ShreeMad Bhagwat Katha Live: चित्रगुप्त के सीसीटीवी कैमरे में सब दिख जाता है : कान्हा जी महाराज

ShreeMad Bhagwat Katha Live: जिला मुख्यालय के समीप ग्राम मलकापुर में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण के छठवे दिवस की कथा में श्री धाम वृंदावन से पधारे कथा प्रवक्ता कान्हा जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण की महारास लीला की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि सबसे पहले हमें यह समझना चाहिए कि रासलीला क्या है।
आज संसार में कुछ लोग रासलीला का नाम लेकर व्यंग एवं परिहास भी करते हैं। जिन गोपियों के साथ भगवान ने रासलीला कि यह गोपिया कौन थी। सही मायनों में गोपी का अर्थ क्या होता है कथा के दौरान कान्हा जी महाराज में गोपी शब्द पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जिन गोपियों के साथ भगवान ने महारास किया है वह गोपी कोई स्त्री या पुरुष नहीं है गोपी तो एक भाव है जिसकी प्रत्येक इंद्री एवं रोम रोम परमात्मा को समर्पित है। रात दिन ब्रह्मा के चिंतन में खोलने वालों को ही गोपी कहा जाता है महाराज श्री ने कहा कि आत्मा से परमात्मा का मिलन ही रास है।
परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण भाव को ही गोपी कहते हैं। जिसका रोम-रोम गोविंद के लिए तरसती, तड़पती व चिंतन करती है जो दिन-रात प्रभु की याद में खोई रहती है वही गोपी है। गोपियों के जीवन से हमें कृष्ण प्रेम की शिक्षा मिलती है। स्त्री एवं पुरुष दोनों में गोपी का भाव आ सकता है। जिस दिन हम गोपी बन जाएंगे भगवान हमारे हाथ थाम बहा पकड़कर महारास करेंगे।
पंचाध्यायी भागवत कथा का सार है…
श्रीमद्भागवत के हृदय स्थल रास पंचाध्यायी में कृष्ण मन, प्राण, आत्मा, वाणी और इंद्रियों से रमण करते हैं। नाना प्रकार के रसों का प्रवाह जहां एकत्र हो उसे रास कहते हैं। आगे कहा कि जिस मनुष्य के जीवन में आहार-विहार और विचार संयमित होगा उसके जीवन में सुख ही सुख होगा साथ ही जो मनुष्य संस्कार, संस्कृति और सनातन की परंपरा में रहेगा उस व्यक्ति का जीवन दीर्घकालीन बना रहेगा।
जहां कोई नहीं देखता ऐसा लगे तो वहां भी हमें कोई देख रहा है इसीलिए धर्मोंसित कार्य करना चाहिए चित्रगुप्त का सीसीटीवी मनुष्य के कर्मों को देखता रहता है। आज कल की दुनिया में घर की दीवार पर सामने सुस्वागतम नहीं लिखा होता। कुत्तों से सावधान लिखा रहता है जैसे मानो घर में कुत्ते ही रह रहे होंगे।
कथा में वृंदावन से पधारे संगीत कलाकार भोले शास्त्री, किशन जी, मोहनलाल जी, राजा जी,शशांक, वशिष्ट, दीपक शास्त्री, विप्रदेव शास्त्री आदि ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
संध्या समय में गीतों के बीच श्री कृष्ण रुक्मणी का विवाह उत्सव सुंदर सुंदर झांकियों के बीच संपन्न हुआ। कथा के यजमान राकेश, नवनीत, अनित महतो ने श्री कृष्ण की बारात का स्वागत कर कथा का श्रवण कर रहे श्रद्धालुओं को गिरिराज का अन्नकूट वितरण किया।



