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EPFO Wage Limit: नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खबर, EPFO ने बढ़ाई वेतन सीमा, अब पेंशन में भी हो सकता है फायदा

EPFO Wage Limit: Big news for salaried employees; EPFO ​​has raised the wage limit, which could now also lead to pension benefits.

EPFO Wage Limit: नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खबर, EPFO ने बढ़ाई वेतन सीमा, अब पेंशन में भी हो सकता है फायदा
EPFO Wage Limit: नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खबर, EPFO ने बढ़ाई वेतन सीमा, अब पेंशन में भी हो सकता है फायदा

EPFO Wage Limit: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अर्थात ईपीएफओ ने अनिवार्य योगदान के लिए निर्धारित वेतन सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है और यह नया नियम गुरुवार से प्रभावी हो गया है। इस वेतन वृद्धि के परिणाम स्वरूप नौकरीपेशा लोगों को सेवानिवृत्ति के पश्चात पूर्व की तुलना में काफी बेहतर आर्थिक लाभ मिल सकेंगे। इसके माध्यम से कर्मचारी पेंशन योजना अर्थात ईपीएस के अंतर्गत प्राप्त होने वाली हर महीने की पेंशन राशि में अच्छी खासी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

इस प्रकार तय की जाती है ईपीएस पेंशन की राशि

सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली मासिक पेंशन का निर्धारण मुख्य रूप से दो बातों पर निर्भर करता है, पहला आपका पेंशन योग्य वेतन और दूसरा आपने कितने वर्षों तक सेवा दी है। कर्मचारी ने जितने अधिक समय तक संस्थान में काम करते हुए योजना में अंशदान दिया होगा, उसकी मासिक पेंशन का आंकड़ा भी उतना ही बड़ा बनेगा।

किसी भी कर्मचारी के अंतिम 60 महीनों के औसत मूल वेतन को ही उसका पेंशन योग्य वेतन माना जाता है। इसी कारण से 25,000 रुपये की नई व्यवस्था का पूरा फायदा हासिल करने के लिए कर्मचारियों को लगातार पांच वर्षों तक इस नई सीमा के तहत अपना योगदान जारी रखना अनिवार्य होगा। जिनका बेसिक वेतन 25,000 रुपये या उससे अधिक है, वे ही इस अधिकतम सीमा का पूरा लाभ उठाने के पात्र माने जाएंगे।

33 वर्ष की नौकरी पर मिल सकती है 12,500 रुपये की मासिक पेंशन

यदि कोई कर्मचारी 25,000 रुपये की नई सीमा के अंतर्गत 12,500 रुपये प्रति माह की पेंशन पाना चाहता है, तो उसे अपनी सेवा अवधि पूरी करने के साथ-साथ अंतिम पांच वर्षों का औसत वेतन भी इसी सीमा में रखना होगा। हमारी गणना के मुताबिक यदि आपकी सेवा अवधि 33 साल है और पेंशन योग्य वेतन पूरे 25,000 रुपये बैठता है, तो आपकी अनुमानित मासिक पेंशन 12,500 रुपये हो जाएगी।

यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि कुल नौकरी 33 साल की होने के बावजूद गणना में 35 वर्ष जोड़े गए हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ईपीएस 2026 नियमों के मुताबिक 20 साल से अधिक समय तक लगातार योगदान करने वाले सदस्यों को 2 वर्ष का विशेष बोनस दिया जाता है। यदि यही काम पुरानी 15,000 रुपये की सीमा पर किया गया होता तो मिलने वाली पेंशन केवल 7,500 रुपये के आसपास ही रह जाती।

पुरानी और नई वेतन सीमा के बीच का गणितीय अंतर

यदि हम 10 वर्ष की नौकरी की बात करें तो पुरानी 15,000 की सीमा पर मासिक पेंशन 2,143 रुपये बनती थी, जो अब बढ़कर लगभग 3,571 रुपये हो जाएगी। इसी प्रकार 15 वर्ष की सेवा पर पुरानी सीमा में 3,214 रुपये और नई व्यवस्था में करीब 5,357 रुपये मिलेंगे। 20 साल काम करने पर पुरानी पेंशन 4,714 रुपये थी, जबकि नई सीमा के तहत यह 7,857 रुपये तक पहुंच जाएगी।

आगे देखें तो 25 वर्षों की सेवा पर पुरानी सीमा में 5,786 रुपये की जगह नई सीमा में 9,643 रुपये का लाभ होगा। वहीं 30 वर्ष की नौकरी में पुरानी 6,857 रुपये की पेंशन बढ़कर 11,429 रुपये हो जाएगी। अंत में 33 वर्ष की कुल सेवा पर पुरानी 7,500 रुपये की मासिक राशि की तुलना में अब 12,500 रुपये मिलने की पूरी संभावना है। हालांकि यह लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जो आने वाले 5 वर्षों तक नए नियम के अनुसार अपना अंशदान जमा करेंगे।

पेंशन की गणना का आसान सूत्र और पात्रता के नियम

ईपीएस पेंशन की सटीक गणना करने का एक निर्धारित फॉर्मूला है। इसके तहत पेंशन योग्य वेतन को कुल सेवा वर्षों से गुणा करके उसमें 70 का भाग दिया जाता है। चूंकि अधिकतम वेतन सीमा अब 15,000 से बढ़कर 25,000 रुपये हो चुकी है, इसलिए कर्मचारियों का पेंशन आधार 10,000 रुपये सीधे तौर पर बढ़ गया है।

पहले संस्थान द्वारा नियोक्ता के अंशदान से केवल 1,250 रुपये ही ईपीएस में जमा किए जाते थे, जो कि 15,000 का 8.33 प्रतिशत था। अब नई सीमा लागू होने से यह राशि बढ़कर 2,083 रुपये प्रति माह हो जाएगी। इसके अतिरिक्त जो कर्मचारी 1 सितंबर 2014 के बाद नौकरी में आए थे और जिनका वेतन 15,000 से ज्यादा था, वे अब तक इस योजना से बाहर थे। अब वे सभी कर्मचारी जिनका मूल वेतन 25,000 रुपये तक है, वे ईपीएस 2026 में शामिल हो सकेंगे।

आने वाले पांच सालों में सेवानिवृत्त होने वालों पर असर

जो नौकरीपेशा लोग अगले पांच वर्षों के भीतर ही रिटायर होने जा रहे हैं, उन्हें इस नई सीमा का शत-प्रतिशत फायदा नहीं मिल पाएगा। ऐसे कर्मचारियों को केवल आंशिक रूप से ही बढ़ी हुई पेंशन का लाभ प्राप्त होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनका कुल पेंशन लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्होंने नई सीमा के लागू होने के बाद कितने महीनों तक 25,000 रुपये पर योगदान दिया है। जितने अधिक महीनों तक नया अंशदान रहेगा, पेंशन में उतना ही ज्यादा सुधार देखने को मिलेगा। इसके अलावा पेंशन पाने की न्यूनतम शर्त 10 वर्ष की सेवा पूरी करना अनिवार्य है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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