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MP TET Exam: मध्य प्रदेश में शिक्षकों की टीईटी पर बवाल, 1000 रुपए फीस को लेकर संगठनों ने उठाई आवाज

MP TET Exam: Uproar over teachers' TET in Madhya Pradesh; organizations raise objections regarding the ₹1,000 fee.

MP TET Exam: मध्य प्रदेश में शिक्षकों की टीईटी पर बवाल, 1000 रुपए फीस को लेकर संगठनों ने उठाई आवाज
MP TET Exam: मध्य प्रदेश में शिक्षकों की टीईटी पर बवाल, 1000 रुपए फीस को लेकर संगठनों ने उठाई आवाज

MP TET Exam: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मध्य प्रदेश में सेवारत प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी देनी है, लेकिन परीक्षा शुल्क ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। कर्मचारी चयन मंडल ने परीक्षा के लिए 1000 रुपए शुल्क निर्धारित किया है। प्रदेश में करीब 1.50 लाख शिक्षक इसके दायरे में बताए जा रहे हैं। इस हिसाब से केवल परीक्षा शुल्क के जरिए करीब 15 करोड़ रुपए जमा होने का अनुमान है। शिक्षक संगठनों का सवाल है कि जब शिक्षक नई नौकरी पाने के लिए परीक्षा नहीं दे रहे हैं, तो उनसे इतना शुल्क क्यों लिया जा रहा है।

जुलाई के बाद अब टीईटी शुल्क पर विवाद

सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के आदेश के बाद प्रदेश में वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की व्यवस्था लागू की गई है। आदेश के मुताबिक, संबंधित शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने के बाद ही सेवा में बनाए रखने की व्यवस्था है। स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत आने वाले करीब 1.50 लाख शिक्षकों के इस परीक्षा में शामिल होने का अनुमान है।

इसी के तहत कर्मचारी चयन मंडल ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर प्राथमिक और माध्यमिक वर्ग के शिक्षकों के लिए आवेदन की तारीख तय कर दी है। आवेदन प्रक्रिया 21 अगस्त से शुरू होकर 9 सितंबर तक चलेगी। परीक्षा के लिए 1000 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त अभ्यर्थियों को एमपी ऑनलाइन और कियोस्क से जुड़े शुल्क का भुगतान भी करना होगा।

परीक्षा शुल्क को लेकर शिक्षक संगठनों में नाराजगी

टीईटी की फीस सामने आने के बाद शिक्षक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। संगठनों का तर्क है कि ये शिक्षक किसी नए पद पर नियुक्ति हासिल करने के लिए परीक्षा नहीं दे रहे हैं। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण अपनी वर्तमान सरकारी सेवा में बने रहने के लिए पात्रता परीक्षा देनी है।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब परीक्षा सरकार के स्तर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए कराई जा रही है, तो इसका खर्च भी शासन को ही वहन करना चाहिए। संगठनों के अनुसार, करीब 1.50 लाख शिक्षकों से 1000 रुपए लिए जाने पर लगभग 15 करोड़ रुपए की राशि जमा होगी, जबकि उनका दावा है कि परीक्षा आयोजित करने में इससे काफी कम खर्च आने की संभावना है।

मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से मुलाकात की तैयारी

शिक्षक संयुक्त मोर्चा सहित विभिन्न संगठनों ने परीक्षा शुल्क समाप्त कराने के लिए सरकार से बातचीत का फैसला किया है। संगठन 26 अगस्त तक मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से मुलाकात करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सरकार के सामने सेवारत शिक्षकों की स्थिति रखते हुए टीईटी शुल्क माफ करने की मांग करना है।

संगठनों की ओर से तब तक प्रदेश के शिक्षकों से आवेदन फॉर्म नहीं भरने की अपील भी की गई है। उनका कहना है कि पहले सरकार से शुल्क के संबंध में स्पष्ट निर्णय कराया जाना चाहिए।

