MP Budget 2026: एमपी बजट 2026: 3% महंगाई भत्ता, नियमितीकरण और कैशलेस सुविधा पर कर्मचारियों की टिकी नजर
MP Budget 2026: 18 फरवरी को पेपरलेस बजट पेश करेगी मध्य प्रदेश सरकार, डीए, सातवां वेतनमान और स्वास्थ्य कर्मचारियों के विशेष पैकेज पर बढ़ी उम्मीदें

MP Budget 2026: मध्य प्रदेश में 18 फरवरी को पेश होने वाला बजट इस बार कई मायनों में खास रहने वाला है। सरकार पहली बार पूरी तरह पेपरलेस बजट पेश करने जा रही है। लेकिन तकनीकी बदलाव से ज्यादा चर्चा उन उम्मीदों की है जो लाखों कर्मचारी इस बजट से लगाए बैठे हैं। महंगाई भत्ता, वेतनमान, नियमितीकरण और चिकित्सा सुविधा जैसे कई मुद्दे कर्मचारियों के लिए अहम बन गए हैं।
पहली बार आ रहा पेपरलेस बजट
मध्य प्रदेश सरकार 18 फरवरी को विधानसभा में अपना पहला पेपरलेस बजट पेश करेगी। बताया जा रहा है कि इस बार बजट का आकार पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हो सकता है। डिजिटल माध्यम से पेश होने वाला यह बजट प्रशासनिक दृष्टि से नया प्रयोग माना जा रहा है। हालांकि कर्मचारियों के लिए असली महत्व इस बात का है कि उनकी लंबित मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।
डीए और सातवां वेतनमान मुख्य मुद्दा
- बजट से पहले कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रख दी हैं। मध्य प्रदेश राज्य अधिकारी कर्मचारी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष अशोक पांडे ने कहा है कि राज्य कर्मचारियों को केंद्र सरकार के समान 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जाना चाहिए। यह राशि काफी समय से लंबित बताई जा रही है और कर्मचारी चाहते हैं कि बजट में इसका स्पष्ट प्रावधान किया जाए।
- उन्होंने यह भी कहा कि स्थाई कर्मियों को अब तक सातवें वेतनमान का लाभ नहीं मिला है, जबकि इस विषय पर पहले चर्चा हो चुकी है। कर्मचारियों की अपेक्षा है कि इस बार सरकार ठोस निर्णय ले।
दैनिक वेतनभोगियों और अंशकालिक कर्मचारियों की यह मांग
- कर्मचारी संगठनों ने दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करने की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायित्व मिलना चाहिए। साथ ही अंशकालिक कर्मचारियों को कलेक्टर दर से वेतन दिए जाने की मांग भी उठाई गई है।
- अशोक पांडे ने बताया कि केंद्र स्तर पर आठवें वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और समिति भी बना दी गई है। राज्य सरकार ने भी समिति गठित करने की बात कही थी, लेकिन अभी तक उस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कर्मचारियों का आग्रह है कि बजट में आठवें वेतन आयोग को लेकर स्पष्ट प्रावधान किया जाए।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा अब तक लागू नहीं
कर्मचारी संगठनों ने दो तरह के कर लगाए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि एक कर राज्य स्तर पर और दूसरा केंद्र स्तर पर लिया जा रहा है, जिससे व्यवस्था जटिल हो रही है। वे कर प्रणाली को सरल बनाने की मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा कर्मचारियों के लिए घोषित कैशलेस चिकित्सा सुविधा अब तक लागू नहीं हो सकी है। संगठनों ने मांग की है कि इसके लिए बजट में अलग से राशि निर्धारित की जाए ताकि योजना को जमीन पर उतारा जा सके।
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मंत्रालय कर्मचारियों की अलग हैं अपेक्षाएं
मंत्रालय अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने बताया कि मंत्रालय कर्मचारियों को अभी तक चौथा समयमान नहीं मिला है, जबकि अन्य विभागों में यह लाभ दिया जा चुका है। उन्होंने 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की मांग भी दोहराई।
नायक ने कहा कि अनाज अग्रिम और त्योहार अग्रिम की राशि पिछले दस वर्षों से चार हजार रुपये ही है, जबकि महंगाई लगातार बढ़ी है। इस राशि को बढ़ाकर कम से कम दस हजार रुपये किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से व्यवसायिक कर नहीं लिया जाए।
पिछली घोषणाएं अब तक नहीं हुईं लागू
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले बजट में की गई कई घोषणाएं अब तक लागू नहीं हो पाई हैं। ऐसे में इस बार का बजट कर्मचारियों के लिए उम्मीद और परीक्षा दोनों की तरह देखा जा रहा है। सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार लंबित मांगों पर कितना ठोस निर्णय लेती है।
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स्वास्थ्य कर्मचारियों को चाहिए विशेष पैकेज
समस्त स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह कौरव ने कहा है कि संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए विशेष पैकेज दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि संविदा कर्मचारी नियमित कर्मचारियों के समान कार्य कर रहे हैं, लेकिन वेतन और सुविधाओं में अंतर बना हुआ है।
उन्होंने मांग की कि नर्सिंग ऑफिसरों को भी चिकित्सकों की तरह रात्रिकालीन ड्यूटी भत्ता मिले और इसके लिए बजट में अलग से प्रावधान किया जाए। साथ ही स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसरों को तीसरी और चौथी वेतन वृद्धि का लाभ देने की भी मांग की गई है, ताकि वेतन असमानता खत्म हो सके।
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