Betul Wheat Mandi Auction: बैतूल मंडी में बड़ा बदलाव: अब ट्रॉली में ही होगी गेहूं की नीलामी, किसानों का समय बचेगा
Betul Wheat Mandi Auction: गेहूं सीजन से पहले नई व्यवस्था लागू, नीलामी के तुरंत बाद होगी तौल और भुगतान प्रक्रिया

Betul Wheat Mandi Auction: गेहूं सीजन शुरू होने से पहले बैतूल कृषि उपज मंडी में किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की गई है। अब मंडी में आने वाली गेहूं की उपज की नीलामी सीधे ट्रॉली में ही की जाएगी। इससे किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और नीलामी के तुरंत बाद तौल व भुगतान की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी हो सकेगी। मंडी प्रशासन ने इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को जरूरी निर्देश भी जारी किए हैं।
अधिकारियों की बैठक में बनी नई योजना
कृषि उपज मंडी समिति बैतूल के सभाकक्ष में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं सह-भारसाधक अधिकारी ने की। बैठक में मंडी के सभी अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। इस दौरान मंडी में अपनी उपज बेचने आने वाले किसानों को नीलामी, तौल और भुगतान के दौरान आने वाली समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में यह भी तय किया गया कि मंडी परिसर में किसानों को होने वाली असुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा। अधिकारियों ने मंडी स्टाफ को निर्देश दिए कि किसानों के काम में किसी भी तरह की देरी न हो और पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से संचालित की जाए।
गेहूं सीजन के लिए बनाई गई नई व्यवस्था
आगामी गेहूं सीजन को देखते हुए मंडी प्रशासन ने व्यवस्था को और अधिक सरल बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। अब मंडी में आने वाली गेहूं की उपज की नीलामी सीधे ट्रॉली में ही की जाएगी। पहले कई बार किसानों को अपनी उपज उतारने के बाद नीलामी का इंतजार करना पड़ता था, जिससे समय अधिक लगता था।
नई व्यवस्था के तहत ट्रॉली में रखी उपज की नीलामी होगी और नीलामी पूरी होते ही प्लेट कांटे पर तुरंत तौल कराई जाएगी। इससे मंडी में अनावश्यक भीड़ कम होगी और किसानों का समय भी बचेगा। अधिकारियों ने मंडी स्टाफ को इस व्यवस्था का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए हैं ताकि अधिक से अधिक किसान इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
किसानों से खुली ट्रॉली में उपज लाने की अपील
कृषि उपज मंडी समिति बैतूल ने किसानों से आग्रह किया है कि वे गेहूं सीजन के दौरान अपनी उपज खुली ट्रॉली में ही मंडी में लेकर आएं। इससे मंडी में पहुंचते ही प्राथमिकता के आधार पर उनकी उपज की नीलामी की जा सकेगी।
नीलामी के तुरंत बाद तौल और भुगतान की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी की जाएगी। इससे किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और मंडी की कार्यवाही भी अधिक व्यवस्थित और तेज हो सकेगी।
गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन की तारीख बढ़ी
रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन हेतु किसान पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है। पहले यह तिथि 7 मार्च निर्धारित की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 मार्च कर दिया गया है। यह निर्णय किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
खाद्य विभाग के निर्देशों के अनुसार सिकमी, बटाईदार, कोटवार और वन पट्टाधारी किसान केवल सहकारी समितियों और सहकारी विपणन संस्थाओं में स्थापित पंजीयन केंद्रों पर ही अपना पंजीयन करा सकेंगे।
अनुबंध 2 फरवरी से पहले का होना अनिवार्य
जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार वनाधिकार पट्टा रखने वाले किसानों का वन पट्टा तथा सिकमी या बटाईदार किसानों का अनुबंध 2 फरवरी 2026 से पहले पंजीकृत होना जरूरी है। पंजीयन के समय ई-उपार्जन पोर्टल पर मूल भू-स्वामी की सहमति, आधार नंबर और अन्य आवश्यक जानकारी दर्ज की जाएगी।
पंजीयन प्रक्रिया तभी मान्य मानी जाएगी जब ओटीपी सत्यापन पूरा हो जाएगा। पंजीयन केंद्र पर किसानों को अपना आधार कार्ड, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और सिकमी या बटाई अनुबंध की प्रति साथ लानी होगी। इन दस्तावेजों को ऑपरेटर द्वारा स्कैन कर ई-उपार्जन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इस श्रेणी के किसानों का शत-प्रतिशत सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा।
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बीज और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता
राज्य सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को मजबूत बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। इसी के तहत किसानों को खेती के लिए जरूरी संसाधन समय पर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बैतूल जिले में रबी वर्ष 2025-26 के लिए किसानों को पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध कराए गए हैं। गेहूं, चना, मसूर और सरसों सहित विभिन्न फसलों के बीजों की कुल मांग 26585 क्विंटल थी, जबकि जिले में 33435 क्विंटल बीज उपलब्ध कराए गए। इनमें से 32201 क्विंटल बीज किसानों को वितरित भी किए जा चुके हैं। यह वितरण निजी और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किया गया है।
उर्वरकों का भी पर्याप्त भंडारण किया गया है। जिले में यूरिया, डीएपी, एसएसपी, एमओपी और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों का कुल 110706 मीट्रिक टन भंडारण किया गया। इनमें से 89463 मीट्रिक टन उर्वरक किसानों को वितरित किए जा चुके हैं। प्रशासन लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है ताकि किसानों को खेती के लिए किसी प्रकार की परेशानी न हो।
जायद सीजन की फसलों की भी शुरू हुई बुआई
जिले में जायद मौसम 2026 के दौरान लगभग 19400 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुआई का लक्ष्य रखा गया है। इन फसलों में मूंगफली, मूंग, उड़द और मक्का प्रमुख हैं।
अब तक करीब 500 हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों द्वारा मूंगफली, मूंग, उड़द और मक्का की बुआई की जा चुकी है। प्रशासन द्वारा किसानों को इन फसलों के लिए पर्याप्त मात्रा में बीज और उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि खेती का कार्य सुचारु रूप से जारी रह सके।
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