आंखों देखा चमत्कार: मात्र तीन दिनों में ही जल बन जाती हैं इस नदी में मानव अस्थियां
भारत वर्ष में यूँ तो अनेक नदियां बहती हैं। जिनका अपने जल का विशेष प्रभाव और धार्मिक महत्व है। लेकिन मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में पवित्र नगरी मुलताई से उद्गमित होने वाली मां ताप्ती नदी का महत्व इन सबसे बढ़कर है।
इसकी वजह यही है कि इस नदी में कई ऐसे चमत्कार भी देखने को मिलते हैं जो कि अन्यंत्र दुर्लभ ही नहीं असम्भव भी हैं। यही कारण है कि इस नदी का देश की प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक नदियों में शुमार होता है और प्रमुख नदियों में इसकी गिनती होती है।

आदि गंगा कहे जाने वाली प्रातः स्मरणीय पुण्य सलिला सूर्य पुत्री माँ ताप्ती के बारे में जैसी कहावत है वैसा ही यथा नाम तथा गुण भी है। कुछ ऐसा ही अकाट्य सत्य हमने स्वयं अनुभव किया है देवी माँ ताप्ती का। ताप्ती जल में प्रवाहित मानव की अस्थियां मात्र तीन दिन में जल रूप में परिवर्तित हो गई। यह हमने स्वयं अपनी आंखों से देखा है।
इसकी वैज्ञानिक व्याख्या जो भी हो, लेकिन हम इसे चमत्कार से जोड़कर देखते हैं। यह चमत्कार अनेक लोगों ने अपनी आँखों से प्रयोग कर देखा है। जिनके भी परिजन अंतिम गति को प्राप्त होते हैं, ताप्ती नदी में उसका अंतिम संस्कार हुआ हो या फिर शहरों के मोक्षधाम में, तीन दिन बाद मृतक की अस्थियां विधिवत ताप्ती जल में प्रवाहित की जाती है।

यह हड्डियां मात्र तीन दिनों में ही पानी में ऐसे घुल जाती है जेसे पानी में जाकर पानी हो गयी हो। जानकारों के मुताबिक माँ नर्मदा में मानव की अस्थियां बालू बन जाती हैं, उसी प्रकार माता गंगा में पत्थर और सूर्यपुत्री ताप्ती नदी में अस्थियां जल रूप हो जाती हैं।
कहा जाता है कि पूरे देश में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व में ताप्ती ही एक ऐसी नदी है जिसमें मानव की अस्थियां जल रूप में बदल जाती हैं। कहते हैं कि जैसे मानव की अस्थियां ताप्ती जल में विलीन हो जाती हैं वैसे ही उसके सम्पूर्ण पाप भी उसी के साथ घुल जाते हैं।
हमने प्रयोग के रूप में मवेशियों की कठोर अस्थियां भी ताप्ती जल में डालकर देखी। आश्चर्यजनक रूप से वे हड्डियां भी चंद दिनों में ही ताप्ती जल में पूरी तरह से घुल गई। इससे बड़ा चमत्कार और क्या हो सकता है। यही कारण है कि दूर-दूर से लोग अपने दिवंगत परिजनों की अस्थियां लेकर ताप्ती नदी में विसर्जित करने आते हैं।



