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NPS Rule Change: अब पेंशन फंड का 100% हिस्सा लगेगा शेयर बाजार में, जानिए किसे होगा तगड़ा फायदा

NPS Rule Change: 100% of the pension fund will now be invested in the stock market; find out who stands to gain significantly.

NPS Rule Change: अब पेंशन फंड का 100% हिस्सा लगेगा शेयर बाजार में, जानिए किसे होगा तगड़ा फायदा
NPS Rule Change: अब पेंशन फंड का 100% हिस्सा लगेगा शेयर बाजार में, जानिए किसे होगा तगड़ा फायदा

NPS Rule Change: बुढ़ापे की लाठी यानी रिटायरमेंट फंड को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार और पेंशन नियामक ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब नेशनल पेंशन सिस्टम से जुड़ने वाले गैर-सरकारी अंशदाताओं को अपने पैसे को बढ़ाने के लिए पहले से कहीं अधिक आजादी और सहूलियत मिलने जा रही है। अगर आप अपने रिटायरमेंट कॉर्पस पर बेहतर रिटर्न हासिल करने के लिए बाजार के रुझानों का लाभ उठाना चाहते हैं, तो नया ढांचा आपके लिए बेहद काम का साबित हो सकता है। पेंशन फंड नियामक ने निवेशकों के लिए जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर संपत्ति के बंटवारे का नया जरिया खोल दिया है। इस बदलाव के बाद जहां एक तरफ कमाई का दायरा विस्तृत हुआ है, वहीं दूसरी तरफ समझदारी से फैसला लेना भी उतना ही जरूरी हो गया है। आइए समझते हैं कि पेंशन व्यवस्था में आए इस नए बदलाव का आपकी भविष्य की पूंजी पर क्या और कैसा असर पड़ेगा।

एनपीएस में बड़ा बदलाव, अब शत-प्रतिशत राशि शेयर बाजार में लगाने की छूट

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के दायरे में आने वाले गैर-सरकारी क्षेत्र के निवेशकों के लिए पेंशन फंड प्रबंधन के नियमों को पहले से कहीं ज्यादा लचीला बना दिया गया है। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, सब्सक्राइबर्स अब अपनी पूरी जमा राशि को इक्विटी यानी शेयर बाजार से जुड़े साधनों में लगाने का विकल्प चुन सकते हैं। यह नई सुविधा ‘मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क’ के प्रावधानों के अंतर्गत दी गई है। हालांकि, बाजार से जुड़े माध्यमों में पूर्ण रूप से धन लगाने का मतलब यह भी है कि निवेशक को बाजार में होने वाली उठक-पटक का पूरा असर झेलना पड़ेगा। यही कारण है कि वित्तीय विशेषज्ञ इस विकल्प को हर श्रेणी के खाताधारक के लिए उपयुक्त नहीं मान रहे हैं।

सामान्य एनपीएस व्यवस्था और मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क का अंतर

पारंपरिक एनपीएस योजनाओं की बात करें तो वहां एक्टिव चॉइस यानी सक्रिय निवेश प्रणाली के तहत किसी भी निवेशक को शेयर बाजार में अधिकतम 75 प्रतिशत तक ही राशि लगाने की अनुमति होती थी। शेष बची हुई 25 प्रतिशत रकम को कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटी जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित वित्तीय साधनों में विभाजित करके निवेश किया जाता था। परंतु अब मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क लागू होने के बाद पेंशन फंड प्रबंधकों को नए प्रकार की योजनाएं पेश करने की स्वायत्तता मिल गई है। इस नई व्यवस्था के अंतर्गत उच्च जोखिम वाली योजनाओं में 100 फीसदी तक की सीमा तय की गई है, जिससे सब्सक्राइबर्स के पास अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स का पूरा हिस्सा सीधे स्टॉक मार्केट में लगाने का अवसर उपलब्ध हो गया है।

जानिए क्या है शत-प्रतिशत इक्विटी का वास्तविक अर्थ

100 फीसदी शेयर बाजार के विकल्प का आशय यह कतई नहीं है कि एनपीएस में खाता रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति का पैसा अपने आप स्टॉक मार्केट में स्थानांतरित हो जाएगा। यह केवल एक ऐच्छिक सुविधा है, जिसे अंशदाता अपनी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं, वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम सहने की क्षमता का सही आकलन करने के बाद चुन सकते हैं। अगर कोई खाताधारक अपनी पुरानी व्यवस्था में ही बने रहना चाहता है, तो उस पर कोई दबाव नहीं रहेगा।

