MP Development: एमपी में विकास का मेगा प्लान: 16720 करोड़ से किसानों, छात्रों और शहरों को होगा बड़ा फायदा
MP Development: Mega plan for development in MP: Rs 16720 crore will be a big benefit to farmers, students and cities.

MP Development: मध्यप्रदेश में विकास कार्यों को तेज गति देने के लिए सरकार ने एक साथ कई बड़े फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में शिक्षा, कृषि, सिंचाई, वन, प्रशासन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाओं पर भारी निवेश को मंजूरी दी गई। इन निर्णयों से प्रदेश के लाखों किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार ने कुल 16,720 करोड़ रुपये के प्रावधान को हरी झंडी देकर यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय
मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश के सर्वांगीण विकास और जनकल्याण से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। सरकार ने स्पष्ट किया कि इन योजनाओं का उद्देश्य प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना, प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना और आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। बैठक में खास तौर पर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने, किसानों को राहत देने, सिंचाई क्षमता बढ़ाने और शहरी-ग्रामीण ढांचे को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
भोपाल में वित्तीय प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान की स्थापना
सरकार ने भोपाल में वित्तीय प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह संस्थान आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासनिक एवं प्रबंधन अकादमी परिसर में बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों को वित्तीय प्रबंधन और प्रशासन से जुड़ा प्रशिक्षण देना है। इससे सरकारी कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा।
प्रदेश में अभी तक चल रही सात लेखा प्रशिक्षण संस्थाओं को धीरे-धीरे एकीकृत कर इस नए संस्थान के तहत लाया जाएगा। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा और सभी कर्मचारियों को एक समान प्रणाली के तहत प्रशिक्षित किया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस संस्थान के लिए नए पद सृजित नहीं किए जाएंगे, जिससे सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं पड़ेगा। अगले तीन वर्षों में इसके संचालन और स्थापना पर लगभग 26 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
मंदसौर में कातना सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को मंजूरी
किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मंदसौर जिले की कातना सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना के लिए 88.41 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके पूरा होने के बाद भानपुरा तहसील के 12 गांवों में करीब 3500 हेक्टेयर भूमि सिंचित हो सकेगी।
इस योजना से किसानों की फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। साथ ही, सूखे की स्थिति में भी खेती को नुकसान कम होगा।
वाणिज्यिक कर विभाग की योजनाओं को विस्तार
मंत्रि-परिषद ने वाणिज्यिक कर विभाग के अंतर्गत संचालित आठ योजनाओं को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने का फैसला लिया है। इसके लिए लगभग 2,952 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं में नगरीय अधोसंरचना विकास निधि के लिए 1,317.62 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी कार्य, विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव, आबकारी सामग्री की खरीद, कार्यालय भवन निर्माण और दुकानों के संचालन के लिए भी बजट निर्धारित किया गया है। स्टांप लागत के लिए 806 करोड़ रुपये और मुख्यालय एवं जिला स्तर के स्थापना व्यय के लिए 1,428 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे विभागीय कामकाज को सुचारू रूप से संचालित करने में मदद मिलेगी।
वन क्षेत्र के संरक्षण के लिए बड़ी राशि
राज्य सरकार ने वन क्षेत्रों के संरक्षण और पुनर्स्थापना के लिए 5,215 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। यह राशि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक पांच वर्षों के लिए खर्च की जाएगी। इस योजना के तहत जंगलों में सुधार, पौधारोपण और पहले किए गए कार्यों के रखरखाव पर ध्यान दिया जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और वन क्षेत्र की गुणवत्ता में सुधार होगा।
चना और मसूर उपार्जन के लिए बड़ी योजना
किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने चना और मसूर के उपार्जन के लिए 3,174 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह योजना तीन वर्षों तक लागू रहेगी। इसमें प्रत्येक वर्ष के लिए 1,058 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। यह राशि विपणन संघ को उपलब्ध कराई जाएगी ताकि किसानों से फसल खरीद सुचारू रूप से की जा सके। भारत सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत चना के कुल उत्पादन का 25 प्रतिशत और मसूर का 100 प्रतिशत उपार्जन किया जाएगा। साथ ही, इन फसलों पर मंडी शुल्क में छूट भी दी जाएगी, जिससे किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
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शिक्षा के क्षेत्र में बड़े फैसले
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। आरटीई के तहत गैर अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति के लिए 3,039 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह योजना 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी। इसके अलावा कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को मुफ्त पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए 693 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
इस योजना के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले सभी छात्रों को पाठ्य पुस्तक निगम के माध्यम से किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। पीएमश्री स्कूल योजना के विस्तार के लिए भी 940 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य चयनित स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विकसित करना है।
अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए सहायता
सरकार ने दिल्ली में पढ़ाई कर रहे अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत दी है। छात्रगृह योजना के तहत अब उन्हें प्रति माह 10 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत हर वर्ष 100 नए छात्रों को शामिल किया जाएगा, जिसमें 50 स्नातक और 50 स्नातकोत्तर छात्र होंगे। इसके अलावा पहले से पढ़ रहे छात्रों को भी इसका लाभ मिलेगा। इस योजना के लिए 1.80 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
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उज्जैन हवाई पट्टी के विस्तार को मंजूरी
उज्जैन में हवाई सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने हवाई पट्टी के विस्तार का फैसला लिया है। इसके लिए 590 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना के तहत 437.5 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा ताकि एयरबस जैसे बड़े विमानों का संचालन संभव हो सके। उज्जैन धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण शहर है, जहां महाकालेश्वर मंदिर और सिंहस्थ महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन होते हैं। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में हवाई सेवाओं का विस्तार शहर के विकास के लिए अहम माना जा रहा है।
समग्र विकास की दिशा में बड़ा कदम
मंत्रि-परिषद के इन फैसलों को प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार ने शिक्षा, कृषि, पर्यावरण, प्रशासन और बुनियादी ढांचे जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं को मंजूरी दी है। इन फैसलों से जहां एक ओर किसानों और छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। आने वाले समय में इन योजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर देखने को मिलेगा, जिससे मध्यप्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
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