी विधायकीय के कार्यकाल में उन्होंने तीन आम से खेड़ला किला की ओर जाने वाले जिस मार्ग निर्माण का भूमिपूजन किया था वो आज 5 साल बीत जाने के बाद भी आखिर क्यों नहीं बन पाया है। हेमंत खण्डेलवाल ये भी बताएं कि सोनाघाटी से छिंदवाड़ा सीमा तक बनाये गए मार्ग में किसानों को आज तक मुआवजा क्यों नहीं दिया गया है।

श्री टिकमे ने अपने बयान में सीधा आरोप लगाया है कि मार्ग निर्माण ओर मुआवजे को लेकर ग्रामीणों और किसानों को धोखे में रखा गया। 20 लाख रुपये की लागत से तीन आम चौक से खेड़ला किला तक यह मार्ग डेढ़ किलोमीटर का बनाया जाना था। 30 सितंबर 2018 को इस मार्ग का भूमिपूजन सांसद ज्योति धुर्वे, विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने किया था। लेकिन चुंनाव हारने के बाद उन्होंने ये नहीं सोचा कि जिस मार्ग का भूमिपूजन किया गया है। उसके और जनता किस हाल में है। और वहीं दूसरी तरफ ये कहा जा रहा है कि, विधायक नहीं रहते भी विकास कार्य पर पूरा ध्यान दिया गया। खण्डेलवाल ये बताएं कि जब विकास करवा रहे थे तो ये काम क्यों नहीं करवा पाए। आज भी यह मार्ग उबड़ खाबड़ स्थिति में पड़ा हुआ है और ग्रामीण जनों को इसी मार्ग से आना जाना करना पड़ रहा है।

किसानों की जमीन पर बना दी सड़क नहीं दिया मुआवजा

मोहन टिकमे ने जारी किए बयान में बताया कि, सोनाघाटी से छिंदवाड़ा जिले की सीमा तक बनाये गए मार्ग निर्माण में भी किसानों के साथ धोखा किया गया। क्षेत्र के कई किसानों की कृषि भूमि लेकर उस पर सड़क बना दी गयी। किसानों को मुआवजा दिए जाने के लिए कहा भी गया था। लेकिन सड़क बनने के बाद किसानों को ये कहा गया कि केंद्रीय निधि से बनाई गयी इस सड़क के निर्माण में मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है। सीधे सीधे किसानों के साथ धोखाधड़ी की गई। श्री टिकमे का कहना है कि क्षेत्र के ग्रामीण और पीढ़ित किसान इस वादा खिलाफी को भूले नहीं है। अब समय आ गया है इसका जवाब देने का।

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