एक ही प्राण नंबर से अलग-अलग स्कीम में आवंटन की सुविधा

मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क की एक प्रमुख विशेषता यह भी है कि इसके तहत निवेशक अपने एक ही परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर यानी प्राण (PRAN) के जरिए कई अलग-अलग योजनाओं में एक साथ पैसे का बंटवारा कर सकता है। उदाहरण के तौर पर, कोई व्यक्ति अपनी नई बचत का एक बड़ा हिस्सा हाई-रिस्क वाली इक्विटी स्कीम में डाल सकता है और बाकी बची हुई राशि को कम जोखिम वाले साधनों जैसे फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में सुरक्षित रख सकता है। इससे निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने की सहूलियत मिलती है।

किन निवेशकों के लिए सही है शत-प्रतिशत इक्विटी का विकल्प

यह नया विकल्प उन खाताधारकों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद माना जा रहा है, जिनकी सेवानिवृत्ति में अभी काफी लंबा वक्त बाकी है। जो लोग उम्र के शुरुआती पड़ाव में हैं, वे बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव को आसानी से झेल सकते हैं क्योंकि उनके पास लंबी अवधि में बाजार के सुधार का लाभ उठाने का पर्याप्त समय होता है। इसके विपरीत, जो लोग अपनी सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके हैं या जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक हो चुकी है, उनके लिए पूरा पैसा शेयर बाजार में लगाना जोखिम भरा कदम हो सकता है। ऐसे वरिष्ठ निवेशकों को अपनी पूंजी की सुरक्षा के लिए सुरक्षित और कम जोखिम वाले विकल्पों को ही तरजीह देनी चाहिए।

15 वर्ष की न्यूनतम अवधि की अनिवार्य शर्त

मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क के तहत चुनी गई किसी भी योजना में निवेश करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा निर्धारित की गई है। निवेशक को इस ढांचे के तहत चुनी गई स्कीम में कम से कम 15 साल तक बने रहना होगा, या फिर जब तक उसकी उम्र 60 वर्ष न हो जाए (दोनों में से जो समय सीमा पहले पूरी हो)। इस निर्धारित अवधि के दौरान ग्राहक चाहे तो सामान्य एनपीएस योजनाओं में वापस जा सकता है, लेकिन वह एक एमएसएफ योजना से सीधे किसी दूसरी एमएसएफ योजना में बदलाव नहीं कर पाएगा। 15 साल की अवधि समाप्त होने के बाद ही उसे विभिन्न एमएसएफ योजनाओं के बीच बदलाव करने या सामान्य नियमों के तहत स्कीम से बाहर निकलने का अधिकार प्राप्त होगा।

वर्ष में चार बार निवेश पैटर्न बदलने का अधिकार

एनपीएस अंशदाताओं को अपने एसेट एलोकेशन यानी संपत्ति के आवंटन में समय-समय पर बदलाव करने की सुविधा भी मिलती है। पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा तय किए गए नियमों के अनुसार, निवेशक एक वित्तीय वर्ष के दौरान अधिकतम चार बार अपना एसेट एलोकेशन या निवेश विकल्प बदल सकते हैं। इससे बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप अपने पोर्टफोलियो को ढालने का मौका मिलता है।

पैसे लगाने से पहले जोखिम का मूल्यांकन है बेहद जरूरी

शेयर बाजार में शत-प्रतिशत राशि लगाने से उच्च रिटर्न मिलने की संभावनाएं तो काफी बढ़ जाती हैं, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं होती कि रिटर्न हमेशा ज्यादा ही रहेगा। स्टॉक मार्केट में जिस तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिलती है, उतनी ही तेजी से गिरावट की आशंका भी बनी रहती है। इसलिए किसी भी निवेशक को 100 प्रतिशत इक्विटी विकल्प चुनने से पहले अपनी आयु, मासिक आय, पारिवारिक दायित्वों, मौजूदा कर्ज और पहले से शेयर बाजार में किए गए अन्य निवेशों का गहनता से आकलन कर लेना चाहिए।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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