Plant Genome Savior: बैतूल के जनजातीय किसानों को मिलेगा 10 लाख का ‘प्लांट जीनोम सेवियर अवार्ड’, गड़मल फसल को मिली राष्ट्रीय पहचान
Plant Genome Savior: Tribal farmers in Betul to receive a ₹10 lakh 'Plant Genome Savior Award'; 'Gadmal' crop gains national recognition.

Plant Genome Savior: बैतूल। जिले के भीमपुर विकासखंड के जनजातीय गड़मल उत्पादक किसानों ने पारंपरिक कृषि ज्ञान और फसल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा जनजातीय गड़मल बीज संरक्षक एवं विपणन सहकारी समिति मर्यादित, दामजीपुरा (भीमपुर) को प्रतिष्ठित ‘प्लांट जीनोम सेवियर अवार्ड’ से सम्मानित किया जाएगा। इस सम्मान के साथ संस्था को गड़मल फसल के संरक्षण एवं खेती का रकबा बढ़ाने के लिए 10 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी प्रदान की जाएगी। कलेक्टर बैतूल डॉ सौरभ संजय सोनवणे ने इस उपलब्धि के लिए उत्पादक किसानों को बधाई दी है।
गड़मल एक पारंपरिक दलहनी फसल है, जिसकी खेती बैतूल जिले के भीमपुर विकासखंड के किसानों द्वारा कई वर्षों से की जा रही है। इस पारंपरिक फसल के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, बैतूल द्वारा वर्ष 2020 से निरंतर कार्य किया जा रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र, बैतूल के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस.के. तिवारी ने बताया कि केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा गड़मल की इस पारंपरिक फसल के संरक्षण के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के अंतर्गत राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, नई दिल्ली को बीज एवं फसल के नमूने उपलब्ध कराए गए थे। कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग से भीमपुर क्षेत्र के जनजातीय किसानों के समूह ने गड़मल के संरक्षण और उसके उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। किसानों के इसी सामूहिक प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।
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राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, नई दिल्ली के 22वें स्थापना दिवस के अवसर पर 12 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में भारत के प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा द्वारा संस्था को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया जाएगा। किसानों के उत्कृष्ट कार्य, पारंपरिक कृषि ज्ञान और नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह सम्मान महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
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गड़मल जैसी पारंपरिक फसल के संरक्षण, उत्पादन एवं विपणन को बढ़ावा देने में कृषि विज्ञान केंद्र, बैतूल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। केंद्र द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन प्रदान कर उनके पारंपरिक कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, पहचान और बाजार तक पहुंच बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। यह उपलब्धि न केवल भीमपुर के जनजातीय किसानों, बल्कि पूरे बैतूल जिले के लिए गौरव का विषय है। इससे क्षेत्र के अन्य किसानों को भी अपनी पारंपरिक फसलों, स्थानीय जैव विविधता और पीढ़ियों से प्राप्त कृषि ज्ञान के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रेरणा मिलेगी।
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