Betul Commissioner Meeting: बैतूल बैठक में सख्त निर्देश: सड़क सुरक्षा और वन व्यवस्थापन पर कमिश्नर का एक्शन प्लान
Betul Commissioner Meeting: ब्लैक स्पॉट सुधार, राहवीर योजना का प्रभावी क्रियान्वयन और वन प्रकरणों के त्वरित निराकरण पर जोर

Betul Commissioner Meeting: बैतूल में आयोजित दो महत्वपूर्ण बैठकों में प्रशासनिक सख्ती साफ दिखाई दी। संभागायुक्त कृष्ण गोपाल तिवारी ने सड़क सुरक्षा के मुद्दों पर जहां चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स के स्थायी समाधान के निर्देश दिए, वहीं वन व्यवस्थापन से जुड़े मामलों में भी तेजी लाने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में यह शामिल
25 फरवरी को बैतूल में संभागीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संभागायुक्त कृष्ण गोपाल तिवारी ने की। इसमें पुलिस महानिरीक्षक मिथलेश कुमार शुक्ला, मुख्य वन संरक्षक मधु वी. राज, वन संरक्षक अशोक कुमार, कलेक्टर बैतूल नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी, कलेक्टर नर्मदापुरम सुश्री सोनिया मीना, कलेक्टर हरदा सिद्धार्थ जैन, पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेंद्र जैन, पुलिस अधीक्षक हरदा, पुलिस अधीक्षक नर्मदापुरम, डीएफओ नवीन गर्ग, डीएफओ लक्ष्मीकांत वासनिक सहित तीनों जिलों के जिला पंचायत सीईओ और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
राहवीर योजना को प्रभावी ढंग से करें लागू
बैठक में तीनों जिलों बैतूल, हरदा और नर्मदापुरम में राहवीर योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने पर बल दिया गया। संभागायुक्त ने कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय पर सहायता मिलना बेहद जरूरी है। ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था मजबूत की जाए जो दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों की जान बचाने में मदद करते हैं। कैशलेस स्कीम और राहत योजना पर विस्तार से प्रस्तुति दी गई और अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचे।
घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए जोनल प्लान
संभागायुक्त ने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से कहा कि शहरों और कस्बों में ऐसे इलाकों की पहचान की जाए जहां आपातकालीन वाहनों को आने-जाने में दिक्कत होती है। इन क्षेत्रों के लिए अलग से जोनल प्लान तैयार किया जाए ताकि एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहन बिना रुकावट के पहुंच सकें।
ब्लैक स्पॉट्स का हो स्थाई समाधान
बैठक में तीनों जिलों में चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स की समीक्षा की गई। संभागायुक्त ने कहा कि इन स्थानों पर केवल अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी सुधार कार्य किए जाएं। संबंधित विभाग आवश्यक प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजें। मुख्य सड़कों से जुड़ने वाले जंक्शनों पर भी सुरक्षा मानकों के अनुसार सुधार और मरम्मत के निर्देश दिए गए। परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग और सड़क विकास निगम को सेफ्टी ऑडिट के बिंदुओं की नियमित समीक्षा करने को कहा गया।
दुर्घटनाओं की की गई समीक्षा
पिछले वर्ष हुई सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु के मामलों की भी समीक्षा की गई। पुलिस अधीक्षक नर्मदापुरम ने जानकारी दी कि जिले में संवेदनशील स्थानों पर सीपीआर प्रशिक्षण और राहवीर व कैशलेस योजना के संबंध में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उद्देश्य यह है कि दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को तुरंत उपचार मिल सके।
वन व्यवस्थापन पर टास्क फोर्स की बैठक
इसी दिन संभाग स्तरीय टास्क फोर्स समिति की बैठक भी आयोजित की गई। इसमें वन अपराधों की स्थिति और वन व्यवस्थापन से जुड़े प्रकरणों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, नर्मदापुरम वनमंडल सामान्य तथा दक्षिण और पश्चिम बैतूल वनमंडलों द्वारा वन अपराध प्रबंधन प्रणाली सॉफ्टवेयर पर ऑनलाइन प्रविष्टियां की जा रही हैं। वन और पुलिस विभाग के समन्वय से संगठित वन अपराधों पर कार्रवाई की जा रही है।
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अतिक्रमण और प्रतिबंधित निर्माण पर सख्ती
रामपुर भतोड़ी परियोजना के अंतर्गत चोपना परिक्षेत्र में सामूहिक अतिक्रमण के मामलों में वन और पुलिस विभाग को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए। प्रतिबंधित वन क्षेत्रों में किसी भी तरह के स्थायी निर्माण को रोकने पर विशेष जोर दिया गया।
वन व्यवस्थापन मामलों का करें निराकरण
तीनों जिलों में लंबित वन व्यवस्थापन मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई। संभागायुक्त ने कहा कि इन प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाए। भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 4 के अंतर्गत अधिसूचित वनखंडों में धारा 5 से 19 तक की कार्यवाही तय समय सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए गए। वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत व्यपवर्तित वन भूमि के बदले भूमि उपलब्ध कराने और उससे जुड़ी राजस्व प्रक्रिया को भी शीघ्र पूरा करने को कहा गया।
वन ग्रामों की सीमाओं के निर्धारण की समीक्षा करते हुए 16 अप्रैल 2025 के प्रावधानों के अनुरूप अद्यतन कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। संभागायुक्त ने स्पष्ट किया कि वन और राजस्व विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें और टास्क फोर्स की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं। सभी एसडीएम को भी अपने स्तर पर समन्वय बैठकें करने के निर्देश दिए गए।
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