Mileage and Engine Life Advisory: E20 पेट्रोल से माइलेज और इंजन लाइफ पर असर? मंत्रालय ने जारी की पूरी सच्चाई
Mileage and Engine Life Advisory: पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाए जाने से वाहनों को होने वाले कथित नुकसान और माइलेज में कमी की चर्चाएं इन दिनों खूब चल रही हैं। इसे देखते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के माइलेज और वाहन के जीवनकाल पर पड़ने वाले प्रभाव पर एक विस्तृत एडवायजरी जारी की है। इसमें हर तरह के सवालों के जवाब मिल जाएंगे।
जारी एडवायजरी में कहा गया है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभ यह है कि जो पैसा पहले कच्चे तेल के आयात पर खर्च किया जाता था, वह अब हमारे किसानों के पास जा रहा है। इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY) 2014-15 से ईएसवाई 2024-25 से जुलाई 2025 तक पिछले ग्यारह वर्षों के दौरान, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMC) द्वारा पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण के परिणामस्वरूप 1,44,087 करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा की बचत/संरक्षण हुआ है।
किसानों को इस साल मिलेगा इतना पैसा (Mileage and Engine Life Advisory)
लगभग 245 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रतिस्थापन (replacement) महत्वपूर्ण ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करता है और लगभग 736 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है, जो 30 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। यह उम्मीद की जाती है कि 20 प्रतिशत मिश्रण पर, अकेले इस वर्ष किसानों को 40,000 करोड़ रुपये का भुगतान होगा और लगभग 43,000 करोड़ रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

प्रदर्शन और माइलेज से जुड़ी चिंताएं (Mileage and Engine Life Advisory)
ई-20 के इस्तेमाल से ई10 ईंधन की तुलना में बेहतर त्वरण (better acceleration), बेहतर सवारी गुणवत्ता (better ride quality) और सबसे महत्वपूर्ण बात, कार्बन उत्सर्जन लगभग 30 प्रतिशत कम होता है। इथेनॉल की उच्च-ऑक्टेन संख्या (पेट्रोल के 84.4 की तुलना में 108.5 से अधिक) इथेनॉल-मिश्रित ईंधन को उच्च-ऑक्टेन आवश्यकताओं के लिए एक मूल्यवान विकल्प बनाती है, जो आधुनिक उच्च-संपीडन इंजनों (modern high-compression engines) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इन वाहनों में और बेहतर प्रदर्शन (Mileage and Engine Life Advisory)
ई20 के लिए ट्यून किए गए वाहन बेहतर त्वरण प्रदान करते हैं जो शहरी ड्राइविंग परिस्थितियों में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारक है। इसके अतिरिक्त, इथेनॉल की उच्च वाष्पीकरण ऊष्मा, इनटेक मैनिफोल्ड तापमान को कम करती है, जिससे वायु-ईंधन मिश्रण घनत्व बढ़ता है और आयतन दक्षता (volume efficiency) में वृद्धि होती है।
रिसर्च ऑक्टेन नंबर में की गई बढ़ोतरी (Mileage and Engine Life Advisory)
पहले भारत में पेट्रोल 88 के रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) के साथ बेचा जाता था। आज, भारत में सामान्य पेट्रोल का आरओएन 91 है, जो BS-VI मानकों को पूरा करता है, जिसका उद्देश्य हानिकारक उत्सर्जन को कम करना है। हालांकि, अब इसमें इथेनॉल 20 मिलाकर इसे और बेहतर करके आरओएन 95 कर दिया गया है, जिससे बेहतर एंटी-नॉकिंग गुण और प्रदर्शन प्राप्त होता है।

ईंधन दक्षता में कमी के दावें गलत (Mileage and Engine Life Advisory)
एडवायजरी के अनुसार यह कहना गलत है कि ई20 ईंधन दक्षता में भारी कमी लाता है। वाहन का माइलेज केवल ईंधन के प्रकार से परे कई कारकों से प्रभावित होता है। इनमें ड्राइविंग की आदतें, रखरखाव के तरीके जैसे तेल बदलना और एयर फिल्टर की सफाई, टायर का दबाव और तालमेल और यहां तक कि एयर कंडीशनिंग का भार भी शामिल है।
ई-20 से दक्षता में कमी आना संभव नहीं (Mileage and Engine Life Advisory)
