Maitri: फीमेल फर्स्ट कलेक्टिव के लेटेस्ट सेशन में मनोरंजन उद्योग की महिलाओं ने साझा किए अपने अनुभव
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Maitri: प्राइम वीडियो ने आज मैत्री: फीमेल फर्स्ट कलेक्टिव का लेटेस्ट सेशन जारी किया है। इसका पहला डिस्कशन चेन्नई में होस्ट किया गया। पिछले साल लॉन्च किया गया। यह कलेक्टिव कोशिश एक सुरक्षित जगह बनाने की है, जहां भारतीय मीडिया और मनोरंजन उद्योग की महिलाएं अपने अनुभवों, चुनौतियों और सफलताओं पर चर्चा करने के लिए एक साथ आ सकती हैं और पॉजिटिव बदलाव लाने के तरीके पर अपना नजरिया पेश कर सकती हैं।
इस सेशन में भारत के विभिन्न मनोरंजन उद्योगों की 8 प्रतिष्ठित महिलाएं शामिल थीं, जिनमें मालविका मोहनन, ऐश्वर्या राजेश और मधु जैसी कई भाषाओं में काम करने वाली अवॉर्ड विनिंग बेहतरीन एक्ट्रेस से लेकर क्रिएटर, राइटर, शो-रनर और प्रोड्यूसर रेशमा घटाला, राइटर और डायरेक्टर स्वाति रघुरामन, और सिनेमेटोग्राफर यामिनी यज्ञमूर्ति तक सब शामिल हुई, जिन्होंने कैमरे के पीछे अमिट छाप छोड़ी हैं। इसके अलावा अपर्णा पुरोहित, क्रिएटर- मैत्री और हेड ऑफ इंडिया ओरिजिनल्स, प्राइम वीडियो और मैत्री की क्रिएटर और क्यूरेटर और पोल्का डॉट्स लाइटबॉक्स की फाउंडर स्मृति किरण भी इसका हिस्सा बनीं।
मैत्री: फीमेल फर्स्ट कलेक्टिव का लेटेस्ट सेशन यहां देखें (Maitri)
इस सेशन के दौरान व्यक्तिगत कहानियों को साझा करते हुए पार्टिसिपेंट्स ने फिल्म इंडस्ट्री में मौजूदा जेंडर गतिशीलता, फीमेल प्रोफेशनल्स के सामने आने वाली चुनौतियों, जिनमें स्टीरियोटाइप, कलरिज्म, एजिजम और बहुत कुछ शामिल हैं, पर चर्चा की। इस दौरान महिलाओं ने गौर किया कि चाहे वे कैमरे के सामने काम करती हों या उसके पीछे, या चाहे वे प्रोडक्शन या कॉर्पोरेट रोल्स में काम करती हों, मुद्दे सभी के एक जैसे थे। इस बीच फेमिनिज्म और एम्पावरमेंट के वास्तविक सार को भी छुआ गया और वहां आई इन महिलाओं के लिए जेंडर इक्वलिटी का वास्तव में क्या मतलब है, ये भी बताया।
एक दिलचस्प बात जो सभी ने साझा की वह यह थी कि सच्ची समानता तब हासिल की जा सकती है जब इंडस्ट्री किसी खास रोल, नरेटिव या नौकरी को वुमेन-ओरिएंटेड या मेल-ओरिएंटेड के रूप में टैग करना बंद कर दे। ये सभी इस बात पर सहमत दिखाई दिए कि सदियों पुरानी कंडीशनिंग अक्सर महिलाओं की पर्सनल और प्रोफेशनल ग्रोथ क्षमता को रोकती है, और इसे केवल तभी बदला जा सकता है जब इसे किसी के घर और सोशल एनवायरनमेंट में आत्मसात किया जाए।
महिलाओं के बीच हुई इस बातचीत में उस अहम भूमिका पर भी रोशनी डाली गई जो स्ट्रीमिंग सर्विस, महिला प्रतिनिधित्व को बेहतर बनाने, अभिनेताओं के लिए उनकी उम्र, शरीर के आकार या त्वचा के रंग की परवाह किए बिना नए अवसर पैदा करने और रचनाकारों के लिए सभी तरह की अनूठी कहानियों को बताने में निभा रहा है।

इस पर अपर्णा पुरोहित, क्रिएटर- मैत्री एंड हेड ऑफ इंडिया ओरिजिनल्स, प्राइम वीडियो ने कहा, “समान प्रतिनिधित्व युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा लेने के लिए एक नई दुनिया खोलता है, जिससे प्रभावशाली पदों पर महिलाओं का होना और भी अहम हो जाता है, जहां वे नई आवाज़ों के लिए एक मंच प्रदान कर सकती हैं और अधिक महिलाओं के लिए रास्ते खोल सकती हैं। हालांकि, हम जानते हैं कि बदलाव एक ग्रैजुएल प्रोसेस है। इसलिए, हमारे लिए देश भर में इन चर्चाओं को जारी रखना जरूरी है, और हम चेन्नई में अपने पहले सेशन की मेजबानी करके रोमांचित हैं। भले ही यह केवल एक साल पुराना है, मैत्री बदलाव को सही दिशा में ले जाने में कामयाब रही है। यह देखकर खुशी होती है कि लोग अपनी परियोजनाएं लिखते या योजना बनाते समय विविधता, समानता और समावेशन के बारे में बातचीत करते हैं।”
इस तरह की बातचीत बार-बार होने की जरूरत के बारे में बात करते हुए, मैत्री की क्रिएटर और क्यूरेटर और पोल्का डॉट्स लाइटबॉक्स की फाउंडर स्मृति किरण ने कहा, “ऐसी जगहों की निश्चित ही जरूरत है जहां महिलाएं बिना किसी डर के अपनी कहानियां सुना सकें। ऐसा माहौल बनाना जो महिलाओं को बिना किसी जजमेंट के अपने अनुभव साझा करने की इजाजत दे, किसी भी बदलाव को सक्षम करने में पहला कदम है, चाहे वह उद्योग में हो या समाज में। यही कारण है कि हमें इस बातचीत को लगातार जारी रखना होगा। मैं खुश हूं कि मैत्री आज चेन्नई में है, कल वह भारत के दूसरे हिस्से में होगी। हम बातचीत और सहयोग के जरिए विभिन्न हिस्सों और राज्यों की महिलाओं को जोड़ना जारी रखेंगे।”
प्राइम वीडियो अपने कंटेंट और प्रोडक्शन्स के साथ-साथ क्रिएटिव कम्यूनिटी में अपने भागीदारों के साथ विविधता, समानता और समावेशन (डीईआई) को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह से कमिटेड है। मैत्री: फीमेल फर्स्ट कलेक्टिव के साथ, प्राइम वीडियो का मकसद मनोरंजन उद्योग में महिलाओं की अहम भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।



