Adani Gold Mine Singrauli: अडानी ग्रुप को मिली सोने की खदान, एमपी का सिंगरौली बनेगा गोल्ड हब
Adani Gold Mine Singrauli: अब तक कोयले और बिजली उत्पादन के लिए पहचाने जाने वाले मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले को एक नई पहचान बनने वाली है। यहां की धरती से अब सोना निकलेगा। सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र में 23 हेक्टेयर भूमि पर सोना खनन की तैयारी पूरी हो चुकी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यहां से 18 हजार 356 टन सोना निकलेगा।
खनिज विभाग के अफसरों के अनुसार चकरिया गोल्ड ब्लॉक के लिए समझौता पूरा हो चुका है। खदान के संचालन की जिम्मेदारी अडानी ग्रुप की कंपनी गरिमा नेचुरल प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है। कंपनी को यहां पांच साल तक सोने की खदान चलाने का अधिकार मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि पिछले एक साल से यहां पर ड्रिलिंग का काम किया गया और उसी से यह पुष्टि हुई कि जमीन में सोने की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक है।
सर्वे और परीक्षण के कार्य पूरे
इस गोल्ड ब्लॉक का बड़ा हिस्सा सरकारी जमीन पर स्थित है। जबकि कुछ भाग निजी स्वामित्व की भूमि का भी है। कंपनी ने यहां आवश्यक सर्वे और परीक्षण पूरे कर लिए हैं। खनन कार्य शुरू होते ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। प्रशासन का मानना है कि सोने की खदान खुलने से सिंगरौली की अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा।

पहले से मौजूद कोयला खदानें
सिंगरौली पहले से ही कोयले की खदानों के लिए चर्चित है। यहां इस समय 11 बड़ी कोयला खदानें सक्रिय हैं, जिनसे देश के अलग-अलग हिस्सों में बिजली संयंत्रों को कोयला उपलब्ध कराया जाता है। अब इस कड़ी में सोने का उत्खनन जुड़ने से जिले की पहचान और मजबूत होगी। यहां से निकला सोना प्रदेश और देश की आर्थिक गतिविधियों में नई ऊर्जा का काम करेगा।
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दो और स्थान भी किए गए चिन्हित
खनिज अधिकारी ने यह भी बताया कि चकरिया गोल्ड ब्लॉक के अलावा जिले में दो और स्थानों पर गोल्ड ब्लॉक चिन्हित किए गए हैं। इनकी नीलामी पहले ही पूरी हो चुकी है और वहां ड्रिलिंग का काम जारी है। आने वाले समय में जब इन क्षेत्रों का परीक्षण पूरा होगा तो वहां से मिलने वाले सोने की मात्रा भी सार्वजनिक की जाएगी। इस तरह सिंगरौली एक साथ तीन सोने की खदानों के रूप में विकसित होने की ओर बढ़ रहा है।

पहले मिलती थी काले पानी की सजा
सिंगरौली की धरती का इतिहास भी कम रोचक नहीं है। कभी यह इलाका काले पानी की सजा के लिए बदनाम था। यहां कठोर परिस्थितियों में लोगों को दंडित किया जाता था। समय बदला और इसी धरती ने अपने गर्भ में काले हीरे यानी कोयले को जन्म दिया।
कोयले ने न केवल यहां के उद्योगों को मजबूती दी बल्कि पूरे प्रदेश और देश के बिजली उत्पादन में अहम योगदान दिया। अब यही धरती सोना उगलने की तैयारी में है। यानी काले पानी की पहचान अब सोने की पहचान में बदलने जा रही है।
स्थानीय लोगों को यह हैं उम्मीदें
इस प्रोजेक्ट से स्थानीय लोगों में उत्साह है। ग्रामीणों का मानना है कि खदान खुलने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हालांकि, कुछ लोगों को पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव की चिंता भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खनन गतिविधि संतुलित ढंग से की जाए तो इससे जिले की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ होगा और लोगों की आय बढ़ेगी।
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आधुनिक तकनीक से होगा सोना खनन
गरिमा नेचुरल प्राइवेट लिमिटेड ने खदान से जुड़ी अपनी प्राथमिक योजनाओं को प्रशासन के साथ साझा किया है। कंपनी का कहना है कि वह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर खनन कार्य को अंजाम देगी जिससे पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुंचे। साथ ही स्थानीय स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में भी सहयोग देने का आश्वासन दिया गया है।
सिंगरौली की जल्द बनेगी नई पहचान
यदि तीनों खदानों से अपेक्षित मात्रा में सोना मिलता है तो सिंगरौली जिले का नाम देशभर में नई पहचान बनाएगा। अब तक यह इलाका सिर्फ कोयला उत्पादन के कारण जाना जाता था, लेकिन आने वाले समय में यहां से निकलने वाला सोना इसे सोने की धरती के नाम से भी प्रसिद्ध कर सकता है। यह केवल जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश के लिए भी गर्व की बात होगी।
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