mp urban bodies: मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार पर शिकंजा: 135 सीएमओ समेत कई अधिकारियों पर कार्रवाई
Corruption crackdown in Madhya Pradesh urban bodies: Action taken against several officials, including 135 CMOs

mp urban bodies: मध्य प्रदेश राज्य के नगरीय निकायों में होने वाले टेंडर और विभिन्न प्रकार की खरीदी प्रक्रिया में गड़बड़ियों को उजागर करने वाले वीडियो वायरल होने के बाद अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने पहली बार अपनी बात रखी है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर साफ किया कि यह वायरल वीडियो किसी प्रकार की धांधली को बढ़ावा देने वाला नहीं था, बल्कि सोलह अप्रैल दो हजार छब्बीस को आयोजित एक प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा था, जिसमें अधिकारियों को विभाग की कड़ी निगरानी व्यवस्था से अवगत कराया जा रहा था।
तकनीक और एआई के माध्यम से निगरानी
संजय दुबे ने बताया कि नगरीय निकायों में वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए ई-नगरपालिका सॉफ्टवेयर, जेम पोर्टल के आंकड़ों तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीक की मदद ली जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न निकायों के कमिश्नर, सीएमओ और सब इंजीनियरों को यह बताया गया कि विभाग उनके द्वारा किए जा रहे एक-एक रुपए के खर्च पर किस तरह सीधी नजर रख रहा है, ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग को पूरी तरह रोका जा सके।
392 अधिकारियों पर कार्रवाई का दायरा
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, गड़बड़ियों के चलते अब तक विभिन्न स्तरों के लगभग तीन सौ बयानवे अधिकारियों को जांच और कार्रवाई के दायरे में लाया जा चुका है। इन प्रभावित अधिकारियों में करीब एक सौ पैंतीस मुख्य नगर पालिका अधिकारी भी शामिल हैं। विभाग द्वारा जेम पोर्टल और ई-नगरपालिका के आंकड़ों का आपस में मिलान करके एक ही वेंडर या सामग्री की दरों की तुलना की जा रही है, जिससे किसी भी तरह की असमानता का तुरंत पता चल जाता है।
रोजाना हजारों ऑर्डरों का डिजिटल विश्लेषण
नगरीय निकायों में प्रतिदिन करीब एक हजार से पंद्रह सौ तक ऑर्डर जारी किए जाते हैं, जिनमें पांच रुपए की छोटी-मोटी सामग्री से लेकर पचास करोड़ और पांच सौ करोड़ रुपए तक के बड़े विकास कार्य शामिल रहते हैं। इतने विशाल आंकड़े का मानव द्वारा मैन्युअल रूप से अध्ययन करना संभव नहीं था, इसलिए एआई का उपयोग शुरू किया गया। प्रशिक्षण के समय तक एक सौ छियालीस कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जा चुकी थी, जिनमें से सात लोगों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था।
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रिकवरी और सप्लायरों पर सख्त रुख
अनियमित भुगतानों के मामलों में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से लगभग तीन से चार करोड़ रुपए की वसूली की जा चुकी है, साथ ही कई कर्मचारियों की वेतनवृद्धि रोकने और पदावनति करने के कदम भी उठाए गए हैं। इसके अलावा गलत दरों पर सामग्री सप्लाई करने वाले अस्सी से अधिक ठेकेदारों और सप्लायरों पर भी सख्त एक्शन लिया गया है। एसीएस ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के टैक्स का पैसा केवल जनता के हित में ही इस्तेमाल होना चाहिए और यह निगरानी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
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