MP Rural Road Development: एमपी में बनेंगी 30900 किमी लंबी सड़कें, 878 बस्तियों को मिलेगा लाभ

MP Rural Road Development: मध्यप्रदेश में छोटे-छोटे गांवों और बस्तियों को भी मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए प्रयास जारी है। इसके लिए मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना के तहत अब तक लगभग 30 हजार 900 किलोमीटर सड़कों की स्वीकृति दी जा चुकी है। इस परियोजना पर कुल 21 हजार 630 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

सड़कों के विस्तार को लेकर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण का काम दिसंबर 2024 से शुरू किया गया है। इस चरण में 868 सड़कों का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। इनकी कुल लंबाई 1849 किलोमीटर तय की गई है और इन पर 1545 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इन मार्गों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्र की लगभग 878 बस्तियों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।

पहले की सड़कों की बेहतर रहे स्थिति

इसी तरह प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पूर्व में बनी सड़कों की स्थिति बेहतर बनाए रखने के भी पूरे प्रयास हो रहे हैं। इसी तारतम्य में पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण समिति की 26वीं बैठक में अधिकारियों की बैठक ली।

सड़कों की देखभाल में न हो लापरवाही

मंत्री श्री पटेल ने साफ कहा कि गांव-गांव को जोड़ने वाली इन सड़कों की देखभाल में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिया कि योजना के प्रथम चरण में बनाई गई सड़कों पर बने रपटों में पूरे साल आवाजाही सुनिश्चित रहे।

नई तकनीकों के उपयोग पर चर्चा

इस बैठक में ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी, मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दीपक आर्य सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में सड़कों के रखरखाव के साथ ही नई तकनीकों के उपयोग और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी चर्चा की गई।

इंजीनियरों को दें लगातार प्रशिक्षण

मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि विभाग के इंजीनियरों को गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण के लिए लगातार प्रशिक्षण दिया जाए। इसके लिए मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क अकादमी में उन्हें नवीन तकनीकों से अवगत कराना जरूरी है, जिससे सड़कें ज्यादा टिकाऊ और मजबूत बन सकें।

अभी तक इतनी सड़कों का निर्माण

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बन चुकी सड़कों के संरक्षण और मरम्मत की जिम्मेदारी अब प्राधिकरण के पास ही है। इस योजना के जरिए अब तक 88 हजार 517 किलोमीटर लंबाई की 25 हजार 331 सड़कें निर्मित की जा चुकी हैं। इनमें से 66 हजार 292 किलोमीटर सड़क का नवीनीकरण बिटुमिन से किया गया है।

वेस्ट प्लास्टिक तकनीक से नवीनीकरण

खास बात यह है कि लगभग 15 हजार 900 किलोमीटर सड़क के नवीनीकरण में वेस्ट प्लास्टिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल रही है।

महिलाओं को भी मिल रहा काम

सड़क संरक्षण के काम में महिला शक्ति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बताया गया कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 14 जिलों के 114 मार्गों का रखरखाव किया जा रहा है और इस कार्य में 115 महिला समूह सक्रिय हैं, जिनमें कुल 1270 महिलाएं कार्यरत हैं।

प्राथमिकता से किया जाएं उन्नयन

मंत्री पटेल ने यह भी कहा कि कई जगहों पर भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सड़कें जल्दी खराब हो जाती हैं, इसलिए आवश्यक है कि ऐसी सड़कों का उन्नयन प्राथमिकता पर किया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण जनता को सुरक्षित और निर्बाध परिवहन व्यवस्था मिले और गांवों की प्रगति में सड़कें महत्वपूर्ण आधार साबित हों।

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