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के साथ-साथ प्रमुख वाहन निर्माताओं के साथ व्यापक चर्चा की गई है। ई-10 वाहनों में ईंधन दक्षता (fuel efficiency) में कमी (यदि कोई आई है) मामूली रही है। कुछ निर्माताओं के वाहन 2009 से ही ई-20 के अनुकूल हैं। ऐसे वाहनों में ईंधन दक्षता में किसी भी गिरावट का सवाल ही नहीं उठता।
ब्राजील में 27 प्रतिशत होता इथेनॉल मिक्स (Mileage and Engine Life Advisory)
इसके अलावा, यह भी उल्लेखनीय है कि ब्राजील वर्षों से बिना किसी समस्या के ई-27 पर सफलतापूर्वक चल रहा है। टोयोटा, होंडा, हुंडई आदि जैसी ही वाहन निर्माता कंपनियां वहां भी वाहन बनाती हैं। इसके अलावा, ई-20 के सुरक्षा मानक बीआईएस विनिर्देशों और ऑटोमोटिव उद्योग मानकों के माध्यम से अच्छी तरह स्थापित हैं। चलाने की क्षमता, स्टार्ट करने की क्षमता, धातु संगतता (metal compatibility), प्लास्टिक संगतता (plastic compatibility) सहित अधिकांश मानकों में कोई समस्या नहीं है।
पुराने वाहनों में कुछ पुर्जे बदलने की आवश्यकता (Mileage and Engine Life Advisory)
केवल कुछ पुराने वाहनों के मामले में, कुछ रबर पुर्जों और गास्केट को गैर-मिश्रित ईंधन का उपयोग करने की तुलना में पहले बदलने की आवश्यकता हो सकती है। यह प्रतिस्थापन सस्ता है और नियमित सर्विसिंग के दौरान आसानी से किया जा सकता है। वाहन के जीवनकाल में इसे एक बार करने की आवश्यकता हो सकती है और यह किसी भी अधिकृत वर्कशॉप में की जाने वाली एक सरल प्रक्रिया है।
इसलिए नहीं हो रहा इथेनॉल मिक्स पेट्रोल सस्ता (Mileage and Engine Life Advisory)
कुछ लोगों ने चिंता जताई है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल गैर-मिश्रित ईंधन से सस्ता होना चाहिए और यह लागत लाभ ग्राहकों तक नहीं पहुंचाया गया है। वे नीति आयोग की एक रिपोर्ट का हवाला दे रहे हैं। 2020-21 में, जब नीति आयोग की रिपोर्ट तैयार की गई थी, तब इथेनॉल पेट्रोल से सस्ता था। समय के साथ, इथेनॉल की खरीद मूल्य में वृद्धि हुई है और अब इथेनॉल का भारित औसत मूल्य परिष्कृत पेट्रोल की लागत से भी अधिक है।
इथेनॉल की औसत खरीद लागत अभी इतनी (Mileage and Engine Life Advisory)
वर्तमान में, इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2024-25 के लिए इथेनॉल की औसत खरीद लागत, 31 जुलाई 2025 तक, परिवहन और जीएसटी सहित 71.32 रुपये प्रति लीटर है। ई-20 के उत्पादन के लिए, ओएमसीएस इस खरीदे गए इथेनॉल का 20 प्रतिशत मोटर स्पिरिट (MS) के साथ मिलाते हैं। सी-भारी गुड़ आधारित इथेनॉल की कीमत 46.66 रुपये (ईएसवाई 2021-22) से बढ़कर 57.97 रुपये (ईएसवाई 2024-25) हो गई।
मक्का आधारित इथेनॉल भी हुआ महंगा (Mileage and Engine Life Advisory)
इसी अवधि में मक्का आधारित इथेनॉल की कीमत 52.92 रुपये से बढ़कर 71.86 रुपये हो गई। पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल की कीमत में वृद्धि के बावजूद, तेल कंपनियां इथेनॉल मिश्रण जनादेश से पीछे नहीं हटी हैं क्योंकि यह कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करता है, किसानों की आय और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ाता है।
बीमा वैधता पर भी नहीं पड़ेगा कोई असर (Mileage and Engine Life Advisory)
इथेनॉल मिश्रण एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। कुछ लोग चुनिंदा जानकारियों को चुन-चुनकर और यह झूठा बयान देकर कार मालिकों के मन में भय और भ्रम पैदा करके इसे पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं कि बीमा कंपनियां ई-20 ईंधन के इस्तेमाल से होने वाले कार नुकसान को कवर नहीं करेंगी।
यह भय फैलाने वाली बात पूरी तरह से निराधार है और एक बीमा कंपनी ने स्पष्ट किया है, जिसके ट्वीट के स्क्रीनशॉट का जानबूझकर गलत अर्थ निकालकर भय और भ्रम पैदा किया गया था। ई-20 ईंधन के इस्तेमाल का भारत में वाहनों के बीमा की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता है। (Mileage and Engine Life Advisory)
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