MP Forest Department: सीएम मोहन यादव बोले- वन प्रबंधन में होगा आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल, खाली पदों पर होगी नई भर्ती
MP Forest Department: CM Mohan Yadav stated that modern technology will be used in forest management and new recruitments will be made to fill vacant posts.

MP Forest Department: वन सुरक्षा और संवर्धन में जुटे अधिकारियों व कर्मचारियों के सराहनीय योगदान पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरे संतोष का प्रकटीकरण किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने मध्यप्रदेश को प्राकृतिक सुंदरता और वनों की अनमोल धरोहर दी है। यह अनूठी वन संपदा न केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया के पटल पर मध्यप्रदेश की एक विशिष्ट पहचान बनाती है। हमारे वनकर्मी पूरी निष्ठा और तत्परता से इस अमूल्य प्राकृतिक संपदा का संरक्षण कर रहे हैं। सरकार द्वारा प्रदेश के कर्मचारियों की पदोन्नति के संबंध में लिए गए ऐतिहासिक निर्णय से वन विभाग के अमले को भी व्यापक स्तर पर लाभ पहुंचा है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश सुशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सुशासन के इस लक्ष्य को साकार करने के लिए प्रत्येक क्षेत्र में युवाओं की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पदोन्नति केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कर्मचारी के लगन और समर्पण का सच्चा सम्मान है। विभाग के 4506 कर्मियों को तरक्की का अवसर मिलने से पूरे प्रशासनिक ढांचे में खुशी का माहौल है।
नई भर्तियों और अत्याधुनिक तकनीक से मजबूत होगा वन प्रबंधन
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि वन महकमे में कुल 25,389 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से वर्तमान में 18 हजार से अधिक कर्मचारी मुस्तैदी से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सरकार वन प्रबंधन की संपूर्ण व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़कर और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए कटिबद्ध है। इसी सोच के तहत पदोन्नति प्रक्रिया संपन्न करने के साथ ही खाली पड़े पदों को पारदर्शी तरीके से भरने के लिए नई भर्तियों के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल स्थित भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM) में आयोजित अभिनंदन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम पदोन्नत हुए अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा मुख्यमंत्री का आभार जताने के लिए आयोजित किया गया था, जिसमें मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष रामनिवास रावत भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

मध्यप्रदेश को मिले वन्यजीव संरक्षण के कई बड़े तमगे
मैदानी वनकर्मियों को ‘प्रकृति पुत्र’ और ‘ग्रीन सोल्जर्स’ के नाम से संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन रक्षकों के बीच पहुंचकर अत्यंत आनंद की अनुभूति होती है। भारत जैसे समृद्ध जैव-विविधता वाले देश में मध्यप्रदेश को एक विशेष विरासत प्राप्त हुई है। वन विभाग के कर्मचारियों की मेहनत का ही परिणाम है कि आज हमारा प्रदेश पूरे देश में वन्यजीव संरक्षण का एक अग्रणी मॉडल बनकर उभरा है।
राज्य की वास्तविक पहचान जल, जंगल और जमीन से जुड़ी है। इसी निरंतर प्रयास की बदौलत मध्यप्रदेश ने टाइगर स्टेट, लेपर्ड स्टेट, घड़ियाल स्टेट, गिद्ध स्टेट और अब चीता स्टेट का गौरवशाली दर्जा हासिल किया है। वर्षों के लंबे इंतजार के बाद मिली इस पदोन्नति में 188 सहायक वन संरक्षक, 2821 वनपाल, 761 उप वन क्षेत्रपाल और 736 अन्य संवर्ग के कर्मचारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए उनके परिजनों के त्याग की भी सराहना की।
पर्यावरण संतुलन और भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य का संकल्प
वन्यजीवों के बेहतर रखरखाव और संरक्षण में मध्यप्रदेश आज राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान रखता है। स्थिति यह है कि जंगलों में विलुप्त हो रहे जंगली भैंसे भी अब वापस लौटने लगे हैं। हमारे वनकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर नदी, पहाड़ और जंगलों की चौबीसों घंटे रखवाली करते हैं। वे वन संपदा के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच की तरह खड़े हैं, जो न केवल वन्यजीवों की रक्षा करते हैं बल्कि जंगलों के आसपास रहने वाली आबादी का भी पूरा ध्यान रखते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव जीवन और प्रकृति का गहरा जुड़ाव है। हमारा यह नैतिक दायित्व है कि हम आने वाली पीढ़ी को एक समृद्ध और स्वच्छ पर्यावरण सौंपें। यद्यपि प्रदेश में कोई हिमखंड नहीं है, फिर भी हमारी नदियां सदा नीरा बनी रहती हैं। विकास की वास्तविक सार्थकता तभी है जब जंगल, नदियां और जैव-विविधता पूरी तरह सुरक्षित रहें।
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संरक्षण के नए प्रयास और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा
वन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने अपने संबोधन में बताया कि मुख्यमंत्री की मजबूत इच्छाशक्ति के कारण ही विभाग के 4506 अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति का उपहार मिल सका है। प्रदेश का 30.72 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है, जहां 9 टाइगर रिजर्व और 26 वन्यजीव अभयारण्य स्थापित हैं। हाल के महीनों में रातापानी, माधव टाइगर रिजर्व, डॉ. भीमराव आम्बेडकर अभयारण्य और ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व जैसे नए कदम उठाए गए हैं।
इसके अलावा हाथियों की निगरानी के लिए एआई आधारित ‘गज रक्षक’ प्रणाली और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 5 करोड़ 62 लाख से ज्यादा पौधारोपण जैसे कार्य किए गए हैं। कार्यक्रम में पदोन्नत अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के प्रति अपना आभार व्यक्त किया, जिसके पश्चात विभाग की ओर से मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
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