Raju Dhanotia Success Story: झाड़ू-पोछा से शुरू हुआ सफर, ‘छोटू’ राजू धनोटिया ने खड़ा कर दिया 20 करोड़ का रेस्टोरेंट बिजनेस
मंदसौर के युवक की प्रेरक कहानी, चाय की दुकान से शुरू कर इंदौर में बनाया करोड़ों का कारोबार

Raju Dhanotia Success Story: जीवन में संघर्ष करने वाले लोगों की कहानियां अक्सर दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाती हैं। मध्य प्रदेश के राजू धनोटिया की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कभी चाय की दुकान में झाड़ू-पोछा लगाने वाला यह युवक आज करोड़ों रुपये के कारोबार का मालिक बन चुका है। इंदौर में शुरू किया गया उनका ‘उत्साह’ रेस्टोरेंट आज बड़ी पहचान बना चुका है। साधारण परिवार से आने वाले राजू ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी और मेहनत के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई।
मंदसौर से शुरू हुआ संघर्षों का सफर
राजू धनोटिया मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के रहने वाले हैं, जो इंदौर से लगभग 200 किलोमीटर दूर स्थित है। उनके पिता किसान हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। घर में पढ़ाई को महत्व दिया जाता था, लेकिन आर्थिक सीमाओं के कारण राजू अपनी पढ़ाई ज्यादा आगे तक जारी नहीं रख सके। बचपन से ही वे पढ़ाई में अच्छे थे और उन्हें नवोदय विद्यालय में पढ़ने का अवसर भी मिला। हालांकि 12वीं कक्षा के बाद उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
पढ़ाई के लिए शुरू करनी पड़ी नौकरी
राजू बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर इंदौर पहुंचे थे। उनका इरादा पढ़ाई जारी रखने का था, लेकिन शहर में रहने और खर्च चलाने की चुनौती सामने आ गई। मजबूरी में उन्होंने एक चाय की दुकान पर काम करना शुरू कर दिया। शुरुआती दिनों में उनका काम दुकान की सफाई करना था। झाड़ू-पोछा लगाने से लेकर छोटे-मोटे काम तक वे करते थे। दुकान में लोग उन्हें अक्सर ‘छोटू’ कहकर बुलाते थे।
STD बूथ से मिला बिजनेस का पहला विचार
कुछ समय बाद राजू को एक STD बूथ पर काम करने का मौका मिला। यहीं काम करते हुए उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि एक छोटा व्यवसाय कैसे चलता है और उसमें कमाई कैसे होती है। उन्होंने बूथ के मालिक से एक दिन पूछ लिया कि दुकान से महीने में कितनी आय होती है। जब मालिक ने लगभग 17 हजार रुपये की कमाई बताई, तो राजू ने तुरंत एक प्रस्ताव रखा कि वे दुकान को किराए पर लेना चाहते हैं और इसके लिए हर महीने 24 हजार रुपये देंगे। पहले तो मालिक को यह बात मजाक लगी, लेकिन बाद में उन्होंने राजू की गंभीरता देखकर दुकान किराए पर देने के लिए सहमति दे दी।
काम का तरीका बदला तो बढ़ी कमाई
दुकान संभालने के बाद राजू ने काम करने का तरीका बदल दिया। उन्होंने दुकान को सुबह बहुत जल्दी खोलना शुरू किया। नजदीक में रेलवे स्टेशन होने के कारण वहां यात्रियों की आवाजाही रहती थी। लोग फोन करने के लिए आते थे या यात्रा से संबंधित जानकारी देने के लिए कॉल करते थे। राजू ने इसके साथ चाय, बिस्किट, नमकीन और पानी बेचने की भी शुरुआत कर दी। इससे दुकान की आमदनी बढ़ने लगी। बाद में उन्होंने सिम कार्ड बेचना भी शुरू कर दिया और धीरे-धीरे कारोबार का दायरा बढ़ाते गए।
चाय के कारोबार से मिली बड़ी पहचान
राजू ने बाद में चाय की एक अलग दुकान शुरू की, जहां कई तरह की चाय बनाई जाने लगी। चाय की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण ग्राहक बढ़ते गए। इसके साथ ही पोहा और जलेबी जैसे नाश्ते की चीजें भी बिकने लगीं। राजू के अनुसार वर्ष 2018 तक उनकी दुकान पर रोजाना लगभग तीन क्विंटल दूध से बनी चाय की बिक्री होने लगी थी। इसी कमाई से उन्होंने जमीन खरीदी। कुछ धन की कमी थी, जिसे पूरा करने के लिए भाइयों से उधार लिया और बैंक से भी कर्ज लिया।
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‘उत्साह’ रेस्टोरेंट की शुरुआत
चाय के कारोबार से मिले अनुभव और पूंजी के आधार पर राजू ने इंदौर में ‘उत्साह’ नाम से एक रेस्टोरेंट शुरू किया। धीरे-धीरे यह रेस्टोरेंट लोकप्रिय हो गया। आज यहां रोजाना चार से पांच लाख रुपये तक की बिक्री होती है और सालाना कारोबार करीब 18 से 20 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। राजू बताते हैं कि वे अपने ग्राहकों को भगवान की तरह मानते हैं और जो भी भोजन परोसा जाता है उसे प्रसाद समझते हैं।
सैकड़ों लोगों को मिला रोजगार
आज राजू के रेस्टोरेंट में 168 से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनमें कई लोग उनके गांव से भी हैं, जिन्हें उन्होंने काम का अवसर दिया है। कुछ कर्मचारी ऐसे भी हैं जो रेस्टोरेंट शुरू होने से पहले से उनके साथ जुड़े हुए हैं। राजू का कहना है कि उन्होंने हमेशा कोशिश की है कि उनके साथ काम करने वाले लोगों को भी आगे बढ़ने का मौका मिले।
MBA कॉलेजों में शेयर करते हैं अनुभव
राजू सिर्फ 12वीं पास हैं, लेकिन उनके बिजनेस मॉडल को समझने के लिए कई मैनेजमेंट छात्र उनसे मिलने आते हैं। कई छात्र उनके रेस्टोरेंट में इंटर्नशिप भी करते हैं। उन्हें कई MBA कॉलेजों में आमंत्रित किया जाता है, जहां वे अपने अनुभव और संघर्ष की कहानी विद्यार्थियों के साथ शेयर करते हैं।
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समाज सेवा में भी निभा रहे भूमिका
व्यवसाय के साथ-साथ राजू सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं। वे रोज सुबह अपने रेस्टोरेंट के बाहर लोगों को मुफ्त जूस और स्प्राउट्स बांटते हैं। उनकी चाय की दुकान दिन-रात खुली रहती है ताकि जरूरतमंद लोगों को सुविधा मिल सके। राजू मानते हैं कि समाज से ही उन्हें पहचान मिली है, इसलिए समाज के लिए कुछ करना उनकी जिम्मेदारी है।
देशभर में रेस्टोरेंट खोलने का सपना
राजू धनोटिया का सपना है कि भविष्य में देश के हर बड़े शहर में ‘उत्साह’ रेस्टोरेंट की शाखाएं खुलें। वे चाहते हैं कि इस कारोबार के जरिए एक लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके। राजू कहते हैं कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि सफाई का काम करने वाला एक साधारण युवक एक दिन करोड़ों के कारोबार का मालिक बन जाएगा। जिस व्यक्ति को लोग पहले ‘छोटू’ कहकर पुकारते थे, आज वही स्नैक्स, बेकरी और मिठाई के कारोबार में एक बड़ा नाम बन चुका है।
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