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Betul Irrigation Crisis: बैतूल में रबी फसलों के लिए कम मिलेगा पानी, किसानों को कम पानी वाली फसलें बोने की सलाह

Betul Irrigation Crisis: Less water available for Rabi crops in Betul; farmers advised to sow low-water-consuming crops.

Betul Irrigation Crisis: बैतूल में रबी फसलों के लिए कम मिलेगा पानी, किसानों को कम पानी वाली फसलें बोने की सलाह
Betul Irrigation Crisis: बैतूल में रबी फसलों के लिए कम मिलेगा पानी, किसानों को कम पानी वाली फसलें बोने की सलाह

Betul Irrigation Crisis: बैतूल। जिले में इस साल औसत से कम हुई बारिश का सीधा असर खेती पर पड़ेगा। इस साल किसानों को सिंचाई के लिए बीते साल के मुकाबले कम पानी मिलेगा। गुरुवार को रबी सिंचाई को लेकर हुई जिला स्तरीय जल उपयोगिता समिति की बैठक में इस मुद्दे को लेकर मंथन किया गया। साथ ही निर्णय लिया गया कि किसानों को पानी की उपलब्धता के अनुसार फसलें चयनित करने की सलाह दी जाएं।

कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में मुलताई विधायक चंद्रशेखर देशमुख, जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष हंसराज धुर्वे एवं कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में जिले की मध्यम एवं लघु जल परियोजनाओं में उपलब्ध जल भराव क्षमता तथा परियोजनावार जल उपलब्धता की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से विभिन्न जलाशयों में वर्तमान जल उपलब्धता, सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी तथा प्रस्तावित रबी सिंचाई कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी ली।

इतने हेक्टेयर में ही हो सकेगी सिंचाई

बैठक में सामने आया कि पिछले साल करीब 94 हजार हेक्टेयर में सिंचाई हुई थी, जबकि इस बार पानी की उपलब्धता के आधार पर करीब 55 हजार हेक्टेयर में ही सिंचाई हो सकेगी। यानी सिंचाई का रकबा करीब 41.5′ कम हो सकता है। उपलब्ध पानी के अनुसार पलेवा के बाद एक सिंचाई देने की व्यवस्था होगी। बेहतर जल उपलब्धता वाले क्षेत्रों में पलेवा के साथ दो सिंचाई देने का प्रयास किया जाएगा। करीब 14,421 हेक्टेयर क्षेत्र में बेहतर जल उपलब्धता के आधार पर अधिक सिंचाई सुविधा देने की योजना है।

आधे भी नहीं भर पाए अधिकांश डैम

जिले के 127 बांध-तालाबों में बड़ी संख्या ऐसे जलस्रोतों की है, जो 50′ या उससे कम भरे हैं। ऐसे में अगले करीब आठ महीनों के लिए उपलब्ध पानी का नियोजित इस्तेमाल करना होगा। जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार ने कहा कि गेहूं में ज्यादा पानी लगता है, जबकि कई क्षेत्रों में एक-दो सिंचाई में भी फसल लेना मुश्किल होता है। उन्होंने गन्ने जैसी ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों की बोवनी कम करने की सलाह दी।

जिले में बारिश की यह स्थिति

इस साल 30 सितंबर तक जिले में औसत 721.9 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 989.8 मिमी बारिश हुई थी। इस तरह इस साल करीब 267.9 मिमी यानी 27′ कम बारिश हुई है। कम बारिश के साथ नदी-नालों और जलस्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं होने से रबी फसलों की सिंचाई का संकट बढ़ने की स्थिति है।

फसल बोवनी की फिर तैयार होगी योजना

कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने कृषि विभाग के उप संचालक को निर्देशित किया कि किसानों से निरंतर संवाद स्थापित कर जल उपलब्धता के अनुरूप फसल बोनी की योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि जलाशयों में उपलब्ध पानी के अनुसार किसानों को फसल बोने के संबंध में समय रहते जानकारी दी जाए, ताकि उपलब्ध जल का समुचित उपयोग सुनिश्चित हो सके।

डैम-नदियों से जब्त होंगे मोटर पंप

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जलाशयों एवं नदियों से अवैध रूप से पानी लेने पर अवैध मोटरों को जब्त करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सिंचाई के लिए उपलब्ध जल का नियमानुसार एवं आवश्यकता के अनुरूप उपयोग हो, यह सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभाग संयुक्त रूप से कार्रवाई करें।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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