MP Rural Roads: प्रदेश में सड़कों का बड़ा विस्तार, 7135 नई सड़कों की तैयारी, दूर-दराज के मजरे-टोले भी होंगे कनेक्ट
MP Rural Roads: Major expansion of roads in the state, preparation of 7135 new roads, remote hamlets will also be connected.

MP Rural Roads: मध्यप्रदेश में ग्रामीण संपर्क को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार ने हजारों नई सड़कों के निर्माण की योजना तैयार की है, जिससे अब छोटे-छोटे मजरे और टोले भी मुख्य सड़कों से जुड़ सकेंगे। इस परियोजना में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग कर गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर खास जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने दिए गुणवत्ता पर जोर के निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाली सड़कों के काम में नई तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ाने पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य की निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाए, ताकि काम की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि सिपरी सॉफ्टवेयर के जरिए सड़कों के साथ-साथ पुल और पुलियों की जरूरत का भी आकलन किया जा रहा है, जिससे योजनाएं अधिक सटीक बन सकें।
बैठक में की गई परियोजना की समीक्षा
सोमवार को समत्व भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री ने सुगम संपर्कता परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने विभाग को निर्देश दिए कि जल गंगा संवर्धन अभियान की हर सप्ताह समीक्षा की जाए और इसमें आम लोगों की भागीदारी बढ़ाई जाए। साथ ही “एक बगिया मां के नाम” अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों की भी जानकारी ली गई।
परियोजना की लागत और उद्देश्य
बैठक में जानकारी दी गई कि इस योजना के तहत करीब एक हजार करोड़ रुपये की लागत से सड़कों का निर्माण कराया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे सभी गांवों, मजरे और टोलों को सड़क सुविधा से जोड़ना है, जहां 100 से अधिक आबादी निवास करती है। इससे ग्रामीण इलाकों में आवागमन आसान होगा और विकास की गति तेज होगी।

दोहरी संपर्कता का मिलेगा लाभ
सुगम संपर्कता परियोजना के तहत गांवों और ग्राम पंचायतों को दोहरी सड़क सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। इसका मतलब यह है कि किसी भी गांव तक पहुंचने के लिए एक से अधिक मार्ग उपलब्ध होंगे। इससे आपातकालीन स्थितियों में भी लोगों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी। इस योजना के तहत सड़क निर्माण का काम मनरेगा और वीबी-जी-राम-जी योजना के माध्यम से कराया जाएगा। हर जनपद पंचायत को तीन करोड़ रुपये तक के कार्य स्वीकृत करने का अधिकार दिया गया है।
पुरानी सड़कों की हो रही जियो-इंवेंट्री
इस परियोजना की एक खास बात यह है कि पहले से बनी सड़कों का पूरा डाटा तैयार किया जा रहा है। रिम्स पोर्टल के माध्यम से सड़कों की जियो-इंवेंट्री की जा रही है, जिससे नई सड़कों के चयन में दोहराव की समस्या नहीं आएगी। इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, पीएमजीएसवाय और जिला सड़कों को भी शामिल किया गया है।
आधे से ज्यादा काम हो चुका है पूरा
निर्धारित लक्ष्य के अनुसार प्रदेश की 33 हजार 655 सड़कों का सर्वे किया जाना है, जिसमें से अब तक 17 हजार 437 सड़कों की जियो-इंवेंट्री पूरी हो चुकी है। कई जिलों में यह काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। रतलाम, जबलपुर, आगर-मालवा, मंदसौर और पन्ना जैसे जिले इस कार्य में आगे हैं, जहां 80 प्रतिशत से अधिक सर्वे पूरा हो चुका है।
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सॉफ्टवेयर से हो रहा स्थान का चयन
नई सड़कों के निर्माण के लिए स्थान का चयन सिपरी सॉफ्टवेयर की मदद से किया जा रहा है। यही सॉफ्टवेयर सड़कों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने में भी उपयोगी साबित हो रहा है। इसके जरिए यह भी तय किया जा रहा है कि किस स्थान पर पुल, पुलिया या कल्वर्ट की जरूरत है। इससे योजना बनाने से लेकर क्रियान्वयन तक की प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक और सटीक हो गई है।
जिला स्तर पर हो रही स्वीकृति
परियोजना के तहत प्रदेश में 7 हजार 135 नई सड़कों के प्रस्ताव तैयार किए जा चुके हैं। इनमें से 29 जिलों में 1771 सड़कों को जिला स्तर पर मंजूरी मिल चुकी है। इस योजना को सफल बनाने के लिए तकनीकी स्टाफ को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। अब तक 2100 से अधिक इंजीनियर और तकनीकी कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। साथ ही सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायकों को भी निर्माण कार्य से जुड़ी तकनीकी जानकारी दी जा रही है।
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ड्रोन और डैशबोर्ड से होगी निगरानी
सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा जनपद, जिला और राज्य स्तर पर डैशबोर्ड के जरिए निर्माण कार्य की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और समय पर कार्य पूरा करने में मदद मिलेगी। इस पूरी योजना से आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है, जहां अब तक सड़क सुविधा सीमित थी।
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