30 अगस्त को दिल्ली में जुटेंगे प्रभावित शिक्षक

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित देशभर के शिक्षक 30 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्र होने की तैयारी में हैं। शिक्षक संगठनों के मुताबिक, इस प्रदर्शन के जरिए केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने और शिक्षकों के हित में आवश्यक फैसला करने की मांग रखी जाएगी।

राज्य अध्यापक संघ, शासकीय शिक्षक संगठन और दूसरे शिक्षक संगठनों ने प्रदेश के प्रभावित शिक्षकों से दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया है। संगठनों का कहना है कि देशभर के प्रभावित शिक्षकों की ओर से केंद्र सरकार के सामने उनकी समस्याएं रखी जाएंगी।

निःशुल्क टीईटी कराने की मांग

शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने भी सेवारत शिक्षकों से टीईटी शुल्क नहीं लेने की मांग की है। संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल का कहना है कि मौजूदा शिक्षकों के लिए यह परीक्षा शासन और शिक्षा विभाग के निर्देशों के पालन से जुड़ी हुई है। इसलिए परीक्षा की फीस शिक्षकों से वसूलना उचित नहीं माना जा सकता।

उपेंद्र कौशल ने उदाहरण देते हुए कहा कि इससे पहले सीएम राइज स्कूल, उत्कृष्ट विद्यालय और मॉडल स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए हुई परीक्षाओं का खर्च शासन की ओर से वहन किया गया था। ऐसे में अब सेवा में पहले से मौजूद शिक्षकों की टीईटी के लिए शुल्क तय करने पर संगठन ने सवाल उठाया है।

टीईटी से बाहर शिक्षकों की सूची जारी करने की मांग

शिक्षक संगठन का एक और सवाल आवेदन प्रक्रिया को लेकर है। उपेंद्र कौशल के अनुसार, शिक्षा विभाग के पास प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों की सेवा संबंधी और शैक्षणिक जानकारी पहले से मौजूद है। विभाग के रिकॉर्ड में यह जानकारी भी उपलब्ध होनी चाहिए कि कौन-से शिक्षक पहले ही टीईटी पास कर चुके हैं और किन शिक्षकों के लिए परीक्षा देना जरूरी है।

संगठन का कहना है कि ऐसी स्थिति में हर शिक्षक से अलग-अलग ऑनलाइन आवेदन कराने के बजाय विभाग को उन शिक्षकों की सूची जारी करनी चाहिए, जिन्हें टीईटी देना अनिवार्य है। इसके बाद संबंधित शिक्षकों को सीधे परीक्षा में शामिल होने के लिए निर्देश दिया जा सकता है। इससे शिक्षकों में बनी असमंजस की स्थिति भी खत्म होगी।

ऑनलाइन परीक्षा की जगह ऑफलाइन कराने की मांग

शिक्षक संगठनों ने परीक्षा के तरीके को लेकर भी अपनी मांग रखी है। शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश चाहता है कि सेवारत शिक्षकों की टीईटी ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन कराई जाए।

संगठन का कहना है कि प्रदेश के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट की उपलब्धता और तकनीकी संसाधनों से जुड़ी दिक्कतें शिक्षकों के सामने परेशानी खड़ी कर सकती हैं। सर्वर या इंटरनेट से संबंधित समस्या के कारण किसी शिक्षक को परीक्षा देने में परेशानी न हो, इसके लिए संगठन ऑफलाइन परीक्षा को अधिक उपयुक्त मान रहा है।

अब सरकार के फैसले पर नजर

टीईटी के लिए आवेदन प्रक्रिया 21 अगस्त से शुरू होने वाली है और शुल्क को लेकर शिक्षक संगठनों का विरोध भी सामने आ चुका है। ऐसे में अब शिक्षकों की नजर मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री के साथ होने वाली संभावित मुलाकात पर है। शिक्षक संगठन परीक्षा शुल्क माफ करने के साथ-साथ आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा के तरीके में भी बदलाव की मांग कर रहे हैं। वहीं, 30 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में भी प्रदेश के प्रभावित शिक्षकों की भागीदारी प्रस्तावित है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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