Lumpy Virus in MP: दामजीपुरा क्षेत्र में लंपी बीमारी ने पसारे पांव, कई पशुओं की मौत खबर, पशु चिकित्सक के अभाव में नहीं हो पा रहा इलाज

▪️ लवकेश मोरसे, दामजीपुरा
Lumpy Virus in MP : देश के कई राज्यों में पशुओं और मवेशियों में लंपी वायरस (lumpy virus) का कहर फैलता जा रहा है। यह एक तरह की स्किन की बीमारी है, जिसमें गाय या भैंस के स्किन पर गांठें नजर आने लगती है। यह वायरस इतनी तेजी से फैल रहा है कि राजस्थान, यूपी, बिहार और एमपी में हजारों की संख्या में पशुओं की मौत होने की खबर है। भीमपुर के दामजीपुरा (Damjipura Village in Bhimpur) क्षेत्र के दर्जनों गांव में भी लंपी वायरस (lumpy virus) ने तेज गति से अपने पैर पसार लिए हैं। इस क्षेत्र के कुछ गांव में पशुओं की मौत होने की खबर भी है।
अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा पशु चिकित्सालय
दामजीपुरा में कहने को पशु चिकित्सालय (animal Hospital) जरूर है, लेकिन डॉक्टर नहीं होने से इलाके के पशुओं का उपचार नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों को समझ ही नहीं आ रहा है कि इस बीमारी का कैसे उपचार करें। प्रशासन इलाके में फैली बीमारी से बेखबर है। ग्रामीण गांव के भगत के साथ बीमारी को काकड़ नकाने के अपने पुराने तरीके को अपना रहे हैं।
जानकारी के अनुसार मालूर और बोरकुण्ड में यह परंपरा आज ग्रामीणों द्वारा अपनाई गई है। आदिवासी बाहुल्य इस इलाके में खेती के बाद ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख व्यवसाय दूध बिक्री ही है। वहीं क्षेत्र में यादव समाज का तो मुख्य व्यवसाय पशुपालन करना ही है। जिनकी बड़ी संख्या दामजीपुरा क्षेत्र में है। ऐसे में लगातार फैल रहे लंपी वायरस ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
वर्तमान हालात को देखते हुए टीकाकरण का विशेष अभियान चलाकर वायरस को और अधिक फैलने से रोकने की जरूरत है। साथ ही पशु पालकों को लंपी वायरस को कैसे रोके और इलाज करवाने के लिए ग्रामीणों को जागरूक करने जागरूकता अभियान चलाने की भी जरूरत है।
इन गांवों के इतने पशुपालक हुए प्रभावित
बताया जाता है कि इस बीमारी से दामजीपुरा के शंकर आर्य, श्रीराम/पतिराम, बेहड़ा ताप्ती के लक्ष्मण/मकडु, नारायण/भैयालाल, भैयालाल/सुका, सूरज/महाजन, डोबनढाना-चीरा के झनक मरकाम, नितेश मरकाम, देवा कवडे, झिरना बटकी के सिंगु मर्सकोले, बिसनलाल, भुता/भारत, रतनलाल पंचम, रतु कजा, कालू मोती, गोबरबेल के शिवराम फागनु, नीमखेड़ा के मुन्ना लाल, बिरपुरा के नानू, मांगीलाल, किशोरीलाल, मोतीलाल/कादर, रोना सानू, रामप्रसाद, धामदेही के मांगीलाल/दामु, गोरेलाल/कालू, छत्तर सिंह/चुन्नी, शौकिलाल/भाऊ के मवेशी इस रोग की चपेट में आ चुके हैं। ये वे गांव और पशुपालकों के नाम हैं जिनकी जानकारी हमें लगी है, लेकिन क्षेत्र के लगभग हर गांव में पशु लंपी बीमारी से पीड़ित हैं और इलाज के अभाव में मौत हो रही है।
क्या है लंपी वायरस
साल 2019 में पहली बार भारत में इस वायरस की दस्तक हुई थी। यह त्वचा का एक रोग है, जिसमें स्किन में गांठदार या ढेलेदार दाने बन जाते हैं। इसे एलएसडीवी (LSDV) कहते हैं। यह एक जानवर से दूसरे में फैलता है। यह कैप्रीपॉक्स वायरस के कारण ही फैलता है।
लंपी वायरस के लक्षण
लंपी स्किन डिजीज (lumpy skin disease) के प्रमुख लक्षण पशु को बुखार आना, वजन में कमी, आंखों से पानी टपकना, लार बहना, शरीर पर दाने निकलना, दूध कम देना और भूख नहीं लगाना है। इसके साथ ही उसका शरीर दिन प्रतिदिन और खराब होते जाना आदि इस बीमारी के लक्षण हैं।



