NPS Rule Changes 2025: एनपीएस में बड़ा बदलाव: अब फंसा नहीं रहेगा पैसा, रिटायरमेंट पर भी मिलेगी ज्यादा राशि
NPS Rule Changes 2025: रिटायरमेंट की प्लानिंग करने वाले करोड़ों लोगों के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ने एनपीएस के नियमों में ऐसे बदलाव किए हैं, जिनसे खासतौर पर प्राइवेट सेक्टर और गैर-सरकारी निवेशकों को ज्यादा सहूलियत मिलेगी। नए नियमों का मकसद एनपीएस को सरल, लचीला और निवेशकों की जरूरतों के मुताबिक बनाना है। इसके लिए PFRDA ने एनपीएस से जुड़े एग्जिट और निकासी नियमों में संशोधन कर उन्हें 2025 के तहत लागू कर दिया है।
क्या है नए बदलावों की वजह
अब तक कई निवेशक एनपीएस को लेकर इसलिए झिझकते थे क्योंकि इसमें पैसा लंबे समय तक फंसा रहता था। पांच साल का लॉक-इन, सीमित लंपसम निकासी और कड़े एग्जिट नियम लोगों को रोकते थे। नए संशोधनों के जरिए इन अड़चनों को काफी हद तक दूर किया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग रिटायरमेंट के लिए इस योजना को चुन सकें।
नॉन-गवर्नमेंट निवेशकों के लिए खत्म हुआ लॉक-इन
गैर-सरकारी यानी प्राइवेट सेक्टर और आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि अब एनपीएस में पांच साल का अनिवार्य लॉक-इन नहीं रहेगा। पहले यदि कोई निवेशक बीच में योजना छोड़ना चाहता था तो उसे लंबा इंतजार करना पड़ता था। अब जरूरत पड़ने पर निवेशक बिना लॉक-इन की बाध्यता के बाहर निकल सकता है। हालांकि यह सुविधा सरकारी कर्मचारियों को नहीं मिलेगी, उनके लिए पुराने नियम ही लागू रहेंगे।
रिटायरमेंट पर ज्यादा लंपसम निकालने की सुविधा
एनपीएस से बाहर निकलते समय मिलने वाली रकम के अनुपात में भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले रिटायरमेंट पर निवेशक को अपने कुल फंड का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा एन्युटी खरीदने में लगाना जरूरी था, जिससे हर महीने पेंशन मिलती थी। अब गैर-सरकारी निवेशक रिटायरमेंट के समय अपनी जमा पूंजी का 80 प्रतिशत तक हिस्सा एकमुश्त निकाल सकेंगे। इससे लोगों को बड़ी रकम हाथ में मिलेगी, जिसे वे अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल कर सकेंगे।
सिस्टमैटिक निकासी का विकल्प
नए नियमों में एक और सुविधा जोड़ी गई है। निवेशक चाहें तो पूरी रकम एक साथ निकालने के बजाय सिस्टमैटिक तरीके से पैसा निकाल सकते हैं। इससे उन्हें नियमित अंतराल पर आय मिलती रहेगी और खर्चों का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा। यह विकल्प उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो रिटायरमेंट के बाद स्थिर आमदनी चाहते हैं।
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खास परिस्थितियों में पूरी रकम की निकासी
कुछ विशेष हालात में एनपीएस का पूरा फंड निकालने की अनुमति भी दी गई है। यदि कोई निवेशक भारतीय नागरिकता छोड़ देता है तो वह अपनी पूरी जमा राशि एकमुश्त निकाल सकता है। निवेशक की मृत्यु होने पर एनपीएस में जमा रकम नॉमिनी या कानूनी वारिस को दी जाएगी। अगर कोई निवेशक लापता हो जाता है और उसे मृत मान लिया जाता है, तो उसके परिवार को पहले 20 प्रतिशत राशि अंतरिम सहायता के रूप में दी जाएगी।
8 से 12 लाख फंड वालों को भी राहत
जिन निवेशकों का कुल एनपीएस फंड 8 लाख रुपये से ज्यादा और 12 लाख रुपये तक है, उनके लिए भी नियम सरल किए गए हैं। ऐसे निवेशक सीधे 6 लाख रुपये तक की रकम निकाल सकते हैं। शेष राशि से कम से कम छह साल की पेंशन योजना लेना जरूरी होगा, जिससे नियमित आय मिलती रहे।
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सरकारी कर्मचारियों के लिए क्या बदला
सरकारी कर्मचारियों के लिए एनपीएस के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उनके लिए पांच साल का लॉक-इन अब भी लागू रहेगा। 60 वर्ष की उम्र में रिटायरमेंट पर यदि कुल फंड 5 लाख रुपये से अधिक है तो 40 प्रतिशत राशि एन्युटी में और 60 प्रतिशत नकद मिलेगी। केवल उसी स्थिति में पूरा पैसा निकाला जा सकता है जब कुल फंड 5 लाख रुपये से कम हो।
कुल मिलाकर ये बदलाव उन लोगों के लिए फायदेमंद हैं जो रिटायरमेंट के बाद अपने पैसों पर ज्यादा नियंत्रण चाहते हैं। ज्यादा लंपसम और लचीले नियमों से अब एनपीएस आम नागरिकों के लिए पहले से ज्यादा उपयोगी और भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आया है।
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