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Ladli Laxmi Yojana: लाड़ली लक्ष्मी योजना ने बदली तस्वीर: माता-पिता का साया उठने के बाद भी कॉलेज में पढ़ रही है अंशिता

Ladli Laxmi Yojana: Ladli Laxmi Yojana has transformed lives—Anshita is pursuing college studies even after losing her parents.

Ladli Laxmi Yojana: लाड़ली लक्ष्मी योजना ने बदली तस्वीर: माता-पिता का साया उठने के बाद भी कॉलेज में पढ़ रही है अंशिता
Ladli Laxmi Yojana: लाड़ली लक्ष्मी योजना ने बदली तस्वीर: माता-पिता का साया उठने के बाद भी कॉलेज में पढ़ रही है अंशिता

Ladli Laxmi Yojana: मध्य प्रदेश शासन की दूरदर्शी लाड़ली लक्ष्मी योजना बेटियों की शिक्षा, उनके भीतर आत्मविश्वास जगाने और भविष्य को सुरक्षित करने में मजबूत भूमिका निभा रही है। सागर जिले के सेक्टर पटोवा के अंतर्गत आने वाले बंडा परियोजना के धबोली आंगनवाड़ी केंद्र से जुड़ी बालिका अंशिता लोधी का जीवन इसका एक जीवंत और प्रेरणादायी उदाहरण है। बहुत कम उम्र में सिर से माता-पिता का साया उठ जाने के कारण इस बालिका का शुरुआती सफर बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच गुजरा था। आर्थिक तंगी ने उसकी पढ़ाई और सुनहरे भविष्य पर गंभीर संकट खड़े कर दिए थे, लेकिन इस योजना से मिले आर्थिक संबल ने उसके संघर्षों को एक नई उड़ान दे दी। आज अंशिता कॉलेज में नियमित रूप से अपनी पढ़ाई पूरी कर रही है और अपने सपनों को साकार करने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रही है।

बचपन के शुरुआती पड़ाव पर आईं मुश्किलें

वर्ष 2006 में एक अत्यंत गरीब परिवार में जन्मी अंशिता ने जीवन की शुरुआत से ही कड़े संघर्षों का सामना किया। जब वह बहुत छोटी थी, तभी उसकी मां का देहांत हो गया और कुछ समय पश्चात पिता भी दुनिया से विदा हो गए। ऐसे संकट के समय उसके नाना-नानियों और मामा ने उसकी देखभाल का जिम्मा उठाया। परिवार के पास आय के सीमित साधन होने के कारण उसकी स्कूली शिक्षा जारी रखना और भविष्य को सुरक्षित करना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया था। हालांकि परिवार चाहता था कि वह शिक्षित होकर अपने पैरों पर खड़ी हो, लेकिन पैसों की कमी हर कदम पर बाधा बन रही थी।

Ladli Laxmi Yojana: लाड़ली लक्ष्मी योजना ने बदली तस्वीर: माता-पिता का साया उठने के बाद भी कॉलेज में पढ़ रही है अंशिता

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मदद से बदली तस्वीर

इसी दौरान ग्रामीण क्षेत्र में इस कल्याणकारी योजना के तहत सर्वे का अभियान चलाया जा रहा था। सर्वे के वक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गीता विश्वकर्मा तक अंशिता और उसके परिवार के हालातों की जानकारी पहुंची। उन्होंने परिजनों को बालिका की शिक्षा के महत्व और सरकार की मदद के बारे में विस्तार से बताया। उस आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने सभी जरूरी दस्तावेज तैयार कराने में पूरा सहयोग किया और लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत आवेदन की प्रक्रिया पूरी करवाई।

विभिन्न कक्षाओं में मिला आर्थिक संबल

इस योजना के माध्यम से बालिका को स्कूली शिक्षा के अलग-अलग चरणों में छात्रवृत्ति के रूप में आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। कक्षा छठवीं में छह हजार, नौवीं कक्षा में चार हजार तथा ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षाओं में छह-छह हजार रुपए की छात्रवृत्ति मिलने से उसकी पढ़ाई आसान हो गई। इस वित्तीय सहायता ने परिवार का मनोबल बढ़ाया और यह विश्वास मजबूत किया कि बेटी की शिक्षा कोई बोझ नहीं, बल्कि उसके उज्ज्वल भविष्य में किया गया सबसे बड़ा निवेश है। अंशिता ने भी विपरीत हालातों के बावजूद कभी हिम्मत नहीं हारी और अपनी लगन बनाए रखी।

उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ा कदम

बारहवीं की परीक्षा पास करने के बाद कॉलेज की पढ़ाई को लेकर परिजनों के मन में एक बार फिर चिंताएं घर करने लगीं। सीमित संसाधनों के चलते परिवार उसकी सुरक्षा और उच्च शिक्षा को लेकर असमंजस में था। ऐसे संवेदनशील वक्त में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने एक बार फिर परिजनों से संपर्क किया और उन्हें समझाया कि बालिका की पढ़ाई रोकना उसके भविष्य के अवसरों को सीमित करना होगा। इस सार्थक समझाइश का सकारात्मक असर हुआ और परिवार ने उसे कॉलेज में प्रवेश दिलाने का पक्का फैसला कर लिया। आज अंशिता उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने सपनों को नई ऊंचाई दे रही